तनाव /अमेरिका-ईरान की टेंशन का भारत पर कैसे होगा असर, 5 प्वाइंट्स से समझें

  • भारत ने लगभग 10 प्रतिशत तेल पर्शियन देशों से आयात किया है। 
  • जून के मध्य में भारत में  ब्रेंट ऑयल का औसत 8 प्रतिशत से कम हो गया है।

Moneybhaskar.com

Jun 25,2019 06:33:13 PM IST

नई दिल्ली। अमेरिका के शक्तिशाली सर्विलांस ड्रोन को मार कर गिराए जाने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। ऐसे में इसका असर विश्व के बाकी देशों पर भी दिखाई दे रहा है। भारत जो कि मध्य पूर्वी तेल पर बहुत अधिक निर्भर है, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को बढ़ती आशंका के साथ देख रहा है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन बढ़ती है तो इसका सीधा असर ईरान से भारत आने वाले तेल पर पड़ेगा, जिसके चलते भारत की चिंता भी काफी हद तक बढ़ गई है। आइए जानते हैं कैसे इन दो देशों के बीच होने वाले झगड़े का असर भारतीय बाजार पर पड़ेगा।

1. धीमी हो सकती है विकास की रफ्तार

सरकारी डाटा दिखाते हैं कि भारत ने पिछले वित्त वर्ष ईरान से 84 फीसदी क्रूड ऑयल आयात किया था। कुल आयात होने वाले तेल के हर तीन में से दो बैरल संकट ग्रस्त क्षेत्र से आते हैं। मध्य पूर्व में होने वाले इस युद्ध के चलते तेल के दाम बढ़ने की आशंका है, इससे कंज्यूमर प्राइस बढ़ने और देश के बाहरी घाटे के बढ़ने की भी संभावना है। इसके चलते देश का आर्थिक विकास पटरी से उतर सकता है।

2. और भी बढ़ सकता है वित्तीय घाटा

नॉर्मुरा होल्डिंग्स इंक में भारत की प्रमुख अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने कहा कि देश में कच्चे तेल के एक बैरल की कीमत में प्रत्येक 10 डॉलर की वृद्धि से भारत के चालू वित्तीय घाटे में सकल घरेलू उत्पाद के 0.4 फीसदी के बराबर इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण देश पहले ही ईरानी बैरल का विकल्प ढूंढने के लिए संघर्ष कर रहा है।

3. तेल की हो सकती है कमी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में लगभग 10 प्रतिशत तेल खाड़ी देशों से आयात किया है। ईरान की ओर से अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने और पर्शियन गल्फ के पास टैंकरों पर हमले के कारण दोनों देश युद्ध की कगार पर पहुंच गए हैं, जिसके कारण जून मध्य में ब्रेंट क्रूड की कीमत काफी कम थी, लेकिन अब इसमें तकरीबन 8 फीसदी का इजाफा हो गया है। भारत के पास इमरजेंसी क्रूड रिजर्व के तौर पर 3.91 करोड़ बैरल तेल मौजूद है, जो सिर्फ 9.5 दिनों के लिए ही काफी है। तुलनात्मक रूप से, चीन के पास लगभग 55 करोड़ बैरल के भंडार होने का अनुमान है, जबकि अमेरिका के पास 64.5 करोड़ बैरल तेल मौजूद हैं।

4. बढ़ सकती है महंगाई

कुछ समय पहले तक एशिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था रहा भारत का आर्थिक विकास वित्त वर्ष 2018-19 के अंतिम तीन महीनों में पिछले साल से कम होकर 5.8 फीसदी रह गया। यह आंकड़ा Bloomberg के सर्वे में दिए गए 6.3 फीसदी के आकलन से काफी कम है। जनवरी में महंगाई दर 1.97 फीसदी थी, जो मई तक आते-आते 3.05 फीसदी हो गई। देश बेरोजगारी के बढ़ते स्तर से जूझ रहा है और देश के बैंकिंग सिस्टम की समस्याएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में तेल की कमी से महंगाई और बढ़ सकती है।

मोदी तलाश रहे हैं समाधान

प्रधानमंत्री मोदी दोनों देशों के बीच की इस समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं, और 47.6 मिलियन बैरल की संयुक्त क्षमता के साथ दो नए भंडार जोड़ने की योजना बना रहे हैं। भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारतीय नौसेना ने पिछले हफ्ते पर्शियन गल्फ में अपने दो जहाजों को तैनात किया, जबकि देश के तेल मंत्री सऊदी अरब और ओपेक प्लस गठबंधन के लिए पहुंच गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे उचित स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं।

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