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पुलवामा हमले का भारतीय बाजार पर असर, विदेशी निवेशकों ने निकाल लिए इतने हजार करोड़ रुपए

दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से निवेशकों ने लिया ऐसा फैसला

Foreign portfolio investors pull out over Rs 1,900 cr from debt market in Feb

FPI pull out over Rs 1900 cr from debt market in Feb: पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद सीमा पार तनाव बढ़ने के मद्देनजर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने फरवरी महीने में ऋण प्रतिभूतियों (डेट सिक्योरिटीज) से अब तक 1,900 करोड़ रुपए से अधिक की निकासी की है। ताजा आंकड़ों के अनुसार इस महीने में 22 फरवरी तक FPI ने शेयरों में 2,039 करोड़ रुपए की लिवाली की जबकि ऋणपत्रों में वे बिकवाल रहे। जनवरी महीने में ऋणपत्रों और शेयरों दोनों में एफपीआई ने 5,360 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की थी।

नई दिल्ली.

पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद सीमा पार तनाव बढ़ने के मद्देनजर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने फरवरी महीने में ऋण प्रतिभूतियों (डेट सिक्योरिटीज) से अब तक 1,900 करोड़ रुपए से अधिक निकाल लिए हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार इस महीने में 22 फरवरी तक FPI ने शेयरों में 2,039 करोड़ रुपए की लिवाली की जबकि ऋणपत्रों में वे बिकवाल रहे। जनवरी महीने में ऋणपत्रों और शेयरों दोनों में एफपीआई ने 5,360 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की थी।

 

हमले के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ा तनाव

पीटीआई की खबर के मुताबिक एक से 22 फरवरी के बीच एफपीआई ने ऋणपत्रों से कुल 1,949 करोड़ रुपए निकाले। हालांकि, उन्होंने शेयर बाजार में ज्यादा निवेश किया। इस तरह वे ऋणपत्रों तथा शेयरों में महज 98 करोड़ रुपये के शुद्ध लिवाल रहे। मॉर्निंगस्टार इंवेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के वरिष्ठ विश्लेषक प्रबंधक (शोध) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि एफपीआई की हालिया बिकवाली का कारण पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने को माना जा सकता है।

 

चुनावों से भी प्रभावित हो रहे हैं निवेशक

उन्होंने कहा, ‘‘एफपीआई लंबे समय से भारत को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। ऐसे में हालिया घटनाओं से उनकी धारणा और प्रभावित हुई होगी।’’ श्रीवास्तव ने कहा कि अभी एफपीआई निवेश की दिशा का अनुमान लगाना जल्दीबाजी है क्योंकि वे अल्पकालिक गतिविधियों तथा घटना विशेष से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमापार तनाव के अलावा आगामी आम चुनाव के परिणामों के अनुमान को लेकर भी एफपीआई सतर्कता बरत रहे हैं।

 

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