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जब गिर रहा हो शेयर बाजार, तब इस रूल से बनता है डबल प्रॉफिट

गिरावट के समय किया गया इन्‍वेस्‍टमेंट पुराने शिखर पर पहुंचने के साथ ही फायदे का सौदा साबित हो जाता है...

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नई दिल्‍ली. शेयर बाजार ने मंगलवार को अपने इतिहास की सातवीं सबसे बड़ी गिरावट देखी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1274 प्वाइंट्स लुढ़कर 33482.81 पर खुला। निफ्टी 390 प्वाइंट्स की गिरावट के साथ 10,276.30 पर नजर आया। इंट्रा-डे में 14 महीने के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट है। इसके पहले 11 नवंबर 2016 को सेंसेक्स 1689 प्वाटइंट नीचे आ गया था। इससे निवेशकों के कुछ ही मिनट में करीब 5 लाख करोड़ रुपए डूब गए। 

 

क्‍या आपको पता है कि शेयर बाजार जब टूटता है तो वह प्रॉफिट का मौका भी देता है। इस प्रॉफिट के पीछे शेयर मार्केट का एक खास रूल काम करता है। जब शेयर बाजार में हाहाकार मचा हो, तो भी कमाई का स्‍कोप बचा होता है। हालांकि यह कमाई तुरंत नहीं होती, लेकिन लॉन्‍ग और मिड टर्म में मार्केट से आप प्रॉफिट हासिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे... 

 

 

शेयर मार्केट की होती है एक साइकिल 
ज्‍यादातर एक्‍सपर्ट के मुताबिक, शेयर मार्केट की एक खास साइकिल होती है। इसके अनुसार रिकॉर्ड लेवल पर आने के बाद स्‍कॉट मार्केट में गिरावट देखी जाती है। उसके बाद फिर यह अपने पुराने लेवल पर पहुंचने की कोशिश करता है।  फिलहाल इंडियन स्‍टॉक मार्केट में यह ट्रेंड है।  हाल में देखें तो निफ्टी और सेंसेक्‍ट ऑल टाइम हाई पर थे। सेंसेक्‍स 36400 और निफ्टी 11700 का ऑलटाइम हाई का अंकड़ा टच कर चुका है। इसके बाद मार्केट में गिरावट की आशंका थी। इसे मार्केट में करेक्‍शन आना कहते हैं। 

 

 

गिरावट के बाद फिर पीक पकड़ता है मार्केट 
सामान्‍य तौर पर इकोनॉमी ठीक-ठाक प्रदर्शन कर रही हो। इंडस्‍ट्री तथा अन्‍य सेक्‍टर्स का डाटा ठीक ठाक हो। तो थोड़े समय की गिरावट के बाद मार्केट फिर से अपने पुराने लेवल को छूने की कोशिश करता है। ऐसे में गिरावट के समय किया गया इन्‍वेस्‍टमेंट पुराने शिखर पर पहुंचने के साथ ही फायदे का सौदा साबित हो जाता है। फिलहाल इंडियन इकोनॉमी इस मोड में दिख रही है।  इस दौर की खरीददारी को एक्‍सपर्ट बाई ऑन डिप कहते हैं। 

 

 

 

इसे ऐसे समझें 

 

उदाहरण नंबर-1

 

कंडीशन- जब मार्केट अपने पीक पर है।
 

आपका निवेश और इफेक्‍ट    
मान लीजिए आप आप 36 हजार के लेवल पर मार्केट में निवेश करते हैं। आपका निवेश 10 हजार रुपए का है। मार्केट में किसी कंपनी के  एक शेयर की कीमत 100 रुपए है। ऐसे में आपको इस पर करीब 100 शेयर मिलेंगे। मानलीजिए बाजार यहां से गिर रहा है।  आपकी कंपनी के शेयर भी नीचे आते हैं और उनकी वैल्‍यू 70 रुपए प्रति यूनिट रह जाती है।  ऐस में आपके टोटल 100 शेयर की वैल्‍यू 7 हजार रह जाएगी। मान लीजिए मार्केट यहां से पीक पकड़ता है और आपके शेयर की वैल्‍यू फिर से 100 रुपए प्रति यूनिट हो जाती है और आपके शेयर की वैल्‍यू फिर से 10 हजार हो जाएगी। लेकिन आपका प्रॉफिट 0 होगा। 

 

 

उदाहरण नंबर-2

 

कंडीशन- जब मार्केट गिरा हुआ हो। 

 

आपका निवेश और इफेक्‍ट 
मान लीजिए  शेयर मार्केट अपने पीक पर था। एक शेयर की कीमत 100 रुपए थी। तब आपने पैसा नहीं लगाया। जब मार्केट गिरा और शेयर की वैल्‍यू 70 रुपए आ गई । ऐसे में 10 हजार के निवेश पर आपको 142 शेयर मिलेंगे। मतलब आपको सीधे सीधे 42 शेयर का फायदा। अब मान लीजिए मार्केट फिर से पुराने पीक पर पहुंच जाता है और एक शेयर की वैल्‍यू 100  रुपए हो जाती है। ऐसे में आपके निवेश की वैल्‍यू 14200 रुपए। मतलब आपको सीधा 4200 रुपए और 42 अतिरिक्‍त शेयर का दोहरा फायदा।    

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