विनिवेश /गेल को दो हिस्सों में बांटकर पाइपलाइन कारोबार को बेचेगी केंद्र सरकार

  • केंद्रीय कैबिनेट अगले महीने नवंबर में कर सकती है विचार
  • 2022 से पहले नहीं होगी पाइपलाइन कारोबार की बिक्री

Moneybhaskar.com

Oct 15,2019 12:47:00 PM IST

नई दिल्ली। केंद्र सरकार सरकारी गैस वितरण कंपनी गेल इंडिया को दो हिस्सों में बांट सकती है। इसको लेकर केंद्रीय कैबिनेट अगले महीने यानी नवंबर में एक प्रस्तार पर विचार कर सकती है। सूत्रों के हवाले से पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके पाइपलाइन कारोबार को अलग एंटीटी बनाया जाएगा। हालांकि, इसकी बिक्री 2022 से पहले नहीं की जाएगी।

देश की सबसे बड़ी नेचुरल गैस वितरण कंपनी है गेल

गेल इंडिया देश की सबसे बड़ी नेचुरल गैस वितरण और ट्रेडिंग कंपनी है। देश की कुल 16234 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन नेटवर्क के दो तिहाई से ज्यादा हिस्से पर गेल का स्वामित्व है। इसी पाइपलाइन के दम पर इसका नेचुरल गैस कारोबार में गेल का बोलबाला है। प्राकृतिक गैस के उपयोगकर्ता अक्सर अपने ईंधन के परिवहन के लिए गेल के 11,551 किलोमीटर के पाइपलाइन नेटवर्क तक पहुंच नहीं होने के बारे में शिकायत करते रहते हैं। सूत्रों के अनुसार, इसी विवाद को खत्म करने के लिए गेल को दो हिस्सों में बांटने पर विचार किया जा सकता है।

केंद्रीय कैबिनेट अगले महीने दे सकता है मंजूरी

रिपोर्ट के अनुसार, पाइपलाइन कारोबार को 100 फीसदी सब्सिडियरी में हस्तांतरित करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास एक प्रस्ताव भेजा जा सकता है। इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट इस महीने के अंत में या फिर अगले महीने यानी नवंबर में मंजूरी दे सकती है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद पाइपलाइन कारोबार को अलग सब्सिडियरी को ट्रांसफर करने के लिए परामर्शदाता नियुक्त किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया 8 से 10 महीनों में पूरी होगी। हालांकि, सरकार के रणनीतिक निवेशक के तहत पाइपलाइन सब्सिडियरी की बिक्री 2022 से पहले नहीं होगी। दरअसल सरकार का मानना है कि इससे पहले देश का गैस बाजार पूरी तरह से मैच्योर नहीं होगा और गेल को नेशनल गैस पाइपलाइन ग्रिड बनाने के लिए सरकारी मदद की जरूरत होगी।

मार्केटिंग कारोबार करती रहेगी गेल

सूत्रों का कहना है कि गेल अपने मार्केटिंग कारोबार और एलएनजी टर्मिनल्स कारोबार को पूर्व की भांति करती रहेगी। इससे पहले सरकार मार्केटिंग कारोबार को सेपरेट सब्सिडियरी बनाकर बेचने पर विचार कर रही थी, लेकिन पाइपलाइन कारोबार को अलग करने पर विचार हो रहा है। 2022 के बाद रणनीतिक निवेश के तहत पाइपलाइन कारोबार को कनाडा की एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्रुकफील्ड को बेचा जा सकता है। ब्रुकफील्ड ने हाल ही में मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज की 1480 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन की खरीदारी की है।

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