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अमेरिका भी नहीं कर पा रहा हिम्मत, भारत खरीदेगा यह लड़ाकू विमान

भारत इन दिनों उस लड़ाकू विमान को खरीदने की तैयारी कर रहा है, जिसे खरीदने की हिम्मत अमेरिका भी नहीं कर पा रहा है।

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नई दिल्ली. भारत इन दिनों उस लड़ाकू विमान को खरीदने की तैयारी कर रहा है, जिसे खरीदने की हिम्मत इन दिनों अमेरिका भी नहीं कर पा रहा है। दरअसल बेहद पावरफुल होने के साथ ही इसकी गिनती दुनिया के कुछ सबसे महंगे लड़ाकू विमानों में भी होती है। इसकी तारीफ अमेरिका भी अक्सर करता रहा है। हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस विमान को बनाने वाली कंपनी से इसकी कीमत कम करने की मांग की थी। 

 

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कौन सा है यह लड़ाकू विमान

यह लड़ाकू विमान है एफ-18 सुपर हॉर्नेट और इसे अमेरिका की कंपनी बोइंग बनाती है। यह ट्विन इंजन फाइटर जेट है, जो अतिरिक्त फ्यूल भी ले जा सकता है। इसकी अधिकतम स्पीड 2 हजार किलोमीटर प्रति घंटा है। यह विमान एयर टू एयर मिसाइल और एयर टू सरफेस वीपन ले जाने में सक्षम है। साथ ही किसी भी रडार के लिए इसे पकड़ना लगभग असंभव है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस विमान की कॉस्ट 500 करोड़ है, जो खरीददार देशों की मांग पर किए जाने वाले बदलाव के आधार पर बढ़ सकती है।

 

 

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डोनाल्ड ट्रम्प का फेवरेट है यह फाइटर

अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल में इसे अपना फेवरेट फाइटर बताया था। उन्होंने कहा था कि एफ-18 न सिर्फ उनका फेवरेट है, बल्कि यह अपने आप में ‘बेजोड़’ है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका इसे खरीदने की योजना बना रहा है, लेकिन इसकी कीमत पर अभी विचार चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम बोइंग के साथ अच्छी डील करना चाहते हैं।’ हालांकि अमेरिकी सेना पहले से इसका इस्तेमाल कर रही है।  फिलहाल, दुनिया में एक मात्र रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयरफोर्स ही सुपर हॉर्नेट का विदेशी कस्टमर है। 

 
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भारत ने भी दिखाई दिलचस्पी

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब भारत ने भी बोइंग के इस विमान को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। इसके अलावा सिंगल इंजन वाले 100 विमान सप्लाई करने की दौड़ में पहले लॉकहीड मार्टिन कॉर्प के एफ-16 और साब एबी के ग्रिपेन के बीच ही मुकाबला देखने को मिल रहा था। लेकिन मोदी सरकार के ट्विन (दो) इंजन एयरक्राफ्ट खरीदने पर जोर दिए जाने से बोइंग अब दोनों कंपनियों को टक्कर दे सकती है।

 
97 हजार करोड़ रु की हो सकती है डील

मोदी सरकार की योजना में बदलाव के बाद इस ऑर्डर की वैल्यू 15 अरब डॉलर (97,500 करोड़ रुपए) तक पहुंच सकती है। ऑर्डर को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सरकार एयरफोर्स के बेड़े को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

मार्टिन कॉर्प और साब एबी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया इनीशिएटिव के तहत स्थानीय कंपनियों के साथ भागीदारी से देश में विमानों के निर्माण की पेशकश की है। इससे इंपोर्ट पर निर्भरता में कमी लाने में मदद मिलेगी।

 
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सरकार ने वायुसेना को दिए निर्देश

फरवरी में सरकार ने वायुसेना से ट्विन इंजन एयरक्राफ्ट के लिए कॉम्पिटीशन शुरू करने और बोइंग के एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट का आकलन करने के लिए कहा था। भारतीय नौसेना ने 8 से 9 अरब डॉलर में 57 फाइटर जेट खरीदने के लिए इस जेट को लिस्ट में शामिल किया है। इस डील के पहले फेज में जल्द ही रक्षा मंत्रालय रिक्वेस्ट फॉर इन्फोर्मेशन (आरएफआई) जारी कर सकता है। जिसके तहत भारत में फाइटर जेट बनाए जाने हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि कॉम्पिटीशन सिंगल और ट्विन इंजिन जेट्स दोनों के लिए खुला होगा, लेकिन लॉकहीड और साब ने नई शर्तों के बारे में कुछ नहीं बताया है।

 
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15 साल से वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी

बता दें कि भारत में बीते 15 साल से नए लड़ाकू विमानों की जरूरत महसूस की जा रही है। कई बार एलान होने पर भी जरूरत की तुलना में सिर्फ तीन-चौथाई जेट ही वायुसेना के पास मौजूद हैं। 

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