विज्ञापन
Home » Market » Forexknow how shell companies convert blackmoney into white

शेल कंपनियों पर सरकार का वार, ऐसे चलता है ब्लैकमनी को व्हाइट करने का खेल

सरकार को संदेह है कि देश में लगभग 9 लाख शेल कंपनियां हैं। हम यहां शेल कंपनियों के रजिस्ट्रेशन, ऑपरेशन के तरीके आदि के बारे में बता रहे हैं...

1 of
 
नई दिल्ली. नोटबंदी के बाद ब्लैकमनी का पता लगाने के लिए सरकार ने तगड़ा एक्शन लिया है। इनमें कई पॉलिटिकल लीडर्स के नाम भी सामने आए हैं। ईडी की छापेमारी में सैकड़ों कंपनियों के नामों का खुलासा हुआ है, जिन्हें ब्लैकमनी को वाइट करने में इस्तेमाल किया है। सरकार को संदेह है कि देश में लगभग 9 लाख शेल कंपनियां हैं। हम यहां शेल कंपनियों के रजिस्ट्रेशन, ऑपरेशन के तरीके आदि के बारे में बता रहे हैं...
 
 
कैसे होता है रजिस्ट्रेशन
एक चार्टर्ड अकाउंटैंट ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि शेल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन सामान्य कंपनियों के तरह होता है। सामान्य कंपनियों की तरह इनमें डायरेक्टर्स होते हैं। साथ ही रिटर्न भी फाइल किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इन कंपनियों का मालिक कोई भी हो, लेकिन ये दूसरों के काम आती हैं।
ऑपरेशन की बात करें तो इन कंपनियों में किसी तरह का कोई काम नहीं होता, सिर्फ कागजों पर एंट्रीज दर्ज की जाती हैं। सरल शब्दों में कहें तो यह कागजों पर बनी कंपनी होती है।
 
 
किस काम आती हैं ये कंपनियां
ये कंपनियां ब्लैकमनी को वाइट बनाने के काम आती हैं। सीए के मुताबिक ये कंपनियां इस काम में रूट चैनल का काम करती हैं।
सीए ने उदाहरण देकर समझाया कि अगर मेरे पास 50 लाख रुपए हैं तो मैं अलग-अलग 10 कंपनियों के अकाउंट में डाल दूंगा। इस पैसे को एक्सपेंस के नाम पर उन कंपनियों के अकाउंट से निकाल दिया जाएगा या फिर एक कंपनी से दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। इस प्रॉसेस को मनी लॉन्डरिंग कहा जाता है।
 
 
क्या बिजनेस करती हैं ये कंपनियां
इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया के पूर्व प्रेसीडेंट और सीए अमरजीत चोपड़ा का कहना है शेल कंपनियों में कोई खास कैपिटल नहीं होती है और न वे नियमित तौर पर कोई बिजनेस करती हैं। आम तौर पर इन कंपनियों में शेयरों का लेन देने होता है और इसके जरिए ब्‍लैक मनी को व्‍हाइट किया जाता है। नोट बंदी के दौरान भी बड़े पैमाने पर शेल कंपनियों के जरिए ब्‍लैक मनी को व्‍हाइट किया गया।
 
 
क्या ये कंपनियां देती हैं टैक्स
मार्केट एक्सपर्ट विवेक मित्तल के मुताबिक इन कंपनियों का इस्तेमाल मुख्य रूप से ब्लैकमनी को कम से कम खर्च में वाइट बनाने में किया जाता है। इन कंपनियों में टैक्स को पूरी तरह से बचाने या कम से कम रखने की व्यवस्था होती है। इसमें पूरे पैसे को एक्सपेंस के तौर पर दिखाया जाता है, जिससे टैक्स भी नहीं लगता है।
 
 
नोटबंदी के दौरान शेल कंपनियों का हुआ खासा इस्तेमाल
नवंबर में सरकार द्वारा नोटबंदी के एलान के बाद ये कंपनियां खासी इस्तेमाल में आईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोटबंदी के साथ ब्लैकमनी रखने वालों ने 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट जमा करने के लिए चैनल के तौर पर इन कंपनियों का इस्तेमाल किया। ऐसे कई मामले सामने भी आए। यह मसला इतना गंभीर था कि पीएमओ को शेल कंपनियों का ब्योरा लेने के लिए फरवरी में एक हाई लेवल मीटिंग भी बुलानी पड़ी थी।
 
अगली स्लाइड में पढ़िए- देश में हैं कितनी शेल कंपनियां
 
 

देश में हैं कितनी शेल कंपनियां
- सरकारी सूत्रों के मुताबिक देश में इस वक्त 15 लाख कंपनियां रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से सिर्फ छह लाख ही एनुअल रिटर्न फाइल करती हैं। सरकार मानती है कि बाकी कंपनियों में से ज्यादातर पैसों के हेरफेर में शामिल हैं।
prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन