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मोदी के लिए नासूर बन सकता है रुपया, एक वजह से खड़ी होंगी 5 मुसीबत

डॉलर की तुलना में रुपया 70 के स्तर को पार करते हुए अब तक के रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया।

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नई दिल्ली. डॉलर की तुलना में रुपया 70 के स्तर को पार करते हुए अब तक के रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया। इससे जहां इंपोर्ट बेस्ड कंपनियों को झटका लगेगा, वहीं आईटी और फार्मा जैसी एक्सपोर्ट बेस्ड कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही महंगाई बढ़ने की आशंकाएं भी पैदा हो गई हैं। इसको लेकर पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार अपोजिशन के निशाने पर भी है। मनीभास्कर यहां बता रहा है कि कमजोर होता रुपया मोदी सरकार के लिए कौन सी 5 बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है।

 

 

# 1.82 लाख करोड़ रु बढ़ सकता है भारत का ऑयल इंपोर्ट बिल

रुपए के कमजोर होने से भारत के लिए विदेश से ऑयल खरीदना महंगा हो जाएगा, जिसका इंपोर्ट बिल पर खासा असर पड़ेगा। इससे वित्त वर्ष 2018-19 में भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल लगभग 26 अरब डॉलर (1.82 लाख करोड़ रुपए) बढ़ने का अनुमान है। गुरुवार को रुपया डॉलर की तुलना में 70.15 के स्तर के साथ रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया

एक अधिकारी ने कहा, ‘शुरुआत में हमारा वित्त वर्ष के दौरान 65 डॉलर प्रति बैरल के एवरेज प्राइस पर कुल 108 अरब डॉलर यानी 7.02 लाख करोड़ रुपए के क्रूड के इंपोर्ट का अनुमान था। इसके लिए एक्सचेंज रेट भी 65 रुपए प्रति डॉलर माना गया था।’

हालांकि 14 अगस्त तक एक्सचेंज रेट एवरेज 67.6 प्रति डॉलर रहा। उन्होंने कहा कि यदि बाकी वित्त वर्ष के लिए डॉलर की तुलना में रुपया 70 के आसपास बना रहता है तो ऑयल इंपोर्ट बिल 114 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। गौरतलब है कि भारत अपनी ऑयल की जरूरतों 80 फीसदी इंपोर्ट पर निर्भर है।



 

# ट्रेड डेफिसिट को भी लगेगा झटका

ऑयल इंपोर्ट बिल बढ़ने से भारत को ट्रेड डेफिसिट के मोर्चे पर भी तगड़ा झटका लग सकता है। इसका असर पहले से ही दिखने लगा है। जुलाई में ट्रेड डेफिसिट 18 अरब डॉल रहा था जो बीते 5 साल से ज्यादा वक्त का उच्चतम स्तर था। एक्सपोर्ट और इंपोर्ट के बीच के अंतर को ट्रेड डेफिसिट कहा जाता है। अगर रुपए की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो आगे ट्रेड डेफिसिट के मोर्चे पर हालात और बिगड़ सकते हैं।

ट्रेड डेफिसिट से करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर प्रेशर बढ़ता है, जो इकोनॉमी के लिहाज से खासा संवेदनशील फैक्टर है।

 

 

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#पेट्रोल-डीजल होंगे महंगे

रुपए की कमजोरी के परिणामस्वरूप पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी, जिसका पूरा असर इस महीने के अंत से देखने को मिल सकता है। एक अधिकारी ने कहा, ‘भले ही ऑयल कंपनियां रोजाना पेट्रोल और डीजल की कीमतें तय करती हैं, लेकिन ऐसा पिछले पखवाड़े के दौरान एवरेज इनपुट्स को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। इस प्रकार आज का रेट 1 से 15 अगस्त के बीच इंटरनेशनल ऑयल प्राइस और एक्सचेंज रेट पर आधारित है।’

हालांकि इससे ऑयल एंड नैचुरल गैस (ONGC) जैसे ऑयल प्रोड्यूसर्स के साथ ही एक्सपोर्टर्स  की अर्निंग बढ़ेगी। ओएनजीसी अमेरिकी डॉलर के टर्म में रिफाइनर्स को बिलिंग करती है।

 

 

# बढ़ सकती है महंगाई

देश में खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेगा। वहीं, एडिबल ऑयल भी महंगे होगे।

अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, जिससे ये प्रोडेक्ट भी महंगे हो सकते हैं।

 

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#कारें और सीवी हो सकते हैं महंगे

ऑटो इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, साथ ही डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ने का डर रहता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रुपए में गिरावट बनी रही तो कार कंपनियां आगे कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं। इसके अलावा कमर्शियल व्हीकल्स की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

 
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