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धनतेरस पर सोने के इस विशेष निवेश से हो जाएंगे मालामाल

गोल्ड म्युचुअल फंड और गोल्ड ETF में करें निवेश

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नई दिल्ली।  सोने के प्रति भारतीयों का लगाव अटूट रहा है, चाहे यह इसे एकत्रित करने को लेकर हो या अपनी संपत्ति बढ़ाने के लिए। शुरू के समय के दौरान भी जब निवेश के लिए कम विकल्प मौजूद थे और जब म्युचुअल फंड और एसआईपी भी नहीं थे, तब भी सोने को न सिर्फ एकमात्र भरोसेमंद बल्कि बेहतर निवेश विकल्प के तौर पर भी देखा जाता था। इसकी वजह सोने का दुर्लभ होना और इसका मजबूत मूल्य था। आज भी जब हमारे पास निवेश के ढेरों विकल्प मौजूद है, बड़ी तादाद में भारतीय परिवारों का इसमें भरोसा कायम है।

 

सोने में निवेश के अन्य विकल्प

शुरू में सोने के सिक्कों और ज्वैलरी में निवेश काफी अच्छा और एकमात्र विकल्प था, लेकिन आज हमारे पास गोल्ड म्युचुअल फंड और गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के जरिए अधिक विकल्प मौजूद हैं।

 

क्या है गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF)

गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) सोने में पूंजी निवेश (छड़ और बिस्किट के स्वरूप में सोने में निवेश) करते हैं। इसके जरिए आपके द्वारा खरीदा गया सोना बैंक खाते में रखा जाता है। किसी कंपनी के शेयरों की खरीद की तरह ही ETF भी स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबार करते हैं और इनमें निवेश स्टॉक ब्रोकरों के जरिए किया जाता है। पारंपरिक सोने में किया जाने वाला यह निवेश 99.5 फीसदी प्योर ( RBI स्वीकृत बैंकों से खरीददारी) होता है और फंड प्रबंधकों को अच्छा रिटर्न हासिल करने के लिए डेली आधार पर सोने की कीमतों पर नजर बनाए रखने की जरूरत होती है। हालांकि आपको ईटीएफ में कारोबार करने से डीमैट खाते की भी जरूरत होती है। ईटीएफ अपने ऊंची लागत अनुपात की वजह से अच्छा रिटर्न प्रदान करता है।

 

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(नोट- इसके लेखक स्किरल इन्वेस्टमेंट्स एंड सेविंग्स ऐप के को-फाउंडर सामंत सिक्का हैं।)

गोल्ड म्युचुअल फंड

 

गोल्ड म्युचुअल फंड वे म्युचुअल फंड हैं जो उन कंपनियों के शेयरों में डायरेक्ट निवेश करते हैं जो सोने के खनन से जुड़ी होती हैं। इसमें सोना आपके हाथ में नहीं आता है, लेकिन उन कंपनियों के शेयर आपके खाते में आ जाते हैं जो स्वर्ण खनन में कारोबार करती है। यह अवधारणा सामान्य म्युचुअल फंडों के समान ही है। फंड हाउस आपके जैसे अन्य निवेशकों से रकम जुटाते हैं, उसके बाद फंड हाउस इस रकम का इस्तेमाल सोना या शेयर खरीदने पर करते हैं। इस खरीददारी के बाद फंड हाउस निवेशकों को कुछ यूनिट आवंटित करते हैं जो वैल्यू में एक समान होती हैं। गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड के बीच अंतर यह है कि गोल्ड ईटीएफ के मामले में निवेश एसआईपी के जरिए नहीं किया जा सकता, जबकि गोल्ड फंडों के साथ ऐसा संभव है।

 

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गोल्ड ईटीएफ-गोल्ड फंड में निवेश के फायदे

 

- यह चर्चित है कि जिंस के तौर पर सोना बेहद मूल्यवान है। लेकिन सोने की चोरी होने का खतरा रहता है। इसलिए, पारंपरिक सोने में निवेश नहीं कर, आप अपने पसंदीदा निवेश विकल्प के साथ जुड़े रहकर चोरी या लूटपाट जैसे खतरे से भी बचे रह सकते हैं।
- मुश्किल परिस्थिति या शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव के दौरान, गोल्ड निवेश ऊंचे रिटर्न के साथ बेहतर पसंदीदा विकल्प बनकर उभरा है।
- गोल्ड ईटीएफ में निवेश करते वक्त लिक्विडिटी एक महत्वपूर्ण मानक है, क्योंकि यह विभिन्न फंड हाउसों के लिए अलग-अलग होती है। गोल्ड ईटीएफ की एक यूनिट 1 ग्राम सोने की होती है और गोल्ड ईटीएफ के साथ आप पारंपरिक सोने की तुलना में अधिक लिक्विडिटी प्राप्त कर सकते हैं।
- गोल्ड ईटीएफ छोटी मात्रा में उपलब्ध हैं जबकि पारंपरिक सोने के मामले में ऐसा नहीं है। आप पारंपरिक तौर पर 1 ग्राम सोना नहीं खरीद सकते। इसके अलावा आपको मेकिंग चार्ज भी देना होता है जो काफी अधिक है।
- संभवत: एक निश्चित कारण यह है कि परिवार में वित्तीय आपात स्थिति में भी आपने लोगों को सोना बेचते नहीं देखा होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब हम सोना खरीदते हैं, तो हम इससे भावनात्मक तौर पर जुड़ जाते हैं और कीमतें ऊंची होने पर भी इसे बेचना पसंद नहीं करते। दूसरी तरफ, लेकिन जब आप ईटीएफ या गोल्ड फंड खरीदते हैं तो आपके मन में यह धारणा कायम रहती है कि आपने यह खरीददारी आगे चलकर बिक्री करने के लिए की है।

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