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रुपए में उतार-चढ़ाव चिंता की बात नहीं, निपटने के लिए भारत के पास पर्याप्त फॉरेक्स रिजर्व: SC गर्ग

इकोनॉमिक अफेयर सेक्रेट्री के अनुसार रुपए में उतार-चढ़ाव के पीछे घरेलू नहीं, कुछ ग्लोबल फैक्टर हैं।

India has adequate firepower of forex reserve to deal with rupee volatility: SC Garg

नई दिल्ली। रुपए के रिकॉर्ड लो स्तर पर पहुंचने के बाद सरकार की ओर से अहम बयान आया है। इकोनॉमिक अफेयर सेक्रेट्री सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा है कि रुपए में जारी उतार-चढ़ाव से ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। हमारे पास इस वोलेटिलिटी से निपटने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। बता दें कि रुपया गुरूवार को अपने रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया था। रुपए ने पहली बार 69 डॉलर का स्तर पार किया। हालांकि शुक्रवार को इसमें कुछ रिकवरी है। 

 

 

घरेलू वजहों से नहीं आई रुपए में आई गिरावट 
गर्ग ने कहा कि रुपए में जो उतार-चढ़ाव दिख रहा है, उसके पीछे घरेलू नहीं, कुछ ग्लोबल फैक्टर हैं। मसलन इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं, ईरान पर यूएस ने प्रतिबंध लगाए हैं। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की डिमांड और सप्लाई को लेकर बड़ा गैप बन गया है। इन वजहों से डॉलर की डिमांड बढ़ रही है, जिससे रुपए सहित दूसरे देशों की करंसी पर भी असर हो रहा है। लेकिन हमारे पास पर्याप्त रिजर्व है, जिससे वोलैटिलिटी की स्थिति से हम निपट सकते हैं।

 

जरूरत पड़ी तो फॉरेक्स रिजर्व बढ़ाने के विकल्प खुले
गर्ग ने यह भी कहा अभी स्थिति ठीक है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो सरकार फॉरेक्स रिजर्व बढ़ाने के लिए फॉरेन करंसी नॉन रिपैट्रिएबल डिपॉजिट, सॉवरेन बॉन्ड या अन्य तरीकों से फंड रेज कर सकती है। जब भी लगा कि फॉरेक्स रिजर्व बढ़ाने की जरूरत है तो सरकार के पास ये सभी विकल्प खुले हुए हैं। उनका कहना है कि 2013 में भी रुपए में बड़ी गिरावट आई थी, लेकिन तबसे अब स्थिति बहुत बदल चुकी है। अभी स्थिति ज्यादा बेहतर है। हमारे पास पर्याप्त फॉरेक्स रिजर्व है, सर्विस एक्सपोर्ट और एनआरआई द्वारा देश में आने वाला रेमिटेंस बेहतर है। 

 

RBI करेगा जरूरी उपाय: पीयूष गोयल

फाइनेंस मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भी कहा कि रुपए को लेकर ज्यादा चिंता करने वाली बात नहीं है। जरूरत पड़ने पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जरूरी कदम उठाएगा। वहीं, पूर्व फाइनेंस मिनिस्ट पी चिदंबरम ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि रुपया कमजोर होकर सबसे निचले स्तर पर आ गया है। उसके बाद भी अच्छे दिनों का इंतजार है। 

 

मूडीज: डॉलर की मजबूती से इंडियन करंसी को कम नुकसान 
दुनिया की बड़ी रेटिंग एजेंसी मूडीज की ओर से जारी रिपोर्ट में भी यह बात कही गई कि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से दुनियाभर की करंसी पर दबाव बढ़ रहा है। लेकिन भारत उन चुनिंदा 5 देशों में शामिल है, जिसकी करंसी को इससे सबसे कम नुकसान होगा। रिपोर्ट में कहा गया था कि डॉलर की मजबूती से भारत की इकोनॉमी को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। 

 

मूडीज के अनुसार भारत, चीन, ब्राजील, मेक्सिको और रूस उन देशों में हैं जो करंसी के दबाव को लेकर सबसे कम जोखिम की स्थिति में हैं। मूडीज के अनुसार बड़ी बचत के जरिए भारत जैसी इकोनॉमी घरेलू स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। मूडीज का कहना है कि भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट क्रूड की ऊंची कीमतों की वजह से बढ़ा है। 

 

रुपए में हल्की रिकवरी
शुक्रवार को रुपया 9 पैसे मजबूत होकर 68.70 प्रति डॉलर के भाव पर खुला। बैंक और एक्सपोर्टर्स द्वारा डॉलर की फ्रेश सेलिंग करने से रुपए को सपोर्ट मिला है। हालांकि अभी भी रुपया अपने करीब 20 महीने के लो पर कारोबार कर रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें बढ़ने और करंट अकाउंट डेफिसिट व महंगाई बढ़ने की आशंकाओं के चलते रुपए पर निगेटिव असर दिख रहा है। इससे पहले गुरूवार के कारोबार में रुपया पहली बार 69 प्रति डॉलर का स्तर पार कर गया था। 69.10 प्रति डॉलर का भाव रुपए के लिए ऑलटाइम लो बना। हालांकि ट्रेडिंग के अंत में रुपया 67.79 के स्तर पर बंद हुआ। 

 

इस साल 7% से ज्यादा कमजोर हुआ रुपया 
रुपए ने बीते साल डॉलर की तुलना में 5.96 फीसदी की मजबूती दर्ज की थी, जो अब 2018 की शुरुआत से लगातार कमजोर हो रहा है। इस साल अभी तक रुपया लगभग 7 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। इससे पहले रुपए ने 28 अगस्त, 2013 को 68.80 का लाइफटाइम लो टच किया था। वहीं, 24 नवंबर 2016 को रुपया का ऑलटाइम क्लोजिंग लो 68.73 था।

 

CAD बढ़ने की आशंका से रुपए पर प्रेशर 
क्रूड की ऊंची कीमतों से भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट और महंगाई बढ़ने की आशंका से इन्वेस्टर्स में घबराहट फैल गई। कुछ दिनों की सुस्ती के बाद क्रूड की कीमतें चढ़ने के भी संकेत मिले। अमेरिका द्वारा अपने सहयोगी देशों से नवंबर की डेडलाइन तक ईरान से क्रूड का इंपोर्ट रोकने की बात कहने से अब क्रूड की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, आरबीआई द्वारा अपने द्वैमासिक फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में बैंकिंग सेक्टर की धुंधली तस्वीर पेश किए जाने से करंसी मार्केट में घबराहट फैल गई। 

 

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