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Forex Market: रुपया 43 पैसे टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर, 73.34/डॉलर के स्तर पर बंद

Forex Market: ऑयल इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की डिमांड और शेयर बाजार के धराशायी होने से रुपया रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया।

Forex Market: Rupee slips below 73 mark for first time ever

 

मुंबई. ऑयल इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की डिमांड बढ़ने और घरेलू शेयर बाजार के धराशायी होने से Forex Market में बुधवार को रुपया 43 पैसे कमजोर होकर नए रिकॉर्ड निचले स्तर 73.34 रुपए प्रति डॉलर पर क्लोज हुआ। रुपया पहली बार 73 रुपए प्रति डॉलर के आंकड़े से नीचे लुढ़का है।

 

इन वजहों से रुपए में आई कमजोरी

सोमवार को 42 पैसे की गिरावट में 72.91 रुपए प्रति डॉलर पर बंद होने वाला रुपया आज 35 पैसे टूटकर 73.26 रुपए प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार की शुरुआत में यह 72.90 रुपए प्रति डॉलर के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। लेकिन, इसके बाद पूरे समय रुपए पर दबाव रहा। दुनिया की अन्य प्रमुख करंसीज के बास्केट में डॉलर की मजबूती, ऑयल इंपोर्टर्स की डॉलर लिवाली, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के चार साल के उच्चतम स्तर पर टिके रहने और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की पूंजी निकालने के दबाव में यह 73.42 रुपए प्रति डॉलर के निचले स्तर तक लुढ़क गया। अंतत: भारतीय मुद्रा गत दिवस की तुलना में 43 पैसे टूटकर 73.34 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुई।

 

एफपीआई ने निकाले 38.32 करोड़ डॉलर

एफपीआई ने पूंजी बाजार में 38.32 करोड़ डॉलर की निकासी की। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स भी 550.51 अंक लुढ़ककर 36,000 के आंकड़े से नीचे का गोता लगाता हुआ 35,975.63 अंक पर और एनएसई का निफ्टी 150.05 अंक फिसलकर 10,858.25 अंक पर बंद हुआ।


 

इस साल करीब 14 फीसदी टूटा रुपया

इस साल रुपए में करीब 14 फीसदी तक कमजोरी आई है। क्रूड की कीमतें बढ़ने, ट्रेड वार, कैड बढ़ने की आशंका, डॉलर में मजबूती, घरेलू स्तर पर निर्यात घटने और राजनीतिक अस्थिरता जैसे फैक्टर्स की वजह से रुपए पर लगातार दबाव बना हुआ है।


75 डॉलर का स्तर छू सकता है रुपया

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, रिसर्च (कमोडिटी एंड करंसी) अनुज गुप्ता का कहना है कि क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी से डॉलर कमजोर हुआ है। मंगलवार को क्रूड ने 85 डॉलर का स्तर पार किया और 85.32 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया जो 4 साल का हाई है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। जिससे आने वाले दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपए 75 डॉलर का स्तर छू सकता है।

 

रुपए में गिरावट का क्या होगा असर

 

# पेट्रोल-डीजल हो सकता है महंगा

डॉलर के मुकाबले रुपए के 70 के स्तर पार पहुंचने का असर क्रूड के इंपोर्ट पर हो सकता है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड आयात करता है। ऐसे में डॉलर की कीमतें बढ़ने से इनके इंपोर्ट के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। इंपोर्ट महंगा होगा तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं।

 

# बढ़ सकती है महंगाई

देश में खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेगा। वहीं, एडिबल ऑयल भी महंगे होगे।

 

#  साबुन-शैंपू-पेंट्स होंगे महंगे

अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, जिससे ये प्रोडेक्ट भी महंगे हो सकते हैं।

 

# बढ़ेंगी ऑटो की कीमतें

ऑटो इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, साथ ही डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ने का डर रहता है। रुपए में गिरावट बनी रही तो कार कंपनियां आगे कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं। 

 

इन सेक्टर को होगा फायदा

रुपए के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा। इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई एक्सपोर्ट बेस है। ऐसे में डॉलर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों के साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली फार्मा कंपनियों को होगा। इसके अलासवा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को डॉलर में तेजी का फायदा मिलेगा क्योंकि ये कंपनियां डॉलर में फ्यूल बेचती हैं।

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