बिज़नेस न्यूज़ » Market » Commodity » Energy2019 में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काबू में रखना मुश्किल, क्रूड की बढ़ती डिमांड बन सकती है वजह

2019 में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काबू में रखना मुश्किल, क्रूड की बढ़ती डिमांड बन सकती है वजह

एक्सपर्ट के अनुसार ओपेक के फैसले का असर दिखेगा और क्रूड सस्ता होने से पेट्रोल-डीजल में 2018 में नरमी बनी रहेगी।

Experts says petrol and diesel prices may lower in 2nd half of  2018

नई दिल्ली। ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज यानी ओपेक द्वारा क्रूड सप्लाई बढ़ाने के फैसले के बाद क्रूड की कीमतों में तेजी आई है। हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि फैसले का असर जल्द दिखेगा और क्रूड सस्ता होने से साल 2018 में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में नरमी बनी रहेगी। लेकिन उनका यह भी कहना है कि क्रूड की डिमांड आगे तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जिससे 2019 में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काबू में रखना मुश्किल होगा। 

 

 

बता दें कि ओपेक द्वारा 10 लाख बैरल प्रति दिन प्रोडक्शन बढ़ाने पर राजी होने के बावजूद शनिवार को क्रूड की कीमतों में 6 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 75.55 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इससे एक बार फिर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी की आशंकाएं पैदा हो गई हैं। अगर यह तेजी जारी रहती है तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का प्रेशर बढ़ सकता है। 

 

बाजार में असमंजस की स्थिति
एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा का कहना है कि ओपेक देशों द्वारा क्रूड प्रोडक्शन बढ़ाने को लेकर जो फैसला किया गया है, उसे अमल में लाने को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।  ओपेक देशों के बीच सहमति पर असमंजस की स्थिति दूर नहीं हुई है। क्रूड खरीदने और बेचने वाली कंपनियों को इस फैसले के लागू होने पर संदेह है, इसलिए फैसले के बाद बाजार की प्रतिक्रिया फैसले के विपरीत देखने को मिली है। जिसकी वजह से क्रूड में तेजी दिखी। 

 

फैसला अमल में आने से दिखेगी नरमी 
तनेजा का कहना है कि जैसे-जैसे यह फैसला अमल में आएगा, क्रूड सस्ता होगा। फैसला लागू होने पर इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें घटेंगी, जिससे भारत में क्रूड का इंपोर्ट भी सस्ता होगा। उनका कहना है कि साल 2018 की दूसरी छमाही में डीजल और पेट्रोल की कीमतें कंट्रोल में रह सकती हैं, लेकिन क्रूड की जिस तरह से डिमांड बढ़ रही है, उसे देखकर यह लगता है कि आगे 2019 में कीमतों को काबू में रख पाना मुश्‍किल होगा। 

 

प्रोडक्शन में बढ़ोत्तरी उम्मीद से कम 
एक अमेरिकी ऑयल एक्सपर्ट के मुताबिक, ‘मार्केट को ओपेक मीटिंग से बड़ी मात्रा में ऑयल प्रोडक्शन बढ़ने की उम्मीदें थीं। हालांकि फिलहाल ऐसा नहीं होने जा रहा है। एक वक्त हम 18 लाख बीपीडी प्रोडक्शन बढ़ने की उम्मीदें कर रहे थे, लेकिन अब 6 लाख बीपीडी की बढ़ोत्तरी होने जा रही है।’


ओपेक मीटिंग से मार्केट में भ्रम की स्थिति बन गई है, क्योंकि प्रोड्यूसर्स ने धुंधली सी तस्वीर पेश की है। अब प्रोडक्शन की स्थिति समझना मुश्किल हो गया है। उम्मीदों की तुलना में प्रोडक्शन खासा कम बढ़ने जा रहा है।


फ्रांस के बैंक बीएनपी पारिबा के हेड (ऑयल स्ट्रैटजी) ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा था कि आउटपुट में प्रभावी बढ़ोत्तरी को मार्केट आसानी से एब्सॉर्ब कर लेगा।

 

नहीं लौटेगा बहुत सस्ता क्रूड वाला दौर 
तनेजा का कहना है कि क्रूड की कीमतों में शॉर्ट टर्म के लिए कमी आएगी, लेकिन 2015-16 वाली स्थिति अब वापस आना मुश्किल है, जब क्रूड 30 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास पहुंच गया था। बता दें कि भारत में क्रूड की रोजाना खपत 45 लाख बैरल है जिसका 83 फीसदी इंपोर्ट किया जाता है। कुल इंपोर्ट के 80 फीसदी से ज्यादा ओपेक देशों से होता है। 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट