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मोबाइल-लैपटॉप के कचरे से निकले सोना-चांदी से बनेंगे ओलंपिक मेडल, इसलिए लिया इतना बड़ा फैसला

देशभर से जुटाए 50 लाख से ज्यादा खराब मोबाइल

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नई दिल्ली। अपने अनूठे कामों के लिए दुनियाभर में मशहूर जापान एक बार फिर नया कमाल करने जा रहा है। इस बार जापान ने मोबाइल और लैपटॉप के इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-कचरा) से निकलने वाले सोना, चांदी और कांसे से ओलंपिक मेडल बनाने की योजना बनाई है। इनम मेडल्स को जापान में होने वाले पैरालंपिक गेम्स और टोक्यो ओलंपिक में दिया जाएगा। 

 

2017 में शुरू की गई थी योजना
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ओलंपिक मेडल बनाने के लिए टोक्यो ओलंपिक समिति ने अप्रैल 2017 में ई-कचरा एकत्र करने के लिए एक अभियान शुरू किया था। रिपोर्ट के अनुसार, ओलंपिक समिति ने मेडल बनाने के लिए जरूरत के मुताबिक ई-कचरा एकत्र कर लिया है और यह प्रक्रिया मार्च तक पूरी हो जाएगी। इस कचरे को रिसाइकिल करने के बाद मेडल बनाने के लिए आवश्यक धातु एकत्र कर ली गई है। इसमें सोना, चांदी और कांसा शामिल हैं। मेडल बनाने के लिए एकत्र किए गए ई-कचरे में करीब 50 लाख मोबाइल शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जापान ने पर्यावरण प्रदूषण से निपटने के लिए ई-कचरे से ओलंपिक मेडल बनाने का फैसला किया है। जापान ने यह ई-कचरा पूरे देश में लगाए गए उपकरण कलेक्शन बॉक्स के जरिए एकत्र किया है। 

ये था लक्ष्य


जापान ने टोक्यो ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों के मेडल बनाने के लिए ई-कचरे से 30.3 किलोग्राम सोना, 4100 किलोग्राम चांदी और 2700 किलोग्राम कांसा निकालने का लक्ष्य निर्धारित किया था। रिपोर्ट के अनुसार, जापान अब तक अपने लक्ष्य के अनुरूप 100 फीसदी कांसा, 90 फीसदी सोना और 85 फीसदी चांदी एकत्र कर चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लक्ष्य के अनुरूप धातु मार्च तक एकत्र कर ली जाएगी। 

इतने करोड़ रुपए की होगी बचत


जापान के इस कदम की पूरी दुनिया में प्रशंसा हो रही है। इससे जहां ई-कचरे का निपटान होगा, वहीं ओलंपिक के आयोजन खर्च में भी कमी आएगी। जापान ने मेडल बनाने के लिए जितनी धातु जुटाने का लक्ष्य रखा है उससे उसे करीब 28.33 करोड़ रुपए (भारतीय रुपयों में) की बचत होगी। भारत के वर्तमान भाव के अनुसार, जापान को मेडल बनाने में प्रयुक्त होने वाले ई-कचरे से निकले सोने से 10 करोड़ 20 लाख रुपए, चांदी से 18 करोड़ 4 लाख रुपए और कांसे से करीब 10 लाख रुपए की बचत होगा। 

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