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तेल के खेल में ट्रम्प पर मोदी भारी, अमेरिकी फरमान पर नहीं दिया ध्यान

मोदी का अभियान पड़ा ट्रम्प पर भारी, ईरान से तेल खरीदना रहेगा जारी

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नई दिल्ली।  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2015 में हुए परमाणु समझौते के तहत ईरान पर लगाए गए सभी प्रतिबंध वापस लगा दिए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत अमेरिका ने उन देशों के खिलाफ भी कठोर कदम उठाने की बात कही है जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखेंगे। अमेरिकी सरकार ने भारत समेत 8 देशों को वहां से कच्चा तेल की खरीद जारी रखने की छूट दी है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक सशक्त अभियान चलाया कि आप उपभोक्ता देशों के हितों की अनदेखी नहीं कर सकते हैं। भू-राजनीतिक परिस्थितियों को समझते हुए भारत ने अपना मुकाम हासिल कर लिया है। अमेरिका ने भारत समेत कुछ देशों पर से प्रतिबंध हटा दिया है।


इम्पोर्ट घटाने को मिले मौके

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कुछ देशों को रियायत देने की बात भी कही है। पोंपियो का कहना है कि ईरान से होने वाले तेल आयात को कुछ देश तुरंत नहीं रोक सकते। ऐसे में उन्हें 180 दिनों में ईरान से आयात घटाने और फिर धीरे-धीरे इसे पूरी तरह बंद करने का मौका दिया जाएगा। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध 5 नवंबर से लागू होने जा रहे हैं, जिसके तहत अमेरिका चाहता है कि कोई भी देश ईरान से कोई तेल न खरीदे। ऐसा न करने वाले देशों और कंपनियों के खिलाफ वह पाबंदी लगा सकता है।

 

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ट्रम्प की भारत को धमकी

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने  4 नवंबर तक ईरान से तेल का इम्पोर्ट बंद नहीं करने वाले देशों को ‘देख लेने’ की धमकी दी थी। ट्रम्प की धमकी इसलिए भी अहम है, क्योंकि भारत ने हाल में ऐलान किया कि उसकी दो कंपनियों ने ईरान से तेल इम्पोर्ट करने का ऑर्डर दिया है।

 

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भारत अब रुपए में खरीदेगा तेल

 

अमेरिकी फरमान का तोड़ निकालते हुए भारत अब ईरान से कच्चा तेल रुपए में खरीदेगा। ईरान खाड़ी देशों के मुकाबले तेल इम्पोर्ट के भुगतान के लिए ज्यादा समय-सीमा देता है। भारत ईरान को दो हिस्सों में पेमेंट करता है। 45 फीसदी यूको बैंक के खाते में रुपए में और 55 फीसदी पेमेंट यूरो में, लेकिन अब भारत सारा पेमेंट रुपए में ही करेगा। इसका यह मतलब है कि अगर स्वीफट बैंक सिस्टम से ईरानी बैंक को बैन भी कर दिया जाएगा, इसके बावजूद भारत भुगतान जारी रख सकेगा।

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