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क्रूड में नरमी से मोदी को मिलेगी बड़ी राहत! 2 महीनों में 62 डॉलर तक गिर सकते हैं भाव

पिछले कुछ महीनों से जो क्रूड मोदी सरकार के लिए मुसीबत बना था, अब उसी ओर से राहत की खबर आ रही है।

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नई दिल्ली. पिछले कुछ महीनों से जो क्रूड मोदी सरकार के लिए मुसीबत बना था, अब उसी ओर से राहत की खबर आ रही है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की तेजी पर ब्रेक लग गया है। क्रूड में लगातार पांचवें दिन गिरावट रही है और ब्रेंट क्रूड 26 दिसंबर के बाद 10 फीसदी सस्ता हो चुका है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिाभर से जहां डिमांड घटी है, वहीं, यूएस में क्रूड प्रोडक्शन अपने आल टाइम हाई पर है। अगले 2 से 3 महीनों में क्रूड 62 डॉलर के लेवल तक गिर सकता है। क्रूड में नरमी रही तो सरकार को बैलेंसशीट सुधारने का मौका मिलेगा, वहीं महंगाई के लिहाज से भी राहत मिल सकती है। 

 

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सरकार ने क्रूड पर जताई थी चिंता
दिसंबर के अंतिम हफ्ते में ब्रेंट क्रूड 3 साल के हाई 71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। WTI क्रूड भी 66 डॉलर प्रति बैरल के साथ रिकॉर्ड स्तर पर था। बजट में फाइनेंस मिनिस्टर जेटली ने भी क्रूड की कीमतों पर चिंता जताते हुए कहा था कि इससे महंगाई और बढ़ सकती है। इकोनॉमिक सर्वे में भी आशंका जताई गई थी कि फाइनेंशियल ईयर 2019 में क्रूड में 12 फीसदी और इजाफा हो सकता है। ऐसे में क्रूड के 80 डॉलर के लेवल पर पहुंचने का डर था। सरकार ने FY18 और FY19 के लिए महंगाई दर का अनुमान भी बढ़ा दिया। जबकि, ग्रोथ अनुमान को पहले से कम किया है।

 

बॉन्ड यील्ड में तेजी से क्रूड में बिकवाली 
एंजेल ब्रोकिंग के कमोडिटी एंड रिसर्च वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता का कहना है कि दुनियाभर के कई बाजारों में बॉन्ड यील्ड में उछाल दिखा है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 4 साल के टॉप लेवल पर है। ऐसे में इसका दबाव भी इक्विटी के अलावा क्रूड मार्केट पर भी पड़ रहा है। लोग क्रूड ईटीएफ, म्युचुअल फंड से पैसे निकालकर बॉन्ड में लगा रहे हैं। ऐसे में क्रूड में प्रॉफिट बुकिंग से गिरावट बढ़ रही है। अगले 15 से 20 दिनों तक क्रूड में यह ट्रेंड देखा जा सकता है। 

 

US में प्रोडक्शन आल टाइम हाई पर, डिमांड घटी 
केडिया कमोडिटी के प्रेसिडेंट अजय केडिया का कहना है कि यूएस में इन्वेंट्री लगातार बढ़ रही हैं। वहीं, सर्दियां कम होने का असर है कि दुनियाभर से डिमांड में कमी आई है। खुद यूएस में कंजम्शन काफी कम हो गया है। इससे कुछ दिन पहले जहां ओवरबॉट की स्थिति थी, अब क्रूड मार्केट में सरप्लस हो रहा है। 
यूएस में जहां दिसंबर में औसतन 11 लाख बैरल प्रति दिन तक के रेश्‍यो से प्रोडक्शन घटा था, अब यह करीब 10.5 मिलियन यानी 1 करोड़ बैरल प्रति दिन हो चुका है जो आल टाइम हाई पर है। वहीं, यूएस गवर्नमेंट ने यह साफ कर दिया है कि क्रूड प्रोडक्शन में आगे भी कमी नहीं आएगी। 
डॉलर इंडेक्स में सुधार है और यह 90 के पार जा चुका है, जिससे क्रूड को सपोर्ट घटा है।

 

62/58 डॉलर तक गिर सकते हैं भाव 
अजय केडिया का कहना है कि फिलहाल अगले 2 से 3 महीनें क्रूड को सपोर्ट करने वाले फैक्टर नहीं दिख रहे हैं। गर्मियां भी आ रही हैं, जब क्रूड का कंजम्पशन कम हो जाता है। ओपेक देशों द्वारा प्रोडक्शन कट का फैसला आगे बढ़ाने के बाद यूएस में इन्वेंट्री घटना एक चिंता थी, लेकिन वहां प्रोडक्शन तेजी से रिकवर हुआ है। डॉलर इंडेक्स भी पहले से मजबूत हुआ है। ऐसे में अगले 2 से 3 महीनों में ब्रेंट क्रूड 62 डॉलर और डबल्यूटीआई क्रूड 58 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। डबल्यूटीआई क्रूड अभी 61.5 डॉलर की रेंज में है। अनुज गुप्ता का भी मानना है कि अगले कुछ महीने अब क्रूड इसी रेंज के आस-पास कारोबार करता दिख सकता है। 

 

क्रूड कैसे बन सकता है एडवांटेज 

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया था कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती हैं तो उस रेश्‍यो में ग्रोथ में 0.2 से 0.3 फीसदी तक कमी आती है। वहीं, डबल्यूपीआई इनफ्लेशन में 1.7 फीसदी की बढ़ोत्तरी होती है। इसी तरह से करंट अकाउंट डेफिसिट 1000 करोड़ डॉलर बढ़ सकता है। ऐसे में क्रूड की कीमतें गिरने से सरकार के लिए यह चिंता कम होगी। क्रूड 71 के लेवल से 6 डॉलर सस्ता हो चुका है और इसके 3 डॉलर और सस्ता होने की उम्मीद है। ऐसे में क्रूड में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल की राहत मिल सकती है। जबकि दिसंबर के अंतिम हफ्ते में जून 2017 की तुलना में क्रूड 44 डॉलर से बढ़कर 71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। यानी कीमतों में 26 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हुआ था। 

 

बैलेंसशीट सुधारने का मौका
भारत अपनी जरूरतों का 82 % क्रूड इंपोर्ट करता है। क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल उसी रेश्‍यो में बढ़ रहा था।  जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट की स्थिति पर असर पड़ रहा था। वहीं, अगर क्रूड सस्ता होता है तो सरकार को एक बार फिर बैलेंसशीट सुधारने का मौका मिलेगा। 

 

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महंगाई से मिलेगी राहत 
क्रूड की कीमतें घटने से इंडियन बास्केट में भी क्रूड सस्ता होगा। इससे तेज कंपनियों पर दबाव भी कम होगा। तेल कंपनियां क्रूड की कीमतों में होने वाली कमी का फायदा कंज्यूमर्स को दे सकती हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल सस्ता हो सकता है। फॉरेन ब्रोकरेज हाउस यूबीएस की रिपोर्ट के अनुसार अगर क्रूड की कीमतें 10 % बढ़ती हैं तो सीपीआई इन्फलेशन में 25 बेसिस प्वॉइंट की बढ़ोत्तरी हो सकती है। ऐसे में 2019 के आम चुनाव के पहले अगर महंगाई कम होती है तो सरकार के लिए यह बड़ा फैक्टर होगा। 

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