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पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटने के आसार कम, बढ़ सकती है कंज्यूमर्स की मुसीबत

इंटरनेशन मार्केट में क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ने के बाद भी कंज्यूमर्स को अभी राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है।

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नई दिल्ली। इंटरनेशनल मार्केट और इंडियन बास्केट में क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ने के बाद भी कंज्यूमर्स को अभी राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। सरकार की ओर से इस बात के संकेत नहीं मिले हैं कि अभी एक्साइज ड्यूटी कम की जाएगी। पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि क्रूड महंगा होने से सरकार मिडिल क्लास और गरीबों को लेकर चिंतित है। हालांकि उन्होंने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया कि सरकार एकसाइज ड्यूटी घटाकर राहत दे सकती है। 

 

 

पहले भी सरकार ने दिए थे ये संकेत
पहले भी फाइनेंस मिनिस्ट्री सूत्रों से यह खबर आई थी कि इंडियन बास्केट में जबतक क्रूड की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रहेंगी, सरकार ड्यूटी नहीं कम करेगी। बता दें कि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें लगातार बढ़कर बुधवार को 65.70 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी जो 30 महीने का टॉप लेवल है। वहीं, इंडियन बॉस्केट में भी क्रूड की कीमतें बढ़कर 61.70 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। 

 

अक्टूबर में घटी थी एक्साइज ड्यूटी 
बता दें कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ने के बाद ही 3 अक्टूबर सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम किया था। ड्यूटी घटने के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत कम होकर 68.38 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 56.89 रुपए प्रति लीटर हो गई थी। जबकि इसके पहले दिल्ली में पेर्टोल 70 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो गया था।

 

वहीं अब क्रूड लगातार महंगा होने से माना जा रहा है कि तेल कंपनियां एक बार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 2 से 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा सकती हैं। ऐसे में अगर ड्यूटी नहीं घटती है तो इसका सीधा असर कंज्यूमर्स पर होगा। 

 

3 अक्टूबर के पहले ड्यूटी में 11 बार बदलाव 
बता दें कि साल 2014 से 3 अक्टूबर के पहले तक केंद्र सरकार  ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 126 फीसदी बढ़ाई थी। वहीं, डीजल पर लगने वाली ड्यूटी में 374 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई थी। 

कितनी हुई कमाई
साल 2013-14 में केंद्र सरकार को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी से 77982 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी जो 2016-17 में बढ़कर 242691 रुपए हो गई। इस दौरान वैट एवं सेल्स टैक्स से राज्यों की कमाई 129045 करोड़ रुपए से बढ़कर 166378 करोड़ रुपए हो गई।



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