पर्सनल फाइनेंस /ज्वैलरी नहीं गोल्ड ईटीएफ में करें निवेश, ये दिला सकता है फायदा; इसमें नहीं रहती ठगी की संभावना

  • सोने  में ज्यादा गिरावट नहीं हुई है, कोरोना वायरस की मुसीबत टलने के बाद सोना जल्दी ही फिर से मजबूत हो सकता है
  • गोल्ड ईटीएफ को शेयरों की तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के कैश मार्केट में खरीदा-बेचा जा सकता है

Moneybhaskar.com

Mar 17,2020 01:27:00 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस के कारण बाजार का बुरा हाल है। निवेशकों के मन में सवाल है कि कहां निवेश करना सही रहेगा। ऐसे में गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना सही हो सकता है। क्योंकि बाजार में गिरावट का असर सोने पर ज्यादा नहीं हुआ है और विशेषज्ञों की मानें तो मुसीबत टलने के बाद सोना जल्दी ही फिर से मजबूत हो जाएगा। गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) सोने में निवेश करने का एक सरल तरीका है। इसे पेपर गोल्ड भी कहते हैं। इन्हें शेयरों की तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के कैश मार्केट में खरीदा-बेचा जा सकता है। इसमें कोई न्यूनतम लॉट साइज नहीं होता है। गोल्ड ईटीएफ की एक यूनिट एक ग्राम सोने के बराबर होती है। निवेशक इसकी यूनिट्स को एकमुश्त या फिर सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये थोड़ा-थोड़ा भुगतान कर खरीद सकते हैं। इससे जुड़ी खास बातें...

गोल्ड ईटीएफ के फायदे

गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के जरिए निवेशक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सोना खरीद/बेच सकते हैं और आर्बिटेज गेन (एक मार्केट से खरीदकर दूसरे मार्केट में बेचने पर लाभ) हासिल कर सकते हैं। भारत में गोल्ड ईटीएफ 2007 से चल रहे हैं और एनएसई और बीएसई में रेगुलेटेड इंस्ट्रूमेंट्स हैं। इन्हें कई म्यूचुअल फंड स्कीम्स के जरिए खरीद सकते हैं, जो बुलियन, माइनिंग या सोने के उत्पादन से जुड़े सहयोगी बिजनेसों में निवेश करती हैं। गोल्ड ईटीएफ में निवेश के कई फायदे हैं, जो इसे सोने के अन्य विकल्पों से बेहतर बनाते हैं।

इसे खरीदना है आसान

गोल्ड ईटीएफ खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें एनएसई पर उपलब्ध गोल्ड ईटीएफ के यूनिट आप खरीद सकते है और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद गोल्ड ईटीएफ आपके अकाउंट में डिपाजिट हो जाते हैं। ईटीएफ के जरिए सोना यूनिट्स में खरीदते हैं, जहां एक यूनिट एक ग्राम की होती है। इससे कम मात्रा में या एसआईपी (सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान) के जरिए सोना खरीदना आसान हो जाता है। वहीं भौतिक (फिजिकल) सोना आमतौर पर तोला (10 ग्राम) के भाव बेचा जाता है। ज्वैलर से खरीदने पर कई बार कम मात्रा में सोना खरीदना संभव नहीं हो पाता।

नहीं होगी ठगी की संभवना

गोल्ड ईटीएफ की कीमत पारदर्शी और एक समान होती है। यह लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन का अनुसरण करता है, जो कीमती धातुओं की ग्लोबल अथॉरिटी है। वहीं फिजिकल गोल्ड की अलग-अलग विक्रेता/ज्वैलर अलग-अलग कीमत पर दे सकते हैं।

मिलता है शुद्ध सोना

गोल्ड ईटीएफ से खरीदे गए सोने की 99.5% शुद्धता की गारंटी होती है, जो कि सबसे उच्च स्तर की शुद्धता है। आप जो सोना लेंगे, उसकी कीमत इसी शुद्धता पर आधारित होगी।

इसे खरीदने में आता है कम खर्च

गोल्ड ईटीएफ खरीदने में 0.5% या इससे कम का ब्रोकरेज लगता और पोर्टफोलियो मैनेज करने के लिए सालाना 1% चार्ज देना पड़ता है। लेकिन, अन्य टैक्स जैसे कि वैट देने की ज़रूरत इसमें नहीं होती है। यह उस 8 से 30 फीसदी मेकिंग चार्जेस की तुलना में कुछ भी नहीं है जो ज्वैलर और बैंक को देना पड़ता है, भले ही आप सिक्के या बार खरीदें।

इसमें मिलता है बेहतर रिटर्न

ईटीएफ सोना बेचने या खरीदने में ट्रेडर्स को सिर्फ ब्रोकरेज देना होता है। वहीं फिजिकल गोल्ड में लाभ का बड़ा हिस्सा मेकिंग चार्जेस में चला जाता है और यह सिर्फ ज्वैलर्स को ही बेचा जा सकता है, भले ही सोना बैंक से ही क्यों न लिया हो। गोल्ड ईटीएफ आपको लिक्विडिटी मुहैया कराता है। यानी आप कभी भी इसे बेच सकते हैं और उस समय चल रही सोने की कीमत आपको मिल जाती है।

रखने में रिस्क नहीं

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड डीमैट एकाउंट में होता है जिसमें सिर्फ वार्षिक डीमैट चार्ज देना होता है। इसके साथ ही चोरी होने का डर नहीं होता। वहीं फिजिकल गोल्ड में चोरी के खतरे के अलावा उसकी सुरक्षा में भी खर्च करना होता है।

X

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.