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अगस्त तक 33 हजार के लेवल को छू सकता है गोल्ड, ये फैक्टर्स करेंगे सपोर्ट

गोल्ड प्राइस की कीमतें वायदा बाजार में 4 महीने में 33 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

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नई दिल्ली.  साल की शुरुआत में रिकॉर्ड तेजी दर्ज करने के बाद भारत समेत ग्लोबल स्टॉक मार्केट्स में दबाव देखने को मिल रहा है। ग्लोबल सेल ऑफ और बजट में स्टॉक्स से कमाई पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाए जाने से भारतीय स्टॉक मार्केट में भी करेक्शन बना हुआ है। इसके बावजूद एक्सपर्ट मान रहे हैं कि मार्केट का वैल्युएशन हाई है। ऐसे में निवेशक सेफ हेवन के रूप में गोल्ड में निवेश बढ़ा सकते हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना कि ट्रेड वार, जियोपॉलिटिकल टेंशन और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता से गोल्ड प्राइस की कीमतें वायदा बाजार में 4 महीने में 33 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

 

4 महीने में 33 हजार के लेवल छू सकता है सोना 

गोल्ड पिछले कुछ महीने से रेंज बाउंड में कारोबार कर रहा है। एक्सपर्ट के मुताबिक, अगले 4 महीने में गोल्ड का भाव 33 हजार रुपए 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। 
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि पिछले एक साल से गोल्ड एक सीमित रेंज में ट्रेड कर रहा था। बुलियन मार्केट में गोल्ड फरवरी 2017 से 28,200 से 31,200 रुपए प्रति 10 ग्राम की रेंज में बना हुआ था। लेकिन सीरिया में केमिकल हमले के अमेरिका ने इसकी जांच करने के लिए यूएन सिक्युरिटी काउंसिल में दबाव बनाने औऱ सीरिया में हमले करने की संभावना से जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से गोल्ड जुलाई 2016 का हाई स्तर 31,250 रुपए प्रति 10 ग्राम के भाव पर पहुंच गया है। वहीं ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ने 1360 डॉलर प्रति औंस के लेवल को छू लिया है। इस स्तर के टूटने पर गोल्ड 1460 डॉलर प्रति औंस के स्तर के पार जा सकता है।

 

डिमांड में नहीं आई कमी

स्टॉक मार्केट में हाई के बावजूद गोल्ड के डिमांड में कमी नहीं आई है। फाइनेंशियल ईयर 2018 में देश में गोल्ड का इम्पोर्ट पिछले फाइनेंशियल ईय़र की तुलना में 300 टन ज्यादा रहा। 2016-17 में देश में 500 टन के करीब गोल्ड इम्पोर्ट हुआ था, जबकि 2017-18 में गोल्ड इम्पोर्ट 855 टन हुआ। FY18 के आखिरी क्वार्टर में स्टॉक मार्केट में गिरावट और लोकल ज्वैलर्स द्वारा मांग में बढ़ोत्तरी से गोल्ड इम्पोर्ट बढ़ा है।

 

लगातार 5वें साल बढ़ा गोल्ड में इन्वेस्टमेंट 

साल 2018 में दुनिया में लगातार 5वें साल गोल्ड में इन्वेस्टमेंट बढ़ा है। बुलियन इन्वेस्टर्स, माइनर्स और क्वाइन मेकर्स की वजह से गोल्ड में डिमांड बढ़ी है। देश में गोल्ड की फिजिकल डिमांड ज्यादा है। वहीं दूसरे देशों में लोग गोल्ड को इन्वेस्टमेंट के तौर पर देखते हैं और पैसा लगाते हैं।

 


ये फैक्टर्स गोल्ड को बना सकते हैं सेफ हेवन इन्वेस्टमेंट

 

डॉलर इंडेक्स में मंदी का ये है साइकल

 

अजय केडिया का कहना है कि डॉलर इंडेक्स में औसतन 7-8 साल में कमजोरी देखने को मिलती है। डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने से गोल्ड की कीमतों को सपोर्ट मिलता है। डॉलर इंडेक्स में मंदी पर गोल्ड की कीमतें बढ़ती है। 2016 से डॉलर इंडेक्स में कमजोरी का रुख है जिसके 4-5 साल आगे जारी रहने की संभावना है। डॉलर इंडेक्स ने पिछले साल कारोबार के दौरान 103 का हाई बनाया था, जो अब गिरकर 90 के नीचे चला गया है। ऐसे में गोल्ड के लिए यह सपोर्टिव फैक्टर है।

 

 

