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रूस-अमेरिका की इस जंग में भारत को होगा विनर, मोदी के लिए बनेगा वरदान

रूस और अमेरिका के बीच अब एक ऐसी जंग छिड़ी है, जिसपर भारत की निगाहें टिकी हुई हैं।

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नई दिल्ली। रूस और अमेरिका के बीच अब एक ऐसी जंग छिड़ी है, जिसपर भारत की निगाहें प्रमुखता से टिकी हुई हैं। इस जंग में जो स्थिति बन रही है, उसमें भारत की जीत होनी तय लग रही है। इस जंग में इन दिनों रूस और अमेरिका आमने-सामने भी हैं। इसमें जहां रूस और ओपेक देश एक-दूसरे का साथ देने में लगे हैं, वहीं अमेरिका इन देशों की रणनीति फेल करने में लगा हुआ है। अमेरिका अपनी रणनीति में कामयाब भी होता दिख रहा है। या तो अमेरिका इस जंग में रूस को पीछे छोड़ दे, या रूस अपनी रणनीति बदलकर फिर से अमेरिका को बैकफुट पर करे, दोनों स्थिति भारत के लिए फादेमंद दिख रही है। अगर ऐसा जल्दी हुआ तो यह मोदी सरकार के लिए बड़ा वरदान भी बन सकता है। 


आगे पढ़ें, अमेरिका-रूस की जंग में कैसे होगा भारत को फायदा............ 

जंग है कच्चे तेल के खेल का 
असल में यह जंग है कच्चे तेल के बाजार को कंट्रोल करने को लेकर हो रहे बड़े खेल की। कच्चे तेल के खेल में इन दिनों अमेरिका और रूस आमने-सामने भी हैं। एक ओर जहां रूस खाड़ी देशों के साथ मिलकर कच्चे तेल की बाजार पर कंट्रोल करने में लगा है, वहीं अमेरिका ने यह ठान लिया है कि वह इस बाजार में अपनी धाक जमाएगा। 

 

फिलहाल अमेरिका इसे लेकर इतना अग्रेसिव है कि किसी भी कीमत पर तेल का उत्पादन कम करने के मूड में नहीं है। ऐसा ही रहा तो अमेरिका जल्द ही कच्चे तेल का उत्पादन करने के मामले में रूस को पीछे छोड़ देगा। अगर अमेरिका ऐसा करता है तो रूस और ओपेक देशों को खेल बिगड़ सकता है। वहीं, हजारों करोड़ की मार्केट गंवा देने के डर से ये देश वापस कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा सकते हैं। ऐसी स्थिति में तेल का उत्पादन बहुत ज्यादा होगा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर निचले स्तरों पर आ सकती हैं। ऐसे में भारत को खासा फायदा होगा, जो अपनी जरूरतों का 82 फीसदी तेल दूसरे देशों से खरीदता है। 

 

आगे पढ़ें, मोदी के लिए कैसे बनेगा वरदान.........

मोदी के लिए ऐसे बनेगा वरदान
-भारत अपनी जरूरतों का 82% क्रूड आयात करता है। क्रूड की कीमतें कम होने से भारत का आयात पर होने वाला खर्च घटेगा।  जिससे देश का करंट अकाउंट डेफिसिट को कंट्रोल करने में भी मदद मिली। 
-क्रूड इंडस्ट्री की सबसे बड़ी डिमांड में एक है। सस्ते तेल से उत्पादन लागत में भी बचत होगी, महंगाई को काबू करने में मदद मिली। 
-क्रूड सस्ता होता है तो सरकार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का मौका मिलेगा। 3 अक्टूबर 2017 के पहले 3 साल में सरकार ने पेट्रोल पर एक्‍साइज ड्यूटी 15.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर 22.7 रुपए प्रति लीटर कर दिया था, वहीं डीजल पर यह 5.8 प्रति लीटर से 19.7 रूपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। 
-इन वजहों से सरकार का राजस्व बढ़ता गया। 

 

मोदी के पहले 3 साल तेल ने ही दिया था साथ
मोदी सरकार जबसे सत्ता में आई, कच्चे तेल की कम कीमतों ने सरकार का साथ दिया। सरकार जब सत्ता में आई थी, तब कच्चे तेल की कीमतें इंटरनेशनल मार्केट में 110 डॉलर प्रति बैरल थीं। जो जून 2017 में घटकर 48 डॉलर तक आ गईं। यानी कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा कमी आई। सस्ते तेल के दम पर मोदी सरकार के दौरान देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आती गई। 
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तेल महंगा होने से बिगड़ा खेल


-पिछले कुछ महीनों से कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। पिछले महीनें कच्चा तेल 71 डॉलर प्रति बैरल पर था जो अब 65 डॉलर के आस-पास बना हुआ है। 
-क्रूड महंगा होने से भारत को इंपोर्ट पर खर्च बढ़ाना पड़ रहा है। इंपोर्ट का खर्च बढ़ने से भारत का चालू खाता घाटा बढ़ेगा। इससे सरकार की बैलेंसशीट पर निगेटिव असर होगा। 
-क्रूड की कीमत बढ़ने का असर पेट्रोल-डीजल की कीमतें महंगी होने के रूप में पड़ रहा है। इससे देश में महंगाई और बढ़ने का डर है, जिससे लोगों में सरकार को लेकर खराब इमेज बन सकती है। 
-सरकार कंज्यूमर्स को राहत देने के लिए एक्‍साइज ड्यूटी घटा सकती है। ऐसा करने पर सरकार की कमाई घटेगी। 
-2018 से 2019 के बीच कुछ राज्यों के अलावा आम चुनाव भी होने हैं। ऐसे में महंगाई सरकार के लिए मुसीबत बन सकती है। 

 

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