राहत /मॉनसून ने आधे भारत को किया कवर; गन्ना, कपास और सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों में पहुंचा

  • 1 जून से 19 जून के बीच लॉन्ग टर्म एवरेज कमी 44 फीसदी से घटकर 37 फीसदी रह गई हैः आईएमडी 

Moneybhaskar.com

Jun 25,2019 04:39:00 PM IST

नई दिल्ली. Weather reports: मॉनसून (Monsoon) के लिहाज से अच्छी खबर आने लगी हैं। मंगलवार को मॉनसून गन्ना, कपाल और सोयाबीन की ज्यादा पैदावार वाले पश्चिमी भारत और धान की खेती वाले मध्य व उत्तरी भारत के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर लिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मंगलवार को यह बात कही।

मॉनसून ने आधे भारत को किया कवर

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुस्त शुरुआत के बाद मॉनसून ने देश के लगभग आधे हिस्से को कवर लिया है। आईएमडी (IMD) ने कहा कि 1 जून से 19 जून के बीच लॉन्ग टर्म एवरेज 44 फीसदी की तुलना में घटकर 37 फीसदी रह गया है। मॉनसून की बारिश के गुजरात और उसके बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में दस्तक देने से साउथवेस्ट मॉनसून (southwest monsoon) के लिए स्थितियां खासी अनुकूल हो गई हैं।

खेती के लिए क्यों अहम है मॉनसून

मॉनसून की बारिश को गन्ना, मक्का, कपास, धान और सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों के लिए खासा अहम माना जाता है। इन फसलों की बुआई जून और जुलाई महीने में होती है। भारत के लगभग आधे कृषि क्षेत्रों के किसान सिंचाई के लिए मॉनसून पर निर्भर हैं और मॉनसून सीजन भारत में होने वाली कुल बारिश का 70 फीसदी योगदान करता है। इसे एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए खासा अहम माना जाता है।
कृषि क्षेत्र 2.6 अरब डॉलर की भारतीय इकोनॉमी में 15 फीसदी योगदान करता है, लेकिन यह 130 करोड़ की आबादी में से लगभग आधे हिस्से को रोजगार देता है।

कैसे प्रभावित हुई बुआई

इस सीजन की बात करें तो मॉनसून की देरी की वजह से 21 जून तक सिर्फ 91 लाख हेक्टेयर पर बुआई हुई है, जो पिछले साल की तुलना में 12.5 फीसदी कम है। यह डाटा मिनिस्ट्री आफ एग्रीकल्चर एंड फॉर्मर्स वेलफेयर का है।

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.