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रुपए में कमजोरी से इंपोर्ट बेस्ड सेक्टर को होगा नुकसान, किन सेक्टर को होगा फायदा

इस हफ्ते 14 महीनों का निचला स्तर छूने के बाद शुक्रवार को रुपया प्रति डॉलर 66.67 के स्तर पर बंद हुआ।

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दिल्ली। रुपए के लिए अप्रैल बुरा साबित हुआ है। इस हफ्ते 14 महीनों का निचला स्तर छूने के बाद शुक्रवार को रुपया प्रति डॉलर 66.67 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे महीने में रुपए में करीब 3 फीसदी गिरावट रही है, वहीं डॉलर इंडेक्स अपने 3 माह के हाई 91.71 के स्तर पर पहुंच गया है। जानकार मान रहे हैं कि रुपए में गिरावट अभी जारी रहेगी। देश में इंपोर्ट बिल का सबसे बड़ा हिस्सा क्रूड का है, ऐसे में डॉलर के मजबूत होने से क्रूड, एडिबल ऑयल, फर्टिलाइजर, मेटल, माइनिंग जैसे सेक्टर को नुकसान होगा, तो वहीं ऑटोमोबाइल, आईटी सॉफ्टवेयर, फार्मा सेक्टर को इसका फायदा मिलेगा।

 

 

डॉलर की डिमांड बढ़ी

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, कमोडिटी एंड करंसीज, अनुज गुप्ता का कहना है कि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ना रुपए के लिए सबसे बड़ी परेशनी बनी है। क्रूड का इंपोर्ट डॉलर में होता है, ऐसे में दुनियाभर में डॉलर की डिमांड बढ़ रही हे। इससे डॉलर इंडेक्स लगातार मजबूत होकर 3 महीने के हाई पर है। डॉलर की डिमांड का असर रुपए के मुकाबले दूसरी कंरसीज पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि क्रूड के अलावा और भी कारण है, जिनकी वजह से रुपया अगले एक महीने में 68 प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हो सकता है।

 

 

ये फैक्टर भी हैं निगेटिव

केडिया कमोडिटीज के प्रेसिडेंट अजय केडिया का कहना है कि भारत की बॉन्ड यील्ड 2 महीने के हाई पर है। रुपए और बॉन्ड यील्ड का डायरेक्शन अपोजिट रहता है। वहीं, अमेरिका में पॉलिसी संबंधी बदलावों से डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिल रही है, इसने 91 का लेवल क्रॉस कर लिया है। इंडियन स्टॉक मार्केट से एफआईआई लगातार पैसे निकालकर बॉन्ड में लगा रहे हैं। इन सबका रुपए पर निगेटिव असर पड़ रहा है। इसके अलावा जिओपॉलिटिकल टेंशन भी डॉलर के मुकाबले दूसरी करंसीज में गिरावट का कारण है।

 

75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा डॉलर 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। मौजूदा हफ्ते में क्रूड ने 75 डॉलर प्रति बैरल का स्तर दू लिया, जहां से फिर वापस 74.50 के स्तर पर आया। पिछले 3 महीनों के दौरान क्रूड में 6 फीसदी तक की मजबूती दर्ज की गई है। वहीं, जमून 2017 के बाद क्रूड 70 फीसदी तक महंगा हो चुका है। ऐसे में भारत को क्रूड का बिल चुकाने के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ रही है।

 

 

इंपोर्ट बेस्ड सेक्टर को नुकसान

अजय केडिया का कहना है कि डॉलर में मजबूती के कारण एडिबल ऑयल, फर्टिलाइजर जैसे सेक्टर को नुकसान होगा। भारत सबसे ज्यादा इंपोर्ट क्रूड, एडिबल ऑयल और फर्टिलाइजर का करता है। ऐसे में डॉलर की कीमतें बढ़ने से इनके इंपोर्ट के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। वहीं इंपोर्ट आधारित दूसरे सेक्टर मसलन मेटल, माइनिंग के अलावा जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों को नुकसान होगा। इसके अलावा जिन कंपनियों पर ज्यादा कर्ज है, मसलन एयरटेल और आइडिया उन्हें भी डॉलर में बिल चुकाने की वजह से नुकसान होगा।

 

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इन सेक्टर को होगा फायदा

 

डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा। इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई एक्सपोर्ट बेस है। ऐसे में डॉलर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों के साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली फार्मा कंपनियों को होगा। इसके अलासवा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को डॉलर में तेजी का फायदा मिलेगा क्योंकि ये कंपनियां डॉलर में फ्यूल बेचती हैं।

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