असर /चुनाव के बाद झटका देंगे पेट्रोल-डीजल, 4 रुपए तक बढ़ सकती है कीमत

Money Bhaskar

May 16,2019 07:03:51 PM IST

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी के बावजूद स्थानीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। लेकिन यह कमी ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी। बाजार के जानकारों का कहना है कि जिस प्रकार से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है उससे यह तय है कि चुनावों के बाद पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जरूर होगी।

2 से चार रुपए तक महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल

पिछले साल कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनावों के दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत देखने को मिली थी। चुनावों के तुरंत बाद पेट्रोलियम कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी कर झटका दिया था। कुछ ऐसा ही लोकसभा चुनावों के दौरान देखने को मिल रहा है। 10 मार्च को चुनाव की घोषणा होने के बाद से अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ज्यादा बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है जबकि इस अवधि में कच्चे तेल की कीमतों में 11 मई के 66.28 डॉलर प्रति बैरल से करीब 10 फीसदी बढ़कर 72.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। जानकारों का कहना है कि जिस प्रकार पिछले साल राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी, उसी प्रकार लोकसभा चुनावों के बाद भी पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। जानकारों का कहना है कि जिस दर से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी हो रही है उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 2 से 4 रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

कीमतों में हस्तझेप करती है सरकार

जानकारों का कहना है कि चुनाव के दौरान ज्यादा से ज्यादा लोगों को लुभाने के उद्देश्य से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकारें हस्तझेप करती हैं। इसका असर पेट्रोलियम कंपनियों को मुनाफे पर पड़ता है। चुनावों के खत्म होने के बाद इस मुनाफे की रिकवरी के लिए कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करती हैं।

अमेरिकी प्रतिबंधों से कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर

बाजार विशेषज्ञ केडिया कमोडिटी के केडी कमोडिया का कहना है कि अमेरिका की ओर से ईरान और वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे भारत भी प्रभावित हो रहा है। ईरान और वेनेजुएला पर प्रतिबंधों से भारत के तेल आयात पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा ओपेक देशों ने क्रूड उत्पादन में कमी कर रखी है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर हैं। इसका असर आने वाले दिनों में भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।

अमेरिकी-चीन ट्रेड वॉर का असर

अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर का असर भी कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। इससे भारत भी प्रभावित हो रहा है। इन दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपए की कीमत गिर रही है। रुपए की कीमत गिरने से भारतीय तेल कंपनियों को कच्चे तेल का आयात करने पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इससे तेल कंपनियों की नकदी पर असर पड़ रहा है। नकदी का स्तर बनाए रखने के लिए भी तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं।

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