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21.8 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर म्‍यूचुअल फंड का एसेट बेस, नवंबर में 1.26 लाख करोड़ बढ़ा निवेश

इंडस्‍ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी फंड हाउसेस का कुल फंड मैनेजमेंट 21.8 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर पहुंच गया है।

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नई दिल्‍ली. सरकार की तरफ से बैंक रिकैपिटलाइजेशन और भारतमाला प्रोजेक्‍ट्स जैसे बड़े रिफॉर्म्‍स के एलान का पॉजिटीव असर म्‍यूचुअल फंड्स स्‍कीम्‍स में निवेश पर हुआ है। इस साल नवंबर में निवेशकों ने म्‍यूचुअल फंड्स में 1.26 लाख करोड़ रुपए लगाए। इसके चलते इंडस्‍ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी फंड हाउसेस का कुल फंड मैनेजमेंट 21.8 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर पहुंच गया। एसोसिएशन ऑफ म्‍यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्‍त वर्ष 2017-18 में अप्रैल से नवंबर के दौरान पहले आठ महीने में म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम्‍स में निवेश 3.8 लाख करोड़ हुआ है।

 

Amfi के आंकड़ों के अनुसार, निवेशकों ने पिछले महीने यानी नवंबर में 1.26 लाख करोड़ रुपए म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम्‍स में लगाए। जबकि अक्‍टूबर में यह निवेश 51 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा था। नवंबर में फंड्स में हुए निवेश में सबसे ज्‍यादा कंट्रीब्‍यूशन इक्विटी, इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग स्‍कीम्‍स और लिक्विड फंड्स का रहा है।

 

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सरकार के रिफॉर्म्‍स से मजबूत हुआ सें‍टीमेंट

बजाज कैपिटल के सीईओ राहुल पारीख का कहना है कि सरकार की ओर से बड़े रिफॉर्म्‍स के एलान का पॉजिटिव असर हुआ है। इसमें सरकारी बैंकों का रिकैपिटलाइजेशन, भारतमाला प्रोजेक्‍ट जैसे एलान शामिल हैं। इनके चलते अगले 2-3 साल में अच्‍छी कमाई होने की उम्‍मीद बढ़ी है। मूडीज की तरफ से भारत की सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड करने और इक्विटी मार्केट में विदेशी निवेशकों का निवेश लगातार बने रहने से सेंटीमेंट और मजबूत हुआ है।

 

लिक्विड फंड से 77 हजार करोड़

लिक्विड फंड्स या मनी मार्केट कैटेगरी के तहत निवेश कैश एसेट्स जैसे ट्रेजरी बिल, कम अवधि में डिपॉजिट सर्टिफिकेट या कॉमर्शियल पेपर आदि में होता है। इस कैटेगरी के जरिए नवंबर में म्‍यूचुअल फंड्स में इनफ्लो 77 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा रहा।

 

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इक्विटी और इक्विटी लिंक्‍ड स्‍कीम्‍स से 20 हजार करोड़

एएमएफआई के आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी और इक्विटी लिंक्‍ड स्‍कीम्‍स के जरिए म्‍यूचुअल फंड्स स्‍कीम्‍स में इनफ्लो नवंबर के दौरान 20,300 करोड़ रुपए रहा। इसके अलावा 7,600 करोड़ रुपए से ज्‍यादा बैलेंस्‍ड फंड के जरिए निवेश हुआ है। वहीं, 9,300 करोड़ से ज्‍यादा निवेश डेट फंड में हुआ। दूसरी ओर, गोल्‍ड ईटीएफ से 89 करोड़ रुपए का आउटफ्लो नवंबर में देखने को मिला। यानी, इस फंड से निवेशकों ने अपने पैसे निकाल लिए।

 

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गोल्‍ड, रियल्‍टी का ठंडा रिस्‍पांस

राहुल पारीख का कहना है कि रियल एस्‍टेट और गोल्‍ड में ठंडे रिस्‍पांस और पारंपरिक सेविंग्‍स इंस्‍ट्रूमेंट्स में कम ब्‍याज के चलते निवेशकों ने इक्विटी में अपना निवेश बढ़ा दिया है। इक्विटी और डेट के मुकाबले म्‍यूचुअल फंड में बढ़ रहे निवेश से इसकी लोकप्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है।

 

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21 लाख करोड़ से ज्‍यादा हुआ म्‍यूचुअल फंड का बेस

एएमएफआई के आंकड़ो से यह साफ है कि देश में म्‍यूचुअल फंड की 42 कंपनियों के पास नवंबर आखिर तक एसेट बेस रिकॉर्ड 21.79 लाख करोड़ रुपए हो गया। अक्‍टूबर में यह 21.41 लाख करोड़ रुपए था। शेयरखान के डायरेक्‍टर (इन्‍वेस्‍टमेंट) स्‍टेफन ग्रोइनिंग का कहना है कि म्‍यूचुअल फंड में बढ़ती रिटेल भागीदारी काफी उत्‍साहित करने वाली है। इंडस्‍ट्री की ग्रोथ में इनका बढ़ा रोल है।

राहुल पारीख का कहना है कि म्‍यूचुअल फंड इंडस्‍ट्री के लिए डिजिटल इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लेटफॉर्म एक बड़ा ड्राइवर साबित हो रहा है। इससे सैलरीड युवा अधिक से अधिक आ‍कर्षित हो रहे हैं।

 
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