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75 डॉलर तक पहुंच सकती हैं कच्चे तेल की कीमतें, मोदी सरकार के लिए बढ़ी मुसीबत

इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की लगातार बढ़ रही कीमतें मोदी सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।

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नई दिल्ली। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की लगातार बढ़ रही कीमतें मोदी सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती हैं। देश में रिटेल महंगाई अपने 17 महीनों के टॉप पर है। वहीं, क्रूड महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं। माना जा रहा है कि जब देश में रिटेल महंगाई दर ऊंची बनी हुई है, आम आदमी की जेब पर बोझ और बढ़ सकता है। वहीं, क्रूड महंगा होने से सरकार की बैलेंसशीट बिगड़ने का भी खतरा बन गया है। ऐसे में क्रूड की कीमतें कंट्रोल नहीं हुईं तो यह आम केंद्र व राज्य चुनावों से पहले सरकार के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकता है। 
 
 
डिमांड और सप्लाई का बैलेंस बिगड़ा
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि इंटरनेशनल मार्केट में जो हालात बने हैं, उससे क्रूड की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। बता दें कि क्रूड सोमवार को 70 डॉलर के स्तर को पार कर गया जो दिसंबर 2014 के बाद पहली बार हुआ है। फिलहाल अगले 2 महीनें क्रूड में गिरावट नजर नहीं आ रही है। उन‍का कहना है कि ओपेक देशों के अलावा रूस द्वारा प्रोडक्शन घटाने से सप्लाई घटी है। वहीं, पिछले दिनों ठंड बढ़ने से यूएस और कनाडा में भी रिग्स काउंट घटे हैं। ऐसे में डिमांड और सप्लाई का बैलेंस बिगड़ गया है। 
 
75 डॉलर तक जा सकती हैं क्रूड की कीमतें
यूएस में इकोनॉमिक रिकवरी देखी जा रही है। चीन में भी डाटा बेहतर आए हैं। ऐसे में यूएस में खुद कच्चे तेल की डिमांड बढ़ रही है। यही हाल चीन में भी है। यूरोप के कुछ देशों की ओर से डिमांड सुधरी है। वहीं, ओपेक देशों ने प्रोडक्शन कट आगे जारी रखने का फैसला लिया है, जिसमें कुछ और भी देश शामिल हैं। जियो-पॉलिटिकल टेंशन से भी अभी राहत नहीं है। इन वजहों से क्रूड अगले 2 महीनों में 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। पिछले 6 माह की बात करें तो क्रूड में 57 फीसदी से ज्यादा तेजी आ चुकी है। जून में क्रूड 44.48 डॉलर के लेवल पर था। 
 
पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान पर 
क्रूड महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी आसमान पर पहुंच गई हैं। सोमवार को दिल्ली में पेट्रोल 71 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमतें 61.74 रुपए प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर आ गईं। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आम आदमी की जेब पर बोझ लगातार बढ़ रहा है।
 
कीमतें 3 अक्टूबर के पहले वाले स्तर पर 
 

3 अक्टूबर के बाद से पेट्रोल-डीजल की कीमतें 

 

पेट्रोल  ड्यूटी घटने के बाद अब 
दिल्ली 68.38 71.18
कोलकाता 71.16 73.91
मुंबई 77.51  79.06
चेन्नई 70.85 73.80
 
 
डीजल ड्यूटी घटने के बाद अब 
दिल्ली 56.89 61.74
कोलकाता 59.55 64.40
मुंबई 60.43 65.74
चेन्नई 59.89 65.08

              

 
 
एक्साइज ड्यूटी घटने के बाद क्रूड 27% महंगा
सरकार द्वारा 3 अक्टूबर को एक्साइज ड्यूटी में कटौती किए जाने के बाद से क्रूड में लगातार तेजी बनी हुई है। 3 अक्टूबर के बाद से जहां इंटरनेशन मार्केट में क्रूड 27 फीसदी महंगा हो चुका है, वहीं इंडियन बास्केट में क्रूड की कीमतें 17 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इस रेश्‍यो में पेट्रोल-डीजल की कीमतें न बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर भी दबाव बना हुआ है।  
 
बता दें कि अक्टूबर की शुरूआत में महंगे हो रहे पेट्रोल-डीजल को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम कर दी थी। 3 अक्टूबर को इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड 55 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर था जो 15 जनवरी 2018 को 70 डॉलर के लेवल पर पहुंच गया। इंटरनेशन मार्केट में क्रूड की कीमतें अपने 3 साल के टॉप लेवल पर है। 
 
ऐसे बिगड़ेगा खेल
 
महंगाई बढ़ने का डर: क्रूड की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ने का भी डर होता है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड महंगा होने से इंडियन बास्केट में भी क्रूड महंगा हो जाता है। इससे तेज कंपनियों पर मार्जिन का दबाव भी बढ़ता है। तेल कंपनियां क्रूड की कीमतों में होने वाली बढ़ोत्तरी को कंज्यूमर्स पर पास ऑन कर सकती है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से महंगाई बढ़ने का भी डर होता है। हाल ही में फॉरेन ब्रोकरेज हाउस यूबीएस ने रिपोर्ट में कहा था कि अगर क्रूड की कीमतें 10 फीसदी बढ़ती हैं तो सीपीआई इनफलेशन में 25 बेसिस प्वॉइंट की बढ़ोत्तरी हो सकती है। अगर महंगाई और बढ़ती है तो आने वाले चुनावों में इसका असर देखा जा सकता है। 
 
बढ़ सकता है CAD: क्रूड की कीमतें बढ़ने से देश का करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है। असल में भारत अपनी जरूरतों का 82 फीसदी क्रूड इंपोर्ट करता है। क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल उसी रेश्‍यो में महंगा होगा, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट की स्थिति बिगड़ेगी। यानी सरकार के बैलेंसशीट पर निगेटिव असर होगा, जिससे स्पेंडिंग प्रभावित हो सकती है। जिसका सीधा असर इकोनॉमी पर होगा।  
 
सरकार की कमाई पर असर: सरकार कंज्यूमर्स को राहत देने के लिए एक्‍साइज ड्यूटी घटा सकती है। ऐसा करने पर सरकार की कमाई घटेगी। वहीं, अगर लोगों को राहत नहीं मिलती है तो सरकार की निगेटिव इमेज बन सकती है। 2018 से 2019 के बीच कुछ राज्यों के अलावा आम चुनाव भी होने हैं। ऐसे में महंगाई सरकार के लिए मुसीबत बन सकती है। 
 
आगे पढ़ें, तेल ने मोदी का कैसे दिया था साथ 
 
 
तेल ने ही दिया था मोदी का साथ
 
मोदी के पहले 3 साल तेल ने दिया साथ: मोदी सरकार जबसे सत्ता में आई, कच्चे तेल की कम कीमतों ने सरकार का साथ दिया। सरकार जब सत्ता में आई थी, तब कच्चे तेल की कीमतें इंटरनेशनल मार्केट में 110 डॉलर प्रति बैरल थीं। जो जून 2017 में घटकर 48 डॉलर तक आ गईं। यानी कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा कमी आई। सस्ते तेल के दम पर मोदी सरकार के दौरान देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आती गई। सस्ते तेल से सरकारी को महंगाई पर कंट्रोल करने के साथ ही देश का घाटा कम कर अर्थव्यवस्था सुