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क्रूड की कीमतें 3 साल में पहली बार 75 डॉलर के पार, पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान पर

इंटरनेशनल मार्केट में मंगलवार को क्रूड की कीमतें 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं।

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नई दिल्ली। इंटरनेशनल मार्केट में मंगलवार को क्रूड की कीमतें 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। आज की ट्रेडिंग में क्रूड ने 75.27 डॉलर प्रति बैरल का स्तर छू लिया जो करीब 3 साल का हाई है। वहीं, WTI क्रूड भी 69 डॉलर की रेंज में बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ओपेक देशों ने आगे भी सप्लाई टाइट रखने के साफ संकेत दिए हैं। वहीं, जियो पॉलिटिकल टेंशन अभी खत्म होता नहीं दिख रहा है। आने वाले दिनों में क्रूड की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। वहीं, देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और तेजी से बढ़ने का डर है। 

 

 

जारी रहेगी प्रोडक्शन में कटौती
क्रूड के सबसे बड़े एक्सपोर्टर सऊदी अरब ने क्रूड के लिए 80 डॉलर से 100 डॉलर प्रति बैरल तक का टारगेट दिया है।  इसी वजह से क्रूड उत्पादक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्पोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) ने आगे भी  प्रोडक्शन में कटौती जारी रखने का फैसला किया है। एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटी के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने कहा कि ओपेक देशों के अग्रेसिव रवैये से क्रूड को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। मजबूत डिमांड के मुकाबले सप्लाई में कमी से ब्रेंट क्रूड की कीमतें अगले दो महीने में 85 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। 

 

जून 2017 के बाद क्रूड 70 फीसदी महंगा
जून 2017 के बाद से कच्चे तेल की कीमतें इंटरनेशनल मार्केट में 70 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। जून 2017 में क्रूड 44 रुपए प्रति बैरल के भाव तक आया था। वहीं, अब यह 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है। जहां तक इस साल की बात है कि क्रूड 1 जनवरी को 66 डॉलर प्रति स्तर से 14 फीसदी महंगा हो चुका है। इकोनॉमी सर्वे के मुताबिक FY-19 में यह 12 फीसदी तक महंगा हो सकता है। 

 

इंडियन बास्केट में क्रूड 3 साल के हाई पर
इंडियन बास्केट में क्रूड ऑयल के प्राइस 70.12 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जो इसका तीन साल का हाई लेवल है। क्रूड में तेजी की वजह अमेरिका में क्रूड ऑयल इन्वेंट्रीज में कमी रही। इसके साथ ही सऊदी अरब द्वारा ऊंची कीमतों का टारगेट दिए जाने से कीमतों पर प्रेशर बढ़ा।

 

पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान पर
इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 74.63 रुपए प्रति लीटर है। वहीं, मुंबई में यह 82.48 रुपए प्रति लीटर हो गया है। इसी तरह से दिल्ली में डीजल की कीमत 65.93 रुपए प्रति लीटर है तो मुंबई में यह 70.20 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। 

 

 

शहर   पेट्रोल   डीजल
दिल्ली 74.63 rs/ltr 65.93 rs/ltr
कोलकाता 77.32 rs/ltr 68.63 rs/ltr
मुंबई 82.48 rs/ltr 70.20 rs/ltr
चेन्नई  77.43 rs/ltr 69.56 rs/ltr

(नोट: पेट्रोल-डीजल की कीमतें मंगलवार 24 अप्रैल 2018 की हैं।)  

 

आगे पढ़ें, क्रूड में तेजी के साइड इफेक्ट..........

 

 

FY18 में 25% बढ़ा ऑयल इंपोर्ट बिल

चालू वित्त वर्ष के दौरान इस सप्ताह के अंत तक भारत का ऑयल इंपोर्ट बिल लगभग 25 फीसदी चढ़कर 87.7 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। भारत ने वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान कुल  21.93 करोड़ टन क्रूड ऑयल का इम्पोर्ट किया, जिस पर कुल 70.196 अरब डॉलर यानी 4.7 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए।

 

पेट्रोल 55 महीने में सबसे महंगा

आम आदमी के लिए पेट्रोल-डीजल लगातार मुसीबत बढ़ा रहे हैं। शुक्रवार को पेट्रोल अपने 55 महीने के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया और दिल्ली में यह 74.08 रुपए प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। इससे पहले सितंबर 2013 में पेट्रोल की कीमत इस भाव के ऊपर गई थी। वहीं, डीजल कुछ शहरों में 70 रुपए प्रति लीटर का भाव क्रॉस कर गया है।

 

सरकार के खजाने पर बढ़ा बोझ

पिछले 10 महीनों से क्रूड महंगा बना हुआ है, जिससे क्रूड का इंपोर्ट बिल भी बढ़ रहा है। करंट फाइनेंशियल में अप्रैल-फरवरी के दौरान भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल 25 फीसदी महंगा होकर 8070 करोड़ डॉलर हो गया है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के मुताबिक इन 11 महीनों में भारत का ग्रॉस इंपोर्ट बिल 25 फीसदी बढ़कर 9100 करोड़ डॉलर रहा है। अप्रैल-फरवरी के दौरान भारत ने एवरेज 55.74 डॉलर प्रति बैरल कीमत पर क्रूड ऑयल का इंपोर्ट किया, जबकि 2016-17 में यह आंकड़ा 47.56 डॉलर था। 

 

क्रूड से ऐसे प्रभावित होगी GDP

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि क्रूड ऑयल की कीमतें फाइनेंशियल ईयर 2019 में 12 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। अगर ऐसा होता है कि देश की इकोनॉमी पर इसका असर दिखेगा। सर्वे के अनुसार कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़ोत्तरी से जीडीपी 0.3 फीसदी तक गिर सकती है, वहीं महंगाई दर भी 1.7 फीसदी ऊंची हो सकती है।

 

महंगाई बढ़ने का डर

मार्च में रिटेल महंगाई दर कम होकर 5 महीने के निचले स्‍तर 4.28 फीसदी आ गई थी, लेकिन जानकार इसे स्टेबल नहीं मान रहे हैं। आरबीआई खुद यह अनुमान लगा चुका है कि फाइनेंशियल ईयर 2018-19 के पहले 6 महीनों में महंगाई दर 5 फीसदी से ऊपर निकल सकती है। पेट्रोल-डीजल भी रिकॉर्ड लेवल की ओर हैं। ऐसे में महंगाई आगे और बढ़ सकती है। 

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