चिंता /कश्मीर के सेब किसानों के पास अटका है दिल्ली और जम्मू के व्यापारियों का हजारों करोड़ रुपया

  • दिल्ली के 350 से ज्यादा ट्रेडर्स ने कश्मीर में सेब किसानों को 1,200 करोड़ रुपए एडवांस दिए हैं
  • इस पैसे के बदले किसान उन्हें माल सप्लाई करते, जो कि फिलहाल रुका पड़ा है

Moneybhaskar.com

Sep 16,2019 04:53:59 PM IST

नई दिल्ली. दिल्ली और जम्मू के सेब व्यापारियों ने जम्मू-कश्मीर में सेब किसानों को एडवांस में जो पेमेंट किया था, उसके वापस मिलने को लेकर व्यापारी काफी चिंतित हैं। कश्मीर में सेबों की अच्छी पैदावार होने के बाद भी वहां से माल नहीं आने के कारण दिल्ली और जम्मू के व्यापारियों का पैसा वहीं अटक गया है। कश्मीर में आतंकियों ने सेब किसानों को अपने उत्पाद बाजार में बेचने से मना किया हुआ है, जिसके चलते यह समस्या खड़ी हुई है।

नाफेड से सेब खरीदने को कहा है सरकार ने

केंद्र सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (Nafed) से अनुरोध किया है कि आतंकियों की धमकी के चलते किसानों का सेब उत्पादन खराब न हो, इसलिए वह किसानों से सेब खरीदे। व्यापारियों को चिंता है कि नाफेड अगर सेब खरीदेगा तो उन्होंने किसानों को जो एडवांस पेमेंट किया है, वह बर्बाद हो जाएगा क्योंकि फिर उनके पास माल नहीं आ पाएगा।

अटके हैं ट्रेडर्स के तकरीबन 1500 करोड़ रुपए

इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक, अकेले दिल्ली के ही 350 से ज्यादा ट्रेडर्स जो देशभर में फलों की सप्लाई करते हैं, उन्होंने कश्मीर में सेब किसानों को 1,200 करोड़ रुपए से ज्यादा रकम एडवांस में दे रखी है। जम्मू मंडी के भी 125 ट्रेडर्स ने भी तकरीबन 250 करोड़ रुपए दिए हुए हैं। दिल्ली की आजादपुर मंडी के अध्यक्ष मेहता राम कृपलानी के मुताबिक, व्यापारी लंबे समय से सेब किसानों को एडवांस में ही आर्थिक मदद देते आए हैं। किसानों कीटनाशक, उर्वरक, पैकिंग मैटीरियल और बागानों में काम करने के लिए मजदूर लगाने में इस पैसे को खर्च करते हैं।

बैंकों को पैसा कहां से चुकाएंगे

जम्मू फ्रूट असोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता ने कहा, 'मौजूदा स्थिति सेब व्यापारियों के लिए मुश्किल स्थिति है। अगर नाफेड किसानों से सेब खरीदेगा तो हमें हमारा एडवांस पैसा वापस कैसे मिलेगा। हमने किसानों को पैसा देने के लिए बैंक से लोन लिया था, उसे कैसे चुकाएंगे।' हाल ही में केंद्र ने नाफेड को 2000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जिससे वह सीधे किसानों से कुल सेब उत्पादन का 60 फीसदी खरीद सके। देश में जितना सेब उत्पादन उसमें कश्मीर की हिस्सेदारी 70 फीसदी है। दिल्ली के ट्रेडर्स सालाना 3000 करोड़ रुपए के सेब घाटी से खरीदते हैं।

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