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क्रूड की कीमतों ने मोदी सरकार को दिया झटका, FY18 में 25% बढ़ा ऑयल इंपोर्ट बिल

चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत का ऑयल इंपोर्ट बिल लगभग 25 फीसदी चढ़कर 87.7 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

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नई दिल्ली. चालू वित्त वर्ष के दौरान इस सप्ताह के अंत तक भारत का ऑयल इंपोर्ट बिल लगभग 25 फीसदी चढ़कर 87.7 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में क्रूड की कीमतों में मजबूती रही है। भारत ने वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान कुल  21.93 करोड़ टन क्रूड ऑयल का इम्पोर्ट किया, जिस पर कुल 70.196 अरब डॉलर यानी 4.7 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए।


महंगे क्रूड ने बढ़ाईं मुश्किलें

ऑयल मिनिस्ट्री की पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के ताजा डाटा के मुताबिक 2017-18 में इंपोर्ट 21.915 करोड़ टन रहा, जिसके लिए भारत ने 87.725 अरब डॉलर यानी 5.65 लाख करोड़ रुपए का पेमेंट किया। भारत अपनी ऑयल की 80 फीसदी से ज्यादा जरूरत के लिए इंपोर्ट पर निर्भर है।

चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों (अप्रैल, 2017 से फरवरी, 2018) के दौरान देश में 63.5 अरब डॉलर का 19.57 करोड़ टन क्रूड का इंपोर्ट हुआ।


क्रूड के एवरेज प्राइस में खासी बढ़ोत्तरी

अप्रैल-फरवरी के दौरान भारत ने एवरेज 55.74 डॉलर प्रति बैरल कीमत पर क्रूड ऑयल का इंपोर्ट किया, जबकि 2016-17 में यह आंकड़ा 47.56 डॉलर और 2015-16 में 46.17 डॉलर प्रति बैरल रहा था। पीपीसीए ने कहा, ‘अप्रैल, 2017-फरवरी, 2018 के दौरान क्रूड ऑयल इंपोर्ट वास्तविक कीमतों पर आधारित है, जबकि मार्च, 2018 के लिए क्रूड ऑयल इंपोर्ट 65 डॉलर प्रति बैरल और 65 रुपए प्रति डॉलर एक्सचेंज रेट पर हुआ था।’

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