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रुपया 16 महीने के निचले स्तर पर, 56 पैसे की कमजोरी के साथ तोड़ा 68 का लेवल

कर्नाटक में बीजेपी की सरकार बनना मुश्किल होने, क्रूड की कीमतें चढ़ने से डॉलर की तुलना में रुपए ने 68 का लेवल तोड़ दिया।

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नई दिल्ली. कर्नाटक चुनाव का असर मंगलवार को रुपए पर भी दिखा। मतगणना के दौरान कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के मिलकर सरकार बनाने के संकेतों से डॉलर की तुलना में रुपए 56 पैसे की कमजोरी के साथ 68 का स्तर तोड़ दिया। डीलर्स के मुताबिक क्रूड की कीमतें चढ़ने का असर भी रुपए पर दिखा। यह रुपए का जनवरी 2017 के बाद सबसे निचला स्तर है। सोमवार को रुपया 67.51 के स्तर पर बंद हुआ था। 

 

 

कर्नाटक चुनाव का दिखा असर
कर्नाटक चुनाव में 104 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आती दिख रही है, हालांकि वह 112 सीटों के बहुमत के निशान से पीछे रह गई। दूसरी तरह कांग्रेस और जेडी एस क्रमशः 78 और 38 सीटों के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए राजी हो गई हैं। माना जा रहा था कि बीजेपी की जीत से फाइनेंशियल मार्केट्स को मजबूती मिलेगी और केंद्र सरकार को फैसले लेने के लिए ज्यादा क्षमताएं मिलेगी। हालांकि अंतिम क्षणों में हालात बदल गए, जिसका असर रुपए पर भी दिखा।
मंगलवार को ट्रेडिंग के अंत में डॉलर की तुलना में रुपया 56 पैसे गिरकर 68.07 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि इससे पहले 25 जनवरी, 2017 को रुपए ने 67.51 का स्तर छूआ था। 

 

 

रुपए में कमजोरी की अन्य वजह
- इसके अलावा  तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी और इंपोर्टर्स द्वारा ज्यादा डॉलर की ज्यादा खरीददारी भी एक वजह रही।
- पोर्टफोलियो इन्वेस्टर भी तेजी से सरकारी बॉन्ड्स से पैसा निकल रहे हैं। इसका भी रुपए पर असर हुआ है।
- वहीं अमेरिका में बैंकों द्वारा डॉलर खरीदने से डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिल रही है, जिसका असर भी रुपए दिखा।

 

 

लगातार टूट रहे हैं रुपए के टेक्निकल लेवल 
डीलर्स ने कहा कि एक-एक करके रुपए के लगातार टेक्निकल सपोर्ट तोड़ने से मार्केट पार्टिसिपैंट्स सतर्क हो गए हैं और डॉलर में अपनी शॉर्ट पोजिशंस खत्म करनी शुरू कर दी हैं। अभी तक डॉलर की तुलना में रुपए से 67 के लेवल पर पहुंचने की उम्मीद की जा रही थी।
एक बड़े सरकारी बैंक के एक डीलर ने कहा कि डॉलर की यह मजबूती अचानक देखने को मिली है। कुछ बैंकों ने 67.80, 67.88, 67.90 और 67.10 के अहम सपोर्ट लेवल्स पर डॉलरों में बिकवाली की। उन्होंने कहा, ‘किसी को ऐसी उम्मीद नहीं थी। एक ही दिन में सौदे काटना और पोजिशन लेना खासा मुश्किल है। कोई टेक्निकल लेवल नहीं टिक सका।’


 

रुपए की गिरावट का क्या होगा असर
रुपए की गिरावट से महंगाई बढ़ने का डर हो जाता हे। इससे एक्सपोर्ट महंगा होता है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं। रुपए में कमजोरी से देश के सरकारी घाटे पर दबाव बढ़ने का डर रहता है जिसके चलते सरकार को खर्च कंट्रोल करना पड़ सकता है, इसका सीधा असर देश की विकास दर पर हो सकता है।
भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों के इंपोर्ट में जाता है और ये डॉलर में भुगतान किया जाता है। ऐसे में रुपए में गिरावट की वजह से क्रूड का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो सकता है।

   
    

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