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पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर सरकार अलर्ट, इस सप्ताह ले सकती है बड़े फैसले

सरकार की पेट्रोल-डीजल के ऑल टाइम हाई पर पहुंचने से पैदा हुई ‘क्राइसेस’ पर पूरी नजर है।

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नई दिल्ली. सरकार की पेट्रोल-डीजल के ऑल टाइम हाई पर पहुंचने से पैदा हुई ‘क्राइसेस’ पर पूरी नजर है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि सरकार इन हालात से निबटने के लिए इस हफ्ते ‘कुछ कदम’ उठा सकती है। अधिकारी ने कहा कि सरकार सिर्फ एक्साइस ड्यूटी में कटौती पर निर्भर नहीं रह सकती, जो रिटेल सेलिंग प्राइस का 25 फीसदी तक होता है।

Petrol price : एक्‍साइज ड्यूटी में 2 से 4 रुपए की कटौती कर सकती है सरकार

 

पेट्रोलियम-फाइनेंस मिनिस्ट्री के बीच चल रही है बातचीत
उन्होंने कहा, ‘फ्यूल की कीमतों में बढ़ोत्तरी सरकार के लिए संकट जैसे हालात हैं और इससे निबटने के लिए कई कदम उठाने की जरूरत है। फाइनेंस मिनिस्ट्री क्रूड की कीमतों में बढ़ोत्तरी पर पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के साथ परामर्श कर रही है।’

 

 

ऑल टाइम हाई पर पेट्रोल-डीजल
कर्नाटक चुनाव से पहले 19 दिन तक कीमतें स्थिर रखने के बाद तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल कीमतों में संशोधन किया, जिसके बाद कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गईं। दिल्ली में पेट्रोल 76.87 रुपए और डीजल 68.08 रुपए प्रति लीटर के लेवल पर पहुंच गया। बीते 9 दिनों में पेट्रोल की कीमतों में 2.24 रुपए और डीजल में 2.15 रुपए की प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। 

 

 

दिल्ली में सबसे कम है कीमत
राज्यों के लिए रेट्स वहां पर लागू लोकल सेल्स टैक्स या वैट पर निर्भर है। दिल्ली की कीमतें सभी मेट्रो शहरों और अधिकांश राज्यों की राजधानियों की तुलना में सस्ती हैं। उठाए जाने वाले संभावित कदमों का खुलासा किए बिना अधिकारी ने कहा कि सरकार को एक्साइस ड्यूटी में कटौती के ऑप्शन पर विचार करने के साथ ही अपने फिस्कल डाटा पर भी नजर रखनी होती है। 

 

 

एक्साइस ड्यूटी में कटौती पर नहीं रह सकते निर्भर
अधिकारी ने कहा, ‘हम सिर्फ एक्साइस ड्यूटी में कटौती पर ही निर्भर नहीं रह सकते, हालांकि मैं एक्साइस ड्यूटी में कटौती की संभावना से इनकार नहीं कर रहा हूं। हमें फ्यूल पर एक्साइस ड्यूटी में कटौती के फिस्कल डाटा पर असर को भी ध्यान में रखना है।’

 

 

केंद्र और राज्यों दोनों को कदम उठाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों को ही कदम उठाने की जरूरत है। राज्य रिटेल कॉस्ट का 20 से 35 फीसदी तक वैट वसूलते हैं। उन्होंने कहा, ‘तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से निबटने के लिए कुछ कदम इसी हफ्ते उठाए जाने का अनुमान है।’
उन्होंने कहा कि ऊंचे तेल बिल में रुपया भी अहम भूमिका निभार रहा है, जो 67.97/डॉलर के साथ 16 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। 

 

 

राज्यों में अलग-अलग है वैट
केंद्र सरकार पेट्रोल पर 19.48 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 रुपए प्रति लीटर एक्साइस ड्यूटी वसूलती है। स्टेट सेल्स टैक्स या वैट विभिन्न राज्यों के लिए अलग-अलग है। एक्साइस ड्यूटी की तुलना में वैट कीमत पर लगता है और रेट्स बढ़ने से राज्यों का रेवेन्यू बढ़ जाता है।
दिल्ली में अप्रैल में पेट्रोल पर 15.84 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 9.68 रुपए प्रति लीटर वैट था। आज पेट्रोल पर यह 16.34 रुपए और डीजल पर 10.02 रुपए प्रति लीटर है।

 

 

1 रु कटौती से 13 हजार करोड़ का रेवेन्यू लॉस
पेट्रोल और डीजल पर एक्साइस ड्यूटी में प्रति 1 रुपए की कटौती से 13,000 करोड़ रुपए के रेवेन्यू का लॉस होता है। सरकार ने ग्लोबल मार्केट में क्रूड की कीमतों में नरमी के बाद अपने फाइनेंसेस बढ़ाने के लिए नवंबर, 2014 और जुलाई, 2016 के बीच एक्साइस ड्यूटी में 9 बार बढ़ोत्तरी की, हालांकि बीते साल अक्टूबर में 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई थी।
एक्साइस ड्यूटी में कटौती के क्रम में केंद्र ने राज्यों से भी वैट घटाने के लिए कहा। इसके बाद सिर्फ 4 राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश ने रेट्स में कटौती की, लेकिन एक बीजेपी शासित राज्य सहित अन्य ने केंद्र की अपील की अनदेखी कर दी। 

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