रुपया 70.10 प्रति डॉलर के ऑलटाइम लो पर, रिकॉर्ड कमजोरी से क्या होगा महंगा?

डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट मंगलवार को ऑलटाइम लो पर आ गया। रुपए ने 70.10 का रिकॉर्ड निचला स्तर टच किया। कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डॉलर इंडेक्स में मजबूती, अमेरिका और चीन में ट्रेड वार, जियो पॉलिटिकल टेंशन, तुर्की में इकोनॉमिक क्राइसिस और यूरोपीय करंसी में स्लोडाउन जैसी वजहों से रुपया कमजोर हुआ है। रुपए में कमजोरी से घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने की उम्मीद है। कमजोर रुपए से क्रूड की कीमतें बढ़ेंगी, तो महंगाई भी बढ़ेगा।

money bhaskar

Aug 14,2018 04:17:00 PM IST

नई दिल्ली. डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट मंगलवार को ऑलटाइम लो पर आ गया। रुपए ने 70.10 का रिकॉर्ड निचला स्तर टच किया। कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डॉलर इंडेक्स में मजबूती, अमेरिका और चीन में ट्रेड वार, जियो पॉलिटिकल टेंशन, तुर्की में इकोनॉमिक क्राइसिस और यूरोपीय करंसी में स्लोडाउन जैसी वजहों से रुपया कमजोर हुआ है। रुपए में कमजोरी से घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने की उम्मीद है। कमजोर रुपए से क्रूड की कीमतें बढ़ेंगी, तो महंगाई भी बढ़ेगा।

इस साल 10 फीसदी कमजोर हो चुका है रुपया

रुपए ने बीते साल डॉलर की तुलना में 5.96 फीसदी की मजबूती दर्ज की थी, जो अब 2018 की शुरुआत से लगातार कमजोर हो रहा है। इस साल अभी तक रुपया 10 फीसदी टूट चुका है। वहीं इस महीने डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक 1.64 रुपए टूट चुका है।

रुपए में कमजोरी की वजह

- कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के अनुसार, अमेरिका औऱ चीन में ट्रेड वार बढ़ने के बीच ऑयल इम्पोर्टर्स द्वारा डॉलर की डिमांड बढ़ी, जिससे रुपए पर दबाव बना। वहीं अगले महीने अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है।

- वहीं एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटी के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता का कहना है कि तुर्की में आर्थिक संकट की वजह से वहां की करंसी लीरा काफी कमजोर हुआ है। सोमवार को भी लीरा में कमजोरी बढ़ी है, जिससे बैंकिंग शेयर टूटे हैं। इसका असर ग्लोबल मार्केट पर हुआ है। यूरोपीय करंसी में भी स्लोडाउन आने से अन्य करंसी के मुकाबले डॉलर में मजबूती आ रही है। डॉलर इंडेक्स 13 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया है।


रुपए में गिरावट का क्या होगा असर

पेट्रोल-डीजल हो सकता है महंगा

डॉलर के मुकाबले रुपए के 70 के स्तर पार पहुंचने का असर क्रूड के इंपोर्ट पर हो सकता है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूडआयात करता है। ऐसे में डॉलर की कीमतें बढ़ने से इनके इंपोर्ट के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। इंपोर्ट महंगा होगा तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं।

बढ़ सकती है महंगाई

देश में खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेगा। वहीं, एडिबल ऑयल भी महंगे होगे।

साबुन-शैंपू-पेंट्स होंगे महंगे

अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, जिससे ये प्रोडेक्ट भी महंगे हो सकते हैं।

ऑटो की बढ़ेंगी कीमतें

ऑटो इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, साथ ही डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ने का डर रहता है। रुपए में गिरावट बनी रही तो कार कंपनियां आगे कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं।

इन सेक्टर को होगा फायदा

रुपए के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा। इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई एक्सपोर्ट बेस है। ऐसे में डॉलर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों के साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली फार्मा कंपनियों को होगा। इसके अलासवा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को डॉलर में तेजी का फायदा मिलेगा क्योंकि ये कंपनियां डॉलर में फ्यूल बेचती हैं।

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