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आग्रह /पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए : धर्मेंद्र प्रधान

  • केंद्रीय मंत्री बोले- पेट्रोलियम उद्योग लंबे समय से कर रहा है मांग
  • वित्त मंत्री से मामले को जीएसटी परिषद के पास भेजने की अपील

Moneybhaskar.com

Oct 15,2019 10:56:00 AM IST

नई दिल्ली। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोलियम उत्पादों को वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग की है। प्रधान ने सोमवार को दिल्ली में तीसरे इंडिया एनर्जी फोरम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री से अनुरोध किया कि यह मामला जीएसटी परिषद के विचारार्थ भेजा जाए और विमान ईंधन तथा प्राकृतिक गैस पर जीएसटी लगाने के साथ पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की पहल की जाए। उन्‍होंने कहा कि पेट्रोलियम क्षेत्र की जटिलता तथा इस क्षेत्र में राज्य सरकारों की राजस्व निर्भरता को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है, पर अब पेट्रोलियम उद्योग की ओर से इसे जीएसटी के दायरे में लाने की लगातार मांग की जा रही है।

एक स्रोत से पूरी नहीं होगी ऊर्जा की मांग
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि देश में सभी के लिए ऊर्जा सुनिश्चित करने के लक्ष्‍य को देखते हुए ऊर्जा का कोई भी अकेला स्रोत देश में बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा नहीं कर पाएगा। ऐसे में सभी व्‍यावसायिक ऊर्जा स्रोतों को मिलाना ही एकमात्र विकल्‍प है। उन्‍होंने कहा कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव की प्रक्रिया की रूप रेखा को एक जिम्‍मेदार तरीके से तय करेगा। केन्‍द्रीय मंत्री ने देश के तेल एवं प्राकृतिक गैस पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने तथा अनुकूल व्‍यापार वातावरण बनाने के लिए हाइड्रोकार्बन नीति फ्रेमवर्क में आमूल बदलाव लाने के सरकारी प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्‍होंने कहा कि सऊदी अरब की अरामको के साथ ही एडनॉक, बीपी, शेल, टोटल, रोसनेट और एक्‍सॉन मोबिल जैसी दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों की देश में बढ़ती उपस्थिति भारत के विकास क्रम में वैश्विक निवेशकों के भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मुझे भारत के लिए - और दुनिया के लिए - ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम में शामिल हो रहे निवेशकों को देखकर खुशी हुई है।

2023 तक 58 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद

प्रधान ने कहा कि मुक्त क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) के तहत सरकार तीन राउंड की सफल बोली लगा चुकी है जबकि दो राउंड बोली डीएसएफ के तहत लगाई जा चुकी है। इन बोली प्रक्रियाओं के जरिए देश में तेल एवं प्राकृतिक गैस के खनन और उत्‍पादन के क्षेत्र में 2023 तक 58 अरब डॉलर के अनुमानित निवेश की उम्‍मीद है। उन्होंने कहा कि गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए विशेष जोर दिया जा रहा है। गैस पाइप लाइन, टर्मिनलों और शहरों में गैस बुनियादी ढांचे के निर्माण क्षेत्र में 60 अरब डॉलर का अनुमानित निवेश पाइपलाइन में है। ये काम विभिन्‍न चरणों में हो रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में गैस वितरण नेटवर्क आने वाले समय में देश की 70 फीसदी आबादी तक अपनी पहुंच बना लेगा। इसके जरिए लोगों को कम कार्बन उत्‍सर्जन वाली प्राकृतिक गैस उपलब्‍ध होगी।

1 अप्रैल 2020 से पूरे देश में मिलेगा बीएस-6 ईंधन

पेट्रोलियम मंत्री ने भारत को कम कार्बन उत्‍सर्जन वाली अर्थव्‍यवस्‍था बनाने की सरकारी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि देश में प्रति व्‍यक्ति कार्बन उत्‍सर्जन वैश्विक औसत और विशेषकर ओईसीडी देशों के औसत से काफी कम है। डाउन स्‍ट्रीम क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि इस क्षेत्र को पूरी तरह से उदार बना दिया गया है। उन्‍होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्‍पादों का संचालित बाजार मूल्‍य कच्‍चे तेल के अंतरराष्‍ट्रीय मूल्‍यों में हो रहे बदलावों के अनुरूप है। उन्‍होंने कहा कि देश का ईंधन मानक दुनिया के बेहतरीन मानकों के बराबर है। देश में 01 अप्रैल 2020 से बीएस-6 मानक वाला ईंधन उपलब्ध होने लगेगा।

ऊर्जा स्थिरता के लिए जैव ईंधन पर जोर

प्रधान ने कहा कि ऊर्जा स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए जैव ईंधन पर जोर दिया जा रहा है। नई जैव ईंधन नीति में विभिन्‍न प्रकार के कृषि अवशेषों तथा शहरी कचरे से ईंधन बनाने की परिकल्‍पना की गई है। उन्‍होंने कहा कि यह नीति किसानों को अन्‍नदाता से ऊर्जा दाता की भूमिका में ले आएगी। उन्‍होंने कहा कि बॉयोमास से बायोगैस बनाने के लिए देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में पांच हजार बायोगैस संयत्र लगाने का लक्ष्‍य रखा गया है। ये संयंत्र निजी उद्यमियों उद्मियों द्वारा लगाए जा रहे हैं। प्रधान ने कहा कि तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 2022 तक पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है। इससे जहां एक ओर कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण अनुकूल ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जा सकेगा। देश में इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल को बॉयोडीजल में बदलने के लिए 100 से ज्यादा शहरों में व्यवस्था की गई है।

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