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रुपए में 2 साल की सबसे लंबी गिरावट, लगातार छठे दिन कमजोर होकर 66.20 के स्तर

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे कमजोर होकर 66.20 के स्तर पर खुला।

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नई दिल्ली.  डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट आ रही है।। सोमवार को लगातार छठें दिन रुपया कमजोर हुआ और 8 पैसे कमजोर होकर 66.20 के भाव पर खुला। पिछले हफ्ते रुपया 66 के स्तर से नीचे आ गया था, जो पिछले 13 महीनों का सबसे निचला स्तर है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बॉन्ड यील्ड में मजबूती, क्रूड की बढ़ती कीमतों और एफआईआई द्वारा लगातार बिकवाली का असर रुपए पर दिख रहा है। 

 

पिछले ट्रेडिंग सेशन में थी बड़ी गिरावट 
पिछले हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को रुपए में कुल 33 पैसे की गिरावट दिखी थी। रिजर्व बैंक की मॉनिटिरी पॉलिसी बैठक के ब्यौरे से इस बात के संकेत मिलते हैं कि जून में होने वाली बैठक में मौद्रिक नीति के रूख में बदलाव आ सकता है। इससे रुपए पर दबाव बढ़ा। शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 27 पैसे टूटकर 66.06 के स्तर पर खुला था। इस गिरावट के साथ रुपया 13 महीनों के लो पर पहुंच गया। मार्च 2017 के बाद पहली बार रुपया 66 के स्तर के नीचे आ गया है। वहीं गुरूवार को 3 पैसे टूटकर 65.79 के स्तर पर बंद हुआ था। 

 

रुपए में गिरावट की वजह
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल कीमतों में तेजी और एफआईआई की बिकवाली से रुपए में कमजोरी आई है। जिससे रुपया पिछले 13 महीनों के निचले स्तर पर आ चुका है। वहीं, जियो पॉलिटिकल टेंशन और ट्रेड वार के बढ़ने का भी डर बना हुआ है। दूसरी ओर 10 साल के बॉन्ड यील्ड में तेजी है। बॉन्ड यील्ड और रुपए का मूवमेंट एक दूसरे के अपोजिट होता है। 

 

पिछले 8 दिनों में रुपए की चाल

11 अप्रैल 65.31/डॉलर
12 अप्रैल 65.26/डॉलर
13 अप्रैल 65.20/डॉलर
16 अप्रैल 65.49/डॉलर
17 अप्रैल 65.64/डॉलर
18 अप्रैल 65.66/डॉलर
19 अप्रैल 65.79/डॉलर
20 अप्रैल 66.12/डॉलर
23 अप्रैल 66.20*

नोट: 23 अप्रैल को रुपए का शुरूआती भाव

 

 

रुपए की गिरावट का असर

#रुपए की गिरावट से महंगाई बढ़ने का डर हो जाता हे। इससे एक्सपोर्ट महंगा होता है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं। रुपए में कमजोरी से देश के सरकारी घाटे पर दबाव बढ़ने का डर रहता है जिसके चलते सरकार को खर्च कंट्रोल करना पड़ सकता है, इसका सीधा असर देश की विकास दर पर हो सकता है। भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों के इंपोर्ट में जाता है और ये डॉलर में भुगतान किया जाता है। ऐसे में रुपए में गिरावट की वजह से क्रूड का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो सकता है।

 

#अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, जिससे ये प्रोडेक्ट भी महंगे हो सकते हैं। ऑटो इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, साथ ही डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ने का डर रहता है। हालांकि इससे आईटी और फार्मा कंपनियों को फायदा हो सकता हे। उनके रेवेन्यू का बड़ा पार्ट डॉलर से आता है। 

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