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अगले 2 महीनों में 85 डॉलर/बैरल तक पहुंच सकता है क्रूड, और महंगा होगा पेट्रोल-डीजल

नई दिल्ली.  ओपेक औऱ नॉन ओपेक देशों में क्रूड प्रोडक्शन में कटौती दिसंबर के बाद भी जारी रखने पर सहमति बनने के बाद क्रूड की कीमतों को सपोर्ट मिलता दिख रहा है। एकसपर्ट्स का कहना है कि यूएस में इन्वेंट्रीज कम हुई हैं, वहीं ओपेक देशों की ओर से भी सप्लाई टाइट रहने की उम्मीद है। ग्लोबल टेंशन भी कीमतों को सपोर्ट कर रहा है। अगले 2 महीनों में भाव 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि पहले से दबाव में चल रहीं ऑयल कंपनियां यह दबाव कंज्यूमर्स पर पास ऑन कर सकती हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल महंगा होने के साथ महंगाई और बढ़ने का भी डर है। 


जारी रहेगी प्रोडक्शन में कटौती
क्रूड के सबसे बड़े एक्सपोर्टर सऊदी अरब ने क्रूड के लिए 80 डॉलर से 100 डॉलर प्रति बैरल तक का टारगेट दिया था। इसलिए क्रूड उत्पादक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्पोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) ने आगे भी  प्रोडक्शन में कटौती जारी रखने का फैसला किया है। एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटी के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने कहा कि इस फैसले से क्रूड को और सपोर्ट मिलेगा। मजबूत डिमांड के मुकाबले सप्लाई में कमी से ब्रेंट क्रूड की कीमतें अगले दो महीने में 85 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल अभी और महंगा हो सकता हे। 

 

इंडियन बास्केट में क्रूड 3 साल के हाई पर

इंडियन बास्केट में क्रूड ऑयल के प्राइस 70.12 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जो इसका तीन साल का हाई लेवल है। क्रूड में तेजी की वजह अमेरिका में क्रूड ऑयल इन्वेंट्रीज में कमी रही। इसके साथ ही सऊदी अरब द्वारा ऊंची कीमतों का टारगेट दिए जाने से कीमतों पर प्रेशर बढ़ा।

 

5 दिन में 11% तक टूटे OMC के स्टॉक
क्रूड की कीमतें बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मुनाफे पर दबाव है। पिछले 5 दिनों में पब्लिक सेक्टर की कंपनी भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) के स्टॉक में लगभग 9 फीसदी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) में 11 फीसदी, इंडियन ऑयल (आईओसी) में 5 फीसदी और मंगलूर रिफाइनरी में 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। गौरतलब है कि क्रूड की कीमतें बढ़ने से पिछले कई दिनों से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के स्टॉक्स पर प्रेशर देखने को मिल रहा है।

 

 

क्रूड में तेजी का साइड इफैक्ट

 

FY18 में 25% बढ़ा ऑयल इंपोर्ट बिल

चालू वित्त वर्ष के दौरान इस सप्ताह के अंत तक भारत का ऑयल इंपोर्ट बिल लगभग 25 फीसदी चढ़कर 87.7 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। भारत ने वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान कुल  21.93 करोड़ टन क्रूड ऑयल का इम्पोर्ट किया, जिस पर कुल 70.196 अरब डॉलर यानी 4.7 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए।

 

पेट्रोल 55 महीने में सबसे महंगा

आम आदमी के लिए पेट्रोल-डीजल लगातार मुसीबत बढ़ा रहे हैं। शुक्रवार को पेट्रोल अपने 55 महीने के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया और दिल्ली में यह 74.08 रुपए प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। इससे पहले सितंबर 2013 में पेट्रोल की कीमत इस भाव के ऊपर गई थी। वहीं, डीजल कुछ शहरों में 70 रुपए प्रति लीटर का भाव क्रॉस कर गया है।

 

सरकार के खजाने पर बढ़ा बोझ

पिछले 10 महीनों से क्रूड महंगा बना हुआ है, जिससे क्रूड का इंपोर्ट बिल भी बढ़ रहा है। करंट फाइनेंशियल में अप्रैल-फरवरी के दौरान भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल 25 फीसदी महंगा होकर 8070 करोड़ डॉलर हो गया है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के मुताबिक इन 11 महीनों में भारत का ग्रॉस इंपोर्ट बिल 25 फीसदी बढ़कर 9100 करोड़ डॉलर रहा है। अप्रैल-फरवरी के दौरान भारत ने एवरेज 55.74 डॉलर प्रति बैरल कीमत पर क्रूड ऑयल का इंपोर्ट किया, जबकि 2016-17 में यह आंकड़ा 47.56 डॉलर था। 

 

क्रूड से ऐसे प्रभावित होगी GDP

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि क्रूड ऑयल की कीमतें फाइनेंशियल ईयर 2019 में 12 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। अगर ऐसा होता है कि देश की इकोनॉमी पर इसका असर दिखेगा। सर्वे के अनुसार कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़ोत्तरी से जीडीपी 0.3 फीसदी तक गिर सकती है, वहीं महंगाई दर भी 1.7 फीसदी ऊंची हो सकती है।

 

महंगाई बढ़ने का डर

मार्च में रिटेल महंगाई दर कम होकर 5 महीने के निचले स्‍तर 4.28 फीसदी आ गई थी, लेकिन जानकार इसे स्टेबल नहीं मान रहे हैं। आरबीआई खुद यह अनुमान लगा चुका है कि फाइनेंशियल ईयर 2018-19 के पहले 6 महीनों में महंगाई दर 5 फीसदी से ऊपर निकल सकती है। पेट्रोल-डीजल भी रिकॉर्ड लेवल की ओर हैं। ऐसे में महंगाई आगे और बढ़ सकती है। 

 

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