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Forex Market: लाइफटाइम लो से रुपए में रिकवरी, 33 पैसा मजबूत होकर 68.46/$ पर बंद

आरबीआई द्वारा हस्तक्षेप के चलते डॉलर की बिक्री से रुपए ने इंट्रा-डे में 68.35 के नए उच्चतम स्तर को छुआ।

Forex Market: Rupee recovers from life low, rebounds 33 paise to 68.46

नई दिल्ली.  गुरुवार को लाइफटाइम लो पर फिसलने के बाद शुक्रवार को रुपए में रिकवरी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया 33 पैसे की मजबूती के साथ 68.46 के स्तर पर बंद हुआ। आरबीआई द्वारा हस्तक्षेप के चलते डॉलर की बिक्री से रुपए ने इंट्रा-डे में 68.35 के नए उच्चतम स्तर को छुआ। पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में रुपए में यह पहली बढ़ोत्तरी है। कुल मिलाकर क्रूड की कीमतें बढ़ने और करंट अकाउंट डेफिसिट व महंगाई बढ़ने की आशंकाओं से सेंटीमेंट्स सतर्क रहा। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 9 पैसे मजबूत होकर 68.70 प्रति डॉलर के भाव पर खुला। बैंक और एक्सपोर्टर्स द्वारा डॉलर की फ्रेश सेलिंग करने से रुपए को सपोर्ट मिला है।

 

पहली बार रुपया 69 डॉलर के पार

इससे पहले गुरुवार के कारोबार में रुपया पहली बार 69 प्रति डॉलर का स्तर पार कर गया था। 69.10 प्रति डॉलर का भाव रुपए के लिए ऑलटाइम लो बना। हालांकि ट्रेडिंग के अंत में रुपया 67.79 के स्तर पर बंद हुआ। 

 

इस साल 7% से ज्यादा कमजोर हो चुका है रुपया 

रुपए ने बीते साल डॉलर की तुलना में 5.96 फीसदी की मजबूती दर्ज की थी, जो अब 2018 की शुरुआत से लगातार कमजोर हो रहा है। इस साल अभी तक रुपया लगभग 7 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। इससे पहले रुपए ने 28 अगस्त, 2013 को 68.80 का लाइफटाइम लो टच किया था। वहीं, 24 नवंबर 2016 को रुपया का ऑलटाइम क्लोजिंग लो 68.73 था।

 

सीएडी बढ़ने की आशंका से रुपए पर प्रेशर 
क्रूड की ऊंची कीमतों से भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट और महंगाई बढ़ने की आशंका से इन्वेस्टर्स में घबराहट फैल गई। कुछ दिनों की सुस्ती के बाद क्रूड की कीमतें चढ़ने के भी संकेत मिले। अमेरिका द्वारा अपने सहयोगी देशों से नवंबर की डेडलाइन तक ईरान से क्रूड का इंपोर्ट रोकने की बात कहने से अब क्रूड की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, आरबीआई द्वारा अपने द्वैमासिक फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में बैंकिंग सेक्टर की धुंधली तस्वीर पेश किए जाने से करंसी मार्केट में घबराहट फैल गई। 

 

ब्रेंट क्रूड 78 डॉलर प्रति बैरल के करीब 
ओपेक देशों द्वारा रोजाना 10 लाख बैरल क्रूड सप्लाई बढ़ाने के फैसले के बाद भी क्रूड की कीमतों में तेजी जारी है। बुधवार को कारोबार के दौरान क्रूड 78 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर गया। वहीं, अभी भी क्रूड 77.65 डॉलर के स्तर पर बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी क्रूड सप्लाई बढ़ाने के फैसले को अमल में लाने को लेकर संशय बना हुआ है। जिसकी वजह से क्रूड में तेजी जारी है। वहीं, यूएस ने इंपोर्ट करने वाले देशों से कहा है कि वे ईरान से तेल न खरीदे। दूसरी ओर इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की डिमांड के हिसाब से सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिसकी वजह से क्रूड में तेजी जारी है। 

 

क्रूड का रुपए पर कैसे होता है असर
एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, कमोडिटी एंड करंसीज, अनुज गुप्ता का कहना है कि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ना रुपए के लिए परेशनी है। क्रूड का इंपोर्ट डॉलर में होता है, ऐसे में दुनियाभर में डॉलर की डिमांड बढ़ती है, जिससे डॉलर इंडेक्स मजबूत होता है और रुपए में कमजेारी बढ़ती है। फिलहाल क्रूड के अलावा और भी कारण है, मसलन बॉन्ड यील्ड्स में तेजी, जिनकी वजह से रुपए पर असर पड़ रहा है। 

 

बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोत्तरी
महंगाई बढ़ने, फिस्कल डेफिसिट की चिंताओं और आरबीआई के दखल से बॉन्ड यील्ड्स में तेजी देखने को मिली। 10 साल की बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड 7.83 फीसदी से बढ़कर 7.87 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। करंसी ट्रेडर्स भी अमेरिका और चीन के बीच टकराव बढ़ने के बाद ग्लोबल ट्रेड के भविष्य को लेकर चिंतित दिखाई दिए। घरेलू इक्विटी मार्केट में भी खासी बिकवाली देखने को मिली। 

 

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