Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

    Home »Market »Commodity »Energy» Crude Prices Set To Rise Upto 60 Dollor Per Barrel In 2017

    पेट्रोल-डीजल महंगा होने के आसार, इन वजहों से क्रूड पर साल भर बना रहेगा प्रेशर

     
    नई दिल्ली। अगले 3 महीनों के दौरान भारत में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में 6 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है। ओपेक और नॉन ओपेक देशों द्वारा प्रोडक्शन कट करने पर बनी सहमति के बाद से क्रूड की कीमतें ग्लोबल मार्केट में 17-18 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं। वहीं, सउदी अरब ने ओपेक देशों की ओर से इस साल एक और प्रोडक्शन कट किए जाने के संकेत दिए गए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बयान के बाद क्रूड की ग्लोबल कीमतों पर दबाव और बढ़ेगा। इसका असर भारत जैसे इंपोर्टर देशों पर होगा।   
     
    और बढ़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें
    एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड को लेकर ग्लोबल मार्केट में जिस तरह के हालात बन रहे हैं,  उससे पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने तय हैं। भारत सरकार ने भी साफ कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल पर किसी तरह की सब्सिडी नहीं दी जाएगी। भारत में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतें ग्लोबल मार्केट में क्रूड की कीमतों के हिसाब से तय होती है। ऐसे में ग्लोबल ट्रेंड देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां तेजी से कीमतें बढ़ा सकती हैं। हालांकि यह डरने वाली स्थिति नहीं है और पूरे साल के दौरान भी यही औसत बना रहेगा। बीच-बीच में कुछ कटौती हो सकती है।
     
     
    सस्ते तेल का दौर खत्म
    एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने moneybhaskar.com को बताया कि एक ओर ओपेक देश रूस के साथ मिलकर क्रूड की कीमतों पर कंट्रोल करना चाहते हैं। वहीं अमेरिका की नीति साफ है कि वह आने वाले दिनों में क्रूड का प्रोडक्शन बढ़ाएगा। अमेरिका की इसी पॉलिसी के चलते ओपेक देश इस साल क्रूड प्रोडक्शन में और ज्यादा कटौती कर सकते हैं। इससे यह तो साफ है कि अब सस्ते तेल का दौर खत्म हो गया है। जहां तक क्रूड की बात है, कीमतें इस साल 52 से 60 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में रहेंगी।  
     
     
    पूरे साल कीमतों पर रहेगा दबाव
    एंजेल ब्रोकिंग के अनुज गुप्ता ने moneybhaskar.com को बताया कि 2017 क्रूड के लिहाज अनिश्चितता वाला दौर रहेगा। जहां ओपेक और नॉन ओपेक देश प्रोडक्शन कम करेंगे, वहीं इस साल ग्लोबल ग्रोथ फोरकास्ट अच्छी होने से क्रूड की डिमांड आगे बढ़ेगी। इससे इनकी कीमतें बढ़ेंगी। कीमतें बए़ने से भारत और चीन जैसे आयात करने वाले देश नुकसान में रहेंगे, जहां पेट्रोल व डीजल की कीमतें बढ़ेंगी। बता दें कि नवंबर 2017 में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 40 से 49 डॉलर प्रति बैरल के रेंज में थीं, जो अब बढ़कर 55 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। आने वाले 3 महीनों के दौरान ये कीमतें 60 से 62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।  
     
     
    क्रूड को लेकर क्या है ग्लोबल सेंटीमेंट
    -कुछ देशों ने जनवरी से प्रोडक्शन कम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
    -वहीं डॉलर रुपए के मुकाबले मजबूत हो रहा है।
    -ओपेक देश एक बार और प्रोडक्शन कट कर सकते हैं।
    -ओपेक देशों और रूस के संबंध क्रूड को लेकर मजबूत हुए हैं।
    - क्रूड प्रोडक्शन कम करने को लेकर एक फियर फैक्टर है, जिससे इंपोर्ट करने वाले देश ज्यादा खरीददारी कर सकते हैं।
    -इससे एक ओर क्रूड की सप्लाई कम होने से कीमतें ऊपर जाएंगी। वहीं यूएस के नए प्रेसिडेंट ट्रंप की पॉलिसी क्रूड प्रोडक्शन ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने पर है। इसकी वजह से कीमतें कुछ हद तक बैलेंस होंगी।
    -क्रूड की कीमतें इस साल 52 से 60 डॉलर प्रति बैरल तक रह सकती हैं।
     
     
    इंडियन बॉस्केट में कीमतें लगातार हाई
    क्रूड ऑयल की इंडियन बास्केट में क्रूड की इंटरनेशनल कीमतें गुरूवार को 53.18 डॉलर प्रति बैरल थीं। दिसंबर में कभी भी कीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं आईं। जबकि, नवंबर में यह कीमतें औसतन 44.46 डॉलर थीं। इस लिहाज से भी ऑयल कंपनियों पर दबाव है। 

    और देखने के लिए नीचे की स्लाइड क्लिक करें

    Recommendation

      Don't Miss

      NEXT STORY