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क्रूड में बड़ी गिरावट, ओपेक और रूस के पॉजिटिव संकेतों से क्रूड 77 डॉलर के नीचे

इस साल करीब 20 फीसदी महंगा होने के बाद शुक्रवार को कच्चे तेल में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।

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नई दिल्ली। इस साल करीब 20 फीसदी महंगा होने के बाद शुक्रवार को कच्चे तेल में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। ओपेक देशों के बाद रूस द्वारा आगे प्रोडक्शन बढ़ाए जाने के संकेतों के बाद कच्चा तेल आज 2.36 फीसदी टूटकर 77 डॉलर प्रति    बैरल के नीचे आ गया है। कच्चा तेल गुरूवार को 78.79 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर बंद हुआ था। कच्चे तेल में गिरावट से रुपए में भी 61 पैसे की मजबूती आई है और रुपया 67.74 प्रति डॉलर के भाव तक मजबूत होकर कारोबार कर रहा है। 

 

एक साल में कच्चा तेल 45% महंगा

बता दें कि पिछले एक साल से कच्चे तेल में लगातार तेजी बनी हुई थी। पिछले एक साल में कच्चा तेल करीब 45 फीसदी महंगा हुआ, वहीं इस साल गुरूवार तक करीब 20 फीसदी भाव बढ़े थे। वहीं, जून 2017 के बाद से बात करें तो क्रूड अब तक 78 फीसदी तक महंगा हो चुका है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी आसमान पर पहुंच गई है और दिल्ली में पेट्रोल करीब 77.83 रुपए प्रति लीटर के भाव पर और डीजल 68.75 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। 

 

NYMEX पर क्रूड 70 डॉलर के नीचे
कच्चे तेल में गिरावट के बीच नीइमेक्स पर इसके भाव 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गए। वहीं, वेस्ट टेक्साज इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड के भाव भी 2 फीसदी की गिरावट के साथ 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गए हैं।  

 

क्यों प्रोडक्शन बढ़ाने के दिए संकेत
माना जा रहा है कि वेनेजुएला और ईरान की ओर से क्रूड सप्लाई में आगे बड़ी कमी आ सकती है। इसी की भरपाई के लिए ओपेक देश और रूस ने इस बात के संकेत दिए हैं कि क्रूड के प्रोडक्शन को घटाने को लेकर जो डील थी, उसमें कुछ बदलाव कर प्रोडक्शन बढ़ा सकते हैं। अब इसका असर कच्चे तेलइ की कीमतों पर देखी भी जा रही है। 

 

क्रूड में गिरावट से रुपए में तेजी
शुक्रवार को रुपए में बड़ी रिकवरी दर्ज की गई है। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 61 पैसे की बढ़त के साथ 67.74 के स्तर पर पहुंच गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड प्राइस में गिरावट से रुपए को मजबूती मिली। क्रूड की डिमांड बढ़ती है तो उसी रेश्‍यो में डॉलर की भी डिमांड बढ़ती है। वहीं, डिमांड घटने से डॉलर पर इसका उल्टा असर होता है। डॉलर की डिमांड कम होने से ही रुपए में मजबूती देखी जा रही है। असल में ओपेक देशों और रूस द्वारा प्रोडक्शन बढ़ाए जाने के संकेत से मार्केट में कच्चे तेल की कमी होने का डर घटा है। 

 

पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद

 

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के अनुसार क्रूड में नरमी आना अच्छा संकेत है। ऐसे में सरकार पर प्रेशर कम होगा। जिसकी वजह से उसके लिए कन्ज्यूमर राहत आसान होगा। अगर यह गिरावट जारी रही तो निश्चित तौर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आएगी।

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