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Forex Market: ऑलटाइम लो पर पहुंचा रुपया, 70.74 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद

Forex Market: गुरुवार को रुपया अपने नए ऑलटाइम लो पर पहुंच गया।

Rupee slides further by 15p to end at fresh lifetime low of 70.74 to dollar

 

नई दिल्ली.  Forex Market: गुरुवार को रुपया अपने नए ऑलटाइम लो पर पहुंच गया। महीने के अंत में की डॉलर की डिमांड और क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से रुपया 15 पैसे टूटकर 70.74 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। इंट्रा डे के दौरान रुपए ने 70.90 प्रति डॉलर का निचला स्तर छूआ, हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार दर्ज किया गया। वहीं रुपए के रिकॉर्ड लो पर पहुंचने से एक्सपोर्ट महंगा होने और करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने की आशंकाएं मजबूत हो गई हैं। बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 49 पैसे की गिरावट के साथ 70.59 के स्तर पर बंद हुआ था।

 

ग्लोबल मार्केट में डॉलर में मजबूती और स्थानीय मार्केट में गिरावट से भी रुपए को झटका लगा है। डॉलर की मजबूती को जाहिर करने वाला डॉलर इंडेक्स 0.11 फीसदी की मजबूती के साथ 94.56 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले रुपए की ओपनिंग 70.64 के स्तर पर हुई थी।

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एक्सपोर्टर्स के लिए बढ़ी अनिश्चितताः फियो

एक्सपोर्टर्स के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) ने कहा कि रुपए की कमजोरी से एक्सपोर्टर्स के लिए अनिश्चित हालात बन गए हैं। फियो के प्रेसिडेंट गणेश कुमार गुप्ता ने कहा कि अब एक्सपोर्टर्स गुड्स की कीमतों को लेकर ठीक से निगोशिएट नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रुपए को लेकर अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है।

 

 

रुपया और होगा कमजोर

इस साल रुपया अब तक लगबग 10 फीसदी टूट चुका है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फॉरेन फंड आउटफ्लो, मैक्रो-इकोनॉमिक डाटा से पहले सतर्क रुख, ग्लोबल क्रूड ऑयल प्राइस में वोलैटिलिटी से रुपया नए निचले स्तर पर लुढ़क गया।

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जानकारों का कहना है कि अगले कुछ हफ्तों में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 72 का स्तर छू सकता है, जिससे क्रूड खरीदना और महंगा होगा। जीएसटी कलेक्शन उम्मीद के अनुसार न आने, डॉलर की बढ़ रही डिमांड, राजनीतिक अनिश्चितता और यूएस फेड द्वारा दरें बढ़ाए जाने के संकेत से रुपए में और कमजोरी आती दिख रही है।

 

 

रुपए में गिरावट का क्या होगा असर

 

पेट्रोल-डीजल हो सकता है महंगा

डॉलर के मुकाबले रुपए के 70 के स्तर पार पहुंचने का असर क्रूड के इंपोर्ट पर हो सकता है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूडआयात करता है। ऐसे में डॉलर की कीमतें बढ़ने से इनके इंपोर्ट के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। इंपोर्ट महंगा होगा तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं।

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बढ़ सकती है महंगाई

देश में खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेगा। वहीं, एडिबल ऑयल भी महंगे होगे।

 

साबुन-शैंपू-पेंट्स होंगे महंगे

अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, जिससे ये प्रोडेक्ट भी महंगे हो सकते हैं।

 

ऑटो की बढ़ेंगी कीमतें

ऑटो इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, साथ ही डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ने का डर रहता है। रुपए में गिरावट बनी रही तो कार कंपनियां आगे कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं।

 

इन सेक्टर को होगा फायदा

रुपए के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा। इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई एक्सपोर्ट बेस है। ऐसे में डॉलर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों के साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली फार्मा कंपनियों को होगा। इसके अलासवा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को डॉलर में तेजी का फायदा मिलेगा क्योंकि ये कंपनियां डॉलर में फ्यूल बेचती हैं।

 

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