Home » Market » ForexRupee open on negative mode at wednesday trading

डालर के मुकाबले रुपए में 52 पैसे की कमजोरी, 14 माह के न्‍यूनतम स्‍तर पर

पिछले 8 ट्रेडिंग सेशन में रुपया आज 7वें दिन कमजोरी के साथ खुला। बुधवार को रुपया 9 पैसे कमजोर होकर 66.47 के भाव पर खुला।

1 of

 

मुम्‍बई. डालर के मुकाबले रुपए में बुधवार को 52 पैसे की कमजोरी दर्ज की गई। आज यह 14 माह के न्‍यूनतम स्‍तर 66.90 रुपए पर पहुंच गया। इस साल एक दिन में यह रुपए की सबसे बड़ी कमजोरी है। जानकारों के अनुसार रुपए में कमजोरी कच्‍चे तेल के दाम बढ़ने के चलते आई है। रुपया इस कमजोरी के बाद 22 फरवरी 2017 के स्‍तर पर आ गया।

 

 

1 दिन थमने के बाद फिर गिरावट 
इसके पहले सोमवार को लगातार छठें दिन कमजोरी के साथ रुपए में 2 साल की सबसे लंबी गिरावट दर्ज हुई थी। हालांकि मंगलवार को रुपया ऊपर की ओर मूवमेंट दिखाने में कामयाब रहा। वहीं, बुधवार को फिर रुपया 9 पैसे कमजोरी के साथ खुला। रुपए में गिरावट के साथ यह 2 साल की सबसे लंबी गिरावट बन गई। सोमवार को रुपया 8 पैसे कमजोर होकर 66.20 प्रति डॉलर के भाव पर खुला। रुपए का यह एक साल से ज्यादा समय का लो लेवल है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बॉन्ड यील्ड में मजबूती, क्रूड की बढ़ती कीमतों और एफआईआई द्वारा लगातार बिकवाली का असर रुपए पर दिख रहा है। 

 

पिछले 11 दिनों में रुपए की चाल

 

11 अप्रैल 65.31/डॉलर
12 अप्रैल 65.26/डॉलर
13 अप्रैल 65.20/डॉलर
16 अप्रैल 65.49/डॉलर
17 अप्रैल 65.64/डॉलर
18 अप्रैल 65.66/डॉलर
19 अप्रैल 65.79/डॉलर
20 अप्रैल 66.12/डॉलर
23 अप्रैल 66.47/डॉलर
24 अप्रैल 66.38/डॉलर
25 अप्रैल 66.47/डॉलर*

नोट: 25 अप्रैल को रुपए का शुरूआती भाव

 

रुपए में गिरावट की वजह
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल कीमतों में तेजी से डॉलर की डिमांड बढ़ी है, जिससे रुपए पर निगेटिव असर हुआ है। एफआईआई की बिकवाली से भी रुपए में कमजोरी आई है। जिससे रुपया पिछले 13 महीनों के निचले स्तर पर आ चुका है। वहीं, जियो पॉलिटिकल टेंशन और ट्रेड वार के बढ़ने का भी डर बना हुआ है। दूसरी ओर 10 साल के बॉन्ड यील्ड में तेजी है। बॉन्ड यील्ड और रुपए का मूवमेंट एक दूसरे के अपोजिट होता है। 

 

रुपए की गिरावट का असर

#रुपए की गिरावट से महंगाई बढ़ने का डर हो जाता हे। इससे एक्सपोर्ट महंगा होता है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं। रुपए में कमजोरी से देश के सरकारी घाटे पर दबाव बढ़ने का डर रहता है जिसके चलते सरकार को खर्च कंट्रोल करना पड़ सकता है, इसका सीधा असर देश की विकास दर पर हो सकता है। भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों के इंपोर्ट में जाता है और ये डॉलर में भुगतान किया जाता है। ऐसे में रुपए में गिरावट की वजह से क्रूड का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो सकता है।

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट