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कचरे जैसी दिखने वाली इस नदी में सोना-चांदी और बेशकीमती धातु हैं जमा, मिट्टी से होगा 200 करोड़ का फायदा

सोने-चांदी वाली इस नदी की कहानी है काफी दिलचस्प

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नई दिल्ली। राजस्थान में झुंझुनू के खेतड़ी स्थति एशिया की पहली और 56 साल पुरानी भूमिगत तांबे की खदान काफी मशहूर है। पहाड़ियों के बीच मौजूद यह खादान अब सोने-चांदी और अन्य बेशकीमती धातुओं की नदी बन गई है। विशेषज्ञाें के मुताबिक, अगर इस नदी में जमा मिट्टी को बेचा जाता है तो उसकी कीमत 200 करोड़ रुपए तक होगी जिससे पैसों की कमी से जूझ रही कंपनी को फायदा होगा।

 

56 साल में तांबे की खादान ऐसे बन गई नदी

दूर से इस नदी को देखने पर चारों तरफ सिर्फ कचरा नजर आएगा लेकिन असल में यह धातु है जो कि यहां जम गई है। स्थानीय लोगों को भी इस नदी के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। यह नदी 56 साल में विकसित हुई है। तांबे की यह नदी 3 किलोमीटर लंबी और एक किलोमीटर तक चौड़ी है। इस नदी की गहराई 15.17 मीटर है।

 

 

 

 

इस खादान में 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते थे

 

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक, सन् 1975 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस खान को देश को समर्पित कर दिया था। इस खान की खोज जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस के जियोलॉजिस्ट ने की थी। एचसीएल कंपनी ने इस खदान में काम करना शुरू किया था। उस समय तकरीबन 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते थे। उस समय आसपास अरावली के कई पहाड़ थे।

 

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इस नदी में सबसे ज्यादा सिलिका मौजूद है

 

इस नदी में सबसे अधकि 73 फीसदी सिलिका मौजूद है। इसके अलावा कॉपर 0.13%, आयरन, 16.96, सल्फर 1.31, एलुमिन 4.53,  कैलशियम 0.7%, मैग्निशियम 1.65 पीपीएम, कोबाल्ट 40 पीपीएम, निकल 29 पीपीएम, लेड 17 पीपीएम, जिंक 36 पीपीएम, मैग्नीज 890 पीपीएम, सिल्वर 5.9 पीपीएम, सोना 0.18 पीपीएम, सिलिनियम 0.9 पीपीएम, मोलेबिडियम 9 पीपीएम सहित अन्य धातु हैं। 

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