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58 डॉलर तक आ सकती हैं क्रूड की कीमतें, ओपेक के फैसले पर टिकीं निगाहें

ओपेक और नॉन ओपेक देशों द्वारा आगे क्रूड प्रोडक्शन में कटौती जारी रखने को लेकर क्लेरिटी नहीं आ पाई है।

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नई दिल्ली। ओपेक और नॉन ओपेक देशों द्वारा आगे क्रूड प्रोडक्शन में कटौती जारी रखने को लेकर क्लेरिटी नहीं आ पाई है। इसकी वजह से बुधवार को ब्रेंट क्रूड और डबल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई। फिलहाल एक्सपर्ट्स की निगाहें क्रूड प्रोडक्शन घटाए जाने को लेकर आज ओपेक देशों के निर्णय पर है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रोडक्शन में कटौती जारी न रखने का फैसला होता है तो क्रूड 52 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। वहीं, कटौती जारी रखने के फैसले पर ज्यादा रैली की उम्मीद नहीं है।

 

 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बात की उम्मीद कम है कि यहां से एक साल के लिए ये देश प्रोडक्शन घटाने पर राजी होंगे। बता दें कि ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि रूस क्रूड प्रोडक्श्‍ान कट को और बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि असल में रूस की इकेानॉमी अभी बेहतर स्थिति में नहीं है। ऐसे में क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं तो रूस की मुश्किल और बढ़ सकती है। वहीं, कीमतें बढ़ने का फायदा सीधे तौर पर यूएस को होगा, जो अभी क्रूउ एक्सपोर्टर बन चुका है। वहीं, ओपेक देशों को भी प्रोडक्शन घटाने का बहुत फायदा नहीं मिला है। 

 

डिमांड और सप्लाई का कंसर्न नहीं

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि अभी प्रमुख कंज्यूमर देशों की ओर से क्रूड की डिमांड सुस्त  है। चीन में मंदी है तो ब्रेग्जिट के बाद यूरोप के प्रमुख कंज्यूमर देशों में भी माहौल ठंडा है। यूएस खुद क्रूड का बड़ा प्रोड्यूसर बन चुका है। वहीं, यूएस सहित कुछ देशों के पास क्रूड का अच्छा खासा स्टॉक है, जिससे डिमांड और सप्लाई का कंसर्न नहीं दिख रहा है। 

 

एंजेल ब्रोकिंग के अनुज गुप्ता का कहना है कि ओपेक देशों द्वारा 1.8 मिलिसन बैरल प्रति दिन कटौती किए जाने और नॉर्थ कोरिया के इश्‍यू भी अब डिस्काउंट हो चुके हैं। बुधवार को कोरिया द्वारा मिसाइल परीक्षण से क्रूड की कीमतों पर कोई खास असर नहीं हुआ है। क्रूड की कीमतें सिर्फ इस वजह से फिसली हैं कि प्रोडक्शन कट को लेकर रूस का स्टैंड साफ न होने की खबर आई है। 

 

अल्टरनेटिव एनर्जी भी है लॉन्ग्‍ा टर्म थ्रेट

हाल ही में गोल्डमैन सैक्स ने रिपोर्ट दी थी कि 2020 तक कुल व्हीकल मार्केट में बैटरी ऑपरेटेड व्हीकल्स का मार्केट शुयर बढ़ जाएगा।  एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत सहित दुनिया के तमाम देश अल्टरनेटिव एनर्जी पर फोकस कर रहे हैं जो क्रूड के लिए लॉन्ग्‍ा टर्म थ्रेट है। 

 

58 डॉलर तक आ सकता है क्रूड

अजय केडिया का कहना है कि अगर ओपेक और नॉन ओपेक देश क्रूड प्रोडक्शन में आगे भी कटौती के लिए राजी नहीं होते हैं तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 58 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं। वहीं, डबल्यूटीआई क्रूड की कीमतें 52 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं। हालांकि अगर कटौती एक साल तक बढ़ाने को राजी होते हैं तो क्रूड में शॉर्ट टर्म के लिए रैली दिख सकती है। वहीं, एंजेल ब्रोकिंग के अनुज गुप्ता का कहना है कि डबल्यूटीआई क्रूड की कीमतें अगले साल के पहले तिमाही तक 52 से 58 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में रहेंगी। 

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