साल डॉलर इंडेक्स
1970-1978 20 फीसदी गिरावट
1978-1985 60 फीसदी बढ़त
1985-1995 47 फीसदी गिरावट
1995-2002 43 फीसदी बढ़त
2002-2010 40 फीसदी गिरावट
2010-2016 42 फीसदी बढ़त
2016- 2018 कमजोर हुआ

सोर्स: केडिया कमोडिटी

 

क्रूड में तेजी का मिलेगा सपोर्ट

एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटी के डिप्टी वाइस प्रेसिंडेंट अनुज गुप्ता के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही है। इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 71.32 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं, जो करीब 40 महीने यानी दिसंबर 2014 के बाद सबसे अधिक भाव है। क्रूड में तेजी से अन्य कमोडिटी में महंगाई बढ़ती। महंगाई बढ़ने पर गोल्ड में निवेश बढ़ता है।

 

जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने का फायदा

एक्सपर्ट के मुताबिक, ग्लोबल स्तर पर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ी हुई है। अमेरिका-रूस में तनातनी खत्म हुई भी नहीं थी कि सीरिया में रासायनिक हमले ने जियोपॉलिटिकल टेंशन और बढ़ा दी है। सीरिया में केमिकल हमले को लेकर अमेरिका ने कड़ा विरोध जताया है और इसके जबाव में वह सीरिया पर सैनिक कार्रवाई कर सकता है। जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के तौर पर गोल्ड में निवेश बढ़ जाता है।

 

स्टॉक मार्केट में करेक्शन

गुप्ता ने कहा कि इस समय भारत सहित दुनिया भर के स्टॉक मार्केट्स में करेक्शन देखने को मिला है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में गोल्ड में निवेश बढ़ सकता है। शेयर बाजार की तुलना में यहां रिस्क कम है। निवेश बढ़ने पर गोल्ड में तेजी आएगी है।

 

ब्याज दरें बढ़ाने पर गोल्ड में बढ़ेगा निवेश

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी का अनुमान जताया है। वहीं यूरोप में सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। ब्याज दरें बढ़ने के संकेत से महंगाई बढ़ेगी। जिसका फायदा गोल्ड को मिलेगा। महंगाई बढ़ने पर गोल्ड में निवेश बढ़ेगा।

 

ट्रेड वार का असर

अमेरिका और चीन में ट्रेड वार की वजह से गोल्ड की कीमतों में उछाल आया है। हालांकि अमेरिका औऱ चीन में ट्रेड वार में कम हुआ है। लेकिन अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। ग्लोबल मार्केट में अनसर्टेनिटी बढ़ने से गोल्ड की खरीददारी बढ़ी है। सेंट्रल बैंक गोल्ड का रिजर्व बढ़ा रहे हैं।

 

प्रॉपर्टी का भाव कम होने से गोल्ड को फायदा

इन्वेस्टमेंट के तौर पर रियल एस्टेट अपना रुतबा खोता जा रहा है। अफोर्डेबल हाउसिंग में सप्लाई ज्यादा होने से कीमतें गिरी हैं। इससे रियल एस्टेट में निवेश करने वालों की संख्या में कमी आई है। इसका फायदा गोल्ड को मिल सकता है।

 

पॉलिटिकल अनसर्टेनिटी से मिलेगा सपोर्ट

कमोडिटी एक्सपर्ट के मुताबिक, देश में 2018 में कई राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं 2019 में आम चुनाव होने हैं। इसको लेकर एक पॉलिटिकल अनसर्टेनिटी बढ़ी है। अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कम सीटें मिलने की उम्मीद से गोल्ड को सपोर्ट मिलेगा।

वहीं बजट में सरकार ने गोल्ड को एसेट क्लास के रूप में दर्जा दिया है। जिसका फायदा इसको मिल सकता है।


आगे पढ़ें- गोल्ड-सिल्वर रेश्यो 40 साल के हाई पर 

केडिया का कहना है कि गोल्ड-सिल्वर रेश्यो अपने 40 साल के हाई पर पहुंच गया है। तीन महीने पहले गोल्ड-सिल्वर रेश्यो 76.20 के स्तर था जो अब बढ़कर 81.23 के स्तर पर पहुंच गया। 35 साल में ऐसा तीन बार ही हुआ जब रेश्यो 80 के ऊपर गया है। आम तौर पर रेश्यो 80 के ऊपर टिकता नहीं है। गोल्ड-सिल्वर को औसतन रेश्यो 61.50 का है। रेश्यो में बढ़ोतरी से गोल्ड में तेजी रहने का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि गोल्ड में तेजी के बावजूद सिल्वर में निवेशकों को 10 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिल सकता है।

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