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अरब के शेख बिगाड़ेंगे मोदी का खेल, यह फैसला पड़ सकता है भारी

अरब देश ऐसे कदम उठाने लगे हैं, जिससे एक बार फिर तेल की कमाई पर उनका ही कंट्रोल हो सके।

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नई दिल्‍ली. कभी दुनियाभर के तमाम देशों को तेल बेचकर शान-ओ-शौकत की जिंदगी जीने वाले अरब देशों के शेख अब इसी तेल की कमाई को लेकर परेशान हैं। सऊदी अरब, ओमान, यूएई, बहरीन और कुवैत जैसे देश सालों से दुनियाभर को तेल बेचकर भारी कमाई कर रहे थे। लेकिन, पिछले कुछ महीनों से उनका यह तेल का खेल ठंडा पड़ गया है। इसी वजह से ये देश ऐसे कदम उठाने लगे हैं, जिससे एक बार फिर तेल की कमाई पर उनका ही कंट्रोल हो सके। बस उनके इसी फैसले से हालात ऐसे बन रहे हैं कि यह मोदी सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। जानते हैं कि अरब देशों के फैसले से कैसे मोदी सरकार का बिगड़ सकता है खेल.....

 

 

तेल की सप्लाई घटाई
ग्लोबल लेंडर आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि अरब देशों को तेल से होने वाली कमाई ठंडी पड़ गई है, ऐसे में उन्हें अब कमाई के जल्द से जल्द दूसरे विकल्पों की तलाश कर लेनी चाहिए। इसके बाद अरब देशों ने दुनियाभर में तेल की सप्लाई घटा दी। जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती जा रही हैं। जिसका असर सीधे तौर पर भारत पर भी पड़ता दिख रहा है। 

 

 

आगे पढ़ें, कैसे मोदी सरकार के लिए बनेगा मुसीबत 

 

 

मोदी के पहले 3 साल तेल ने दिया साथ


मोदी सरकार जबसे सत्ता में आई, कच्चे तेल की कम कीमतों ने सरकार का साथ दिया। सरकार जब सत्ता में आई थी, तब कच्चे तेल की कीमतें इंटरनेशनल मार्केट में 110 डॉलर प्रति बैरल थीं। जो जून 2017 में घटकर 48 डॉलर तक आ गईं। यानी कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा कमी आई। सस्ते तेल के दम पर मोदी सरकार के दौरान देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आती गई। सस्ते तेल से सरकारी को महंगाई पर कंट्रोल करने के साथ ही देश का घाटा कम कर अर्थव्यवस्था सुधारने का मौका मिला। 

 

ऐसे बढ़ा सरकार का पैसा


-भारत अपनी जरूरतों का 82 फीसदी क्रूड आयात करता है। क्रूड की कीमतें कम होने से भारत का आयात पर होने वाला खर्च घट गया। जिससे देश का करंट अकाउंट डेफिसिट को कंट्रोल करने में भी मदद मिली। 
-क्रूड इंडस्ट्री की सबसे बड़ी डिमांड में एक है। ज्यादातर इंडस्ट्री में इसकी डिमांड है। ऐसे में सस्ते तेल से उत्पादन लागत में भी बचत हुई। जिससे महंगाई को काबू करने में मदद मिली। 
-मोदी सरकार के शुरू के 3 साल में क्रूड की कीमतें तो 50 फीसदी से ज्यादा कम हुईं, लेकिन पेट्रो प्रोडक्ट्स की खुदरा कीमतें उस अनुपात में कम नहीं हुईं। चाहे वह पेट्रोल-डीजल हो या अन्य प्रोडक्ट। 
-वहीं, सस्ते क्रूड से सरकार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का मौका मिल गया। 3 अक्टूबर 2017 के पहले 3 साल में सरकार ने पेट्रोल पर एक्‍साइज ड्यूटी 15.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर 22.7 रुपए प्रति लीटर कर दिया, वहीं डीजल पर यह 5.8 प्रति लीटर से 19.7 रूपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। 
-इन वजहों से सरकार का राजस्व बढ़ता गया। 

 

 

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ऐसे बिगड़ेगा खेल


-क्रूड महंगा होने से भारत को इंपोर्ट पर खर्च बढ़ाना पड़ रहा है। इंपोर्ट का खर्च बढ़ने से भारत का चालू खाता घाटा बढ़ेगा। इससे सरकार की बैलेंसशीट पर निगेटिव असर होगा। 
-क्रूड की कीमत बए़ने से तेल कंपनियों पर पेट्रोल-डीजल की कीमत ज्यादा रेश्‍यो में बढ़ाने का भी दबाव है। कीमतें ज्यादा बढ़ीं तो देश में महंगाई बढ़ने का डर बन जाएगा, जिससे लोगों में सरकार को लेकर निगेटिव इमेज बन सकती है। 
-ब्रोकरेज हाउस एनबीएस ने भी रिपोर्ट में कहा है कि क्रूड 10 फीसदी महंगा होने से सीपीआई इनफ्लेशन में 25 बेसिस प्वॉइंट की बढ़ोत्तरी हो सकती है। 
-सरकार कंज्यूमर्स को राहत देने के लिए एक्‍साइज ड्यूटी घटा सकती है। ऐसा करने पर सरकार की कमाई घटेगी। वहीं, अगर लोगों को राहत नहीं मिलती है तो सरकार की निगेटिव इमेज बन सकती है। 
-2018 से 2019 के बीच कुछ राज्यों के अलावा आम चुनाव भी होने हैं। ऐसे में महंगाई सरकार के लिए मुसीबत बन सकती है। 

 

 

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भारतीयों की घटी कमाई

 
अरब देशों की इकोनॉमी ठंडी पड़ने का असर उन भारतीयों पर भी पड़ा है, जो उन देशों में रोजगार के लिए जाते हैं। ऑफिशियल रिपोर्ट के मुताबिक अब अरब देशों में भारतीय वर्कर्स की संख्‍या घटने लगी है। पिछले 3 साल में यह सख्‍ंया 50 फीसदी तक कम है। 2014 में वहां जाने वाले वर्कर्स की संख्‍या 7.75 लाख थी जो 2016 में 5.07 लाख रह गई। वहीं, अरब देशों से भारत आने वाला पैसा भी 4.53 लाख करोड़ रुपए से घटकर 4.26 लाख करोड़ रुपए हो गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ने वाला है। 

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