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रुपया 9 पैसे और कमजोर हुआ, 66.75 प्रति डॉलर के भाव पर खुला

रुपए में गिरावट का सिलसिला जारी है। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 9 पैसे कमजोर होकर 66.75 प्रति डॉलर के भाव पर खुला।

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मुंबई. रुपए में गिरावट का सिलसिला जारी है। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 9 पैसे कमजोर होकर 66.75 प्रति डॉलर के भाव पर खुला। पिछले ट्रेडिंग सेशन 27 अप्रैल यानी शुक्रवार को रुपया 66.66 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था। वहीं, शुक्रवार को रुपया 8 पैसे कमजोर होकर 66.83 के भाव पर खुला था। गुरूवार को बैंकों द्वारा डॉलर की सेलिंग से रुपया गुरुवार को 13 पैसे मजबूत हुआ था और प्रति डॉलर डॉलर 66.75 के स्तर पर बंद हुआ था। एक दिन पर रुपये के 14 महीने के लो पर पहुंचने के बाद उसमें यह मजबूती दर्ज की गई है। 

 

एक साल में 4.32% गिरावट 
हालांकि कारोबार के दौरान रुपया संभल गया और 66.68 प्रति डॉलर के भाव पर आ गया। यह प्रीवियस क्लोजिंग 66.66 से 0.03 फीसदी कमजोर है। इस साल की बात करें तो रुपए में अबतक 4.32 फीसदी गिरावट आ चुकी है। वहीं, डॉलर इंडेक्स लगातार मजबूत होकर 92.361 के स्तर पर है। बॉन्ड यील्ड की बात करें तो 10 साल का बॉन्ड यील्ड अपने प्रीवियस कलेजिंग से 7.72 फीसदी चढ़ा है। 

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पिछले 14 दिनों में रुपए की चाल

 

11 अप्रैल 65.31/डॉलर
12 अप्रैल 65.26/डॉलर
13 अप्रैल 65.20/डॉलर
16 अप्रैल 65.49/डॉलर
17 अप्रैल 65.64/डॉलर
18 अप्रैल 65.66/डॉलर
19 अप्रैल 65.79/डॉलर
20 अप्रैल 66.12/डॉलर
23 अप्रैल 66.47/डॉलर
24 अप्रैल 66.38/डॉलर
25 अप्रैल 66.90/डॉलर
26 अप्रैल 66.75/डॉलर
27 अप्रैल 66.66/डॉलर
02 मई 66.75/डॉलर*

नोट: 02 मई को रुपए का शुरूआती भाव

 

रुपए में गिरावट की वजह
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल कीमतों में तेजी से डॉलर की डिमांड बढ़ी है, जिससे रुपए पर निगेटिव असर हुआ है। एफआईआई की बिकवाली से भी रुपए में कमजोरी आई है। जिससे रुपया पिछले 14 महीनों के निचले स्तर पर आ चुका है। वहीं, जियो पॉलिटिकल टेंशन और ट्रेड वार के बढ़ने का भी डर बना हुआ है। दूसरी ओर 10 साल के बॉन्ड यील्ड में तेजी है। बॉन्ड यील्ड और रुपए का मूवमेंट एक दूसरे के अपोजिट होता है। 

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रुपए की गिरावट का असर

#रुपए की गिरावट से महंगाई बढ़ने का डर हो जाता हे। इससे एक्सपोर्ट महंगा होता है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं। रुपए में कमजोरी से देश के सरकारी घाटे पर दबाव बढ़ने का डर रहता है जिसके चलते सरकार को खर्च कंट्रोल करना पड़ सकता है, इसका सीधा असर देश की विकास दर पर हो सकता है। भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों के इंपोर्ट में जाता है और ये डॉलर में भुगतान किया जाता है। ऐसे में रुपए में गिरावट की वजह से क्रूड का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो सकता है।

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