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रुपए की मजबूती सरकार के लिए बन सकती है चुनौती, इकोनॉमी पर ऐसे होगा असर

सरकार के लिए रुपए की मजबूती चैलेंज भी बन सकती है, जिसका देश की इकोनॉमी पर निगेटिव असर दिख सकता है।

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नई दिल्ली. मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 20 पैसे से ज्यादा मजबूत होकर 63.50 के भाव पर पहुंच गया,  जो 2.5 साल का टॉप लेवल है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2018 की पहली तिमाही में भी रुपए में मजबूती का दौर जारी रहने की उम्मीद है। बजट तक रुपया 62.80 के भाव पर आ सकता है। रुपए का यह आउटलुक कुछ सेक्टर्स के लिए पॉजिटिव खबर हो सकती है। लेकिन सरकार के लिए रुपए की मजबूती चैलेंज भी बन सकती है, जिसका देश की इकोनॉमी पर निगेटिव असर दिख सकता है।

 

  

बता दें कि 2017 की शुरूआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 68.06 के स्तर पर था, जो अब करीब 7 फीसदी मजबूत होकर 63.50 के स्तर को पार कर गया है। इससे पहले जून 2015 में रुपए ने इस स्तर तक मजबूती देखी थी। वहीं, डॉलर इंडेक्स में 201 की शुरूआत से ही रुपए के मुकाबले कमजोरी बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स 92 के स्तर पर आ गया है, जो 2017 की शुरूआत में 102 के ऊपर था। 

 

निर्यात, जॉब्स हो सकते हैं प्रभावित
रुपए में मजबूती महंगाई के लिहाज से तो पॉजिटिव है क्योंकि यह आयात को सस्ता कर देती है। वहीं, निर्यात के लिहाज से यह निगेटिव साबित होता है। असर देश से बाहर निर्यात के बदले डॉलर के रूप में पेमेंट मिलता है। लेकिन डॉलर कमजोर होने से निर्यात का लाभ कम हो जाता है। ऐसे में डोमेस्टिक कंपनियों का मुनाफा प्रभावित होता है, जिसका असर सीधे तौर पर देश की इकोनॉमी पर होता है। वहीं, रुपए में मजबूती नई नौकरियों के लिहाज से सरकार के लिए बड़ा चैलेंज बन सकती है। 

 

इन सेक्टर्स पर  निगेटिव असर
रुपए में लगातार मजबूती से एक्सपोर्ट बेस्ड इंडस्ट्रीज को नुकसान होगा। इसमें आईटी और फार्मा सेक्टर प्रमुख हैं, जिनका कारोबार एक्सपोर्ट पर आधारित है। मेटल सेक्टर, एनर्जी सेक्टर और ऑटो सेक्टर का भी मुनाफा प्रभावित होगा। इसके अलावा जेम्स एंड ज्वैलरी, सी फूड्स, चावल, टेक्सटाइल और कॉटन व लेदर इंडस्ट्री भी प्रभावित होगी। इसका असर इकोनॉमी पर होगा। 

 

62.80 रुपए तक जा सकते हैं भाव 
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि रुपए में अभी 2 से 3 महीने मजबूती जारी रहने का अनुमान है। कैपिटल मार्केट में लिक्विडिटी की परेशानी नहीं है। ईयर एंड ब्रेक के बाद जनवरी में डोमेस्टिक मार्केट में फ्लो बढ़ सकता है। वहीं, यूएस में टैक्स बिल से डॉलर इंडेक्स में और कमजोरी आ सकती है। फेडरल रिजर्व ने अमेरिका इंफ्लेशन को लेकर सवाल उठाए हैं। इन सब वजहों से रुपए में अभी मजबूती रहेगी और बजट तक यह 63 के भाव से भी ऊपर जा सकता है। 

 

RBI खरीद सकता है डॉलर
एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटीज एंड करंसीज) अनुज गुप्ता का कहना है कि रुपए जब तक 63 की रेंज में बना रहेगा, ज्यादा चिंता की बात नहीं होगी। लेकिन अगर यह 63 का लेवल ऊपर की ओर से ब्रेक करता है तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बैलेंस के लिए डॉलर की खरीददारी कर सकता है। इससे डॉलर को सपोर्ट मिलेगा। 

 

 

आगे पढ़ें, क्या साल भर जारी रहेगी रुपए में मजबूती 

 

 

 

आगे रुपए में गिरावट का भी अनुमान 


हालांकि एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि साल 2018 के पहले हॉफ के अंत तक रुपए में गिरावट भी दिख सकती है। महंगाई बढ़ने, क्रूड की कीमतें बढ़ने के अलावा करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने से रुपए पर नकारातमक असर होगा। वहीं, बजट के बाद रुपए में प्रॉफिट बुकिंग भी दिखने की उम्मीद है, जिससे रुपए में कमजोरी आएगी। फिलहाल 2018 की पहली छमाही तक रुपया 63 से 65 प्रति डॉलर की रेंज बाउंड में रहने का अनुमान है। 

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