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दिल्ली में पेट्रोल 74.95 रु प्रति लीटर, डीजल रिकॉर्ड हाई पर, लगातार दूसरे दिन बढ़े दाम

कर्नाटक में मतदान के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार दूसरे दिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्‍तरी की है।

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नई दिल्‍ली. कर्नाटक में मतदान के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार दूसरे दिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्‍तरी की  है। मंगलवार को पेट्रोल के दाम 15 पैसे और डीजल के भाव 22 पैसे प्रति लीटर बढ़े। इस बदलाव के बाद दिल्‍ली में पेट्रोल की कीमत 74.80 से बढ़कर 74.95 रुपए प्रति लीटर और डीजल 66.14 रुपए से बढ़कर 66.36 रुपए प्रति लीटर हो गया। इसके साथ ही डीजल रिकॉर्ड हाई पर जबकि पेट्रोल 56 महीने में सबसे महंगा हो गया। 

 

बता दें कि सोमवार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 19 दिन के बाद संशोधन किया गया था। सोमवार को पेट्रोल के दाम 17 पैसे और डीजल के भाव 21 पैसे प्रति लीटर बढ़े थे। माना जा रहा है कि कर्नाटक चुनाव के चलते सोमवार के पहले 19 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। 

 

क्रूड की कीमतें बनी परेशानी 
इंटरनेशनल मार्केट में मंगलवार को क्रूड की कीमतें 78.42 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गईं। वहीं, डबल्यूटीआई क्रूड भी 70 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। क्रूड की बढ़ती कीमतों का असर ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड महंगा होने से इंडियन बास्केट में भी क्रूड ऊंची कीमतों पर बना हुआ है, जिसके वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। 

 

4 बड़े शहरों में भाव

शहर   पेट्रोल   डीजल
दिल्ली 74.95 rs/ltr 66.36 rs/ltr
कोलकाता 77.65 rs/ltr 68.90 rs/ltr
मुंबई 82.79 rs/ltr 70.66 rs/ltr
चेन्नई  77.77 rs/ltr 70.02 rs/ltr

(नोट: पेट्रोल-डीजल की कीमतें मंगलवार 15 मई 2018 की हैं।)  

 

24 अप्रैल से स्थिर थीं कीमतें 
तेल कंपनियों की ओर से जारी डेली प्राइस नोटिफिकेशन बताता है कि 24 अप्रैल से पिछले हफ्ते तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी थीं। पिछले साल जून से कंपनियां लागत में बदलाव के अनुसार ऑटो फ्यूल की कीमतों की रोज समीक्षा करती हैं। इससे पहले, पिछले 15 साल से हर महीने की पहली और 16वीं तारीख को तेल की कीमतों की समीक्षा होती थी। तेल कंपनियों ने यह मानने से इनकार कर दिया था कि कर्नाटक में बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों को फ्रीज रखा गया। इस सेक्‍टर से जुड़े एक एनॉलिस्‍ट का कहना है कि यदि तेल कंपनियां नियमित तौर पर अपनी समीक्षा जारी रखती तो बीते 19 दिन में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 1.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्‍तरी हो जाती। 

 

तेल कंपनियों को 500 करोड़ के नुकसान का अनुमान 
तेल कंपनियों ने कर्नाटक चुनाव के लिए मतदान होने से पहले करीब तीन हफ्ते से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा था। 12 मई को कर्नाटक में मतदान हुए। उसके बाद 14 मई को तेल कंपनियों ने फिर से कीमतों की रोज समीक्षा शुरू कर दी। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 19 दिन तक बदलाव नहीं करने से तेल कंपनियों को करीब 500 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। क्‍योंकि, अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से उनकी लागत में इजाफा हुआ। 

 

गुजरात चुनाव के दौरान भी घटे थे पेट्रोल-डीजल के दाम 
दिसंबर 2017 में गुजरात चुनाव के लिए मतदान होने से पहले 15 दिन तक भी सरकारी तेल कंपनियों ने रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 1-3 पैसे प्रति लीटर की रोजाना कटौती की थी। मतदान होने के बाद तेल कंपनियों ने तत्‍काल कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी थी। ऐसे में उस वक्‍त भी यह अटकलें थी कि सरकार ने शायद तेल कंपनियों को कीमतें स्थिर रखने के लिए कहा था। 

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