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सऊदी की मुसीबत बने भारत के किसान, अटक सकता है 3 लाख Cr का प्लान

नई दिल्ली. सऊदी अरब का भारतीय बाजार पर कब्जे का प्लान अब मुश्किल में पड़ता दिख रहा है। उसके लिए महाराष्ट्र के किसान सबसे बड़ी मुसीबत के तौर पर सामने आए हैं। दरअसल सऊदी अरब की कंपनी सऊदी आर्मको ने महाराष्ट्र में 44 अरब डॉलर (लगभग 3 लाख करोड़ रुपए) के निवेश से भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी लगाने के लिए करार किया है। किसानों के विरोध से सऊदी अरब की योजना अटक सकती है।

 

 

अप्रैल में हुआ था करार

रत्नागिरी रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (आरआरपीएल) के लिए अप्रैल में दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम के दौरान समझौता हुआ था। इसमें सऊदी आर्मको को 50 फीसदी और बाकी हिस्सेदारी भारत की सरकारी तेल कंपनियों को देने का प्रस्ताव है। इस रिफाइनरी को महाराष्ट्र के पश्चिमी तट पर रत्नागिरी में बनाया जाना है। 

रॉयटर्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को दोनों ही देशों के लिए गेमचेंजर बताया जा रहा है। इससे भारत को जहां निर्बाध फ्यूल की सप्लाई सुनिश्चित होगी और सऊदी अरब के लिए तेल के नियमित खरीददार सुनिश्चित होंगे। दोनों ही देशों के फायदे वाला होने के बावजूद यह प्रोजेक्ट अब बड़ी मुश्किल में फंसता दिख रहा है।

 

 

हजारों किसान कर रहे हैं विरोध

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसान इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं। हजारों किसान रिफाइनरी का विरोध कर रहे हैं और अपनी जमीन सरेंडर करने से इनकार कर रहे हैं। दरअसल यह इलाका अल्फांसो आम और काजू के बागानों के लिए प्रसिद्ध है। साथ ही इस इलाके में बड़ी संख्या में मछुआरों की बस्तियां हैं। किसानों का मानना है कि रिफाइनरी से इन सभी को नुकसान हो सकता है। 

 

 

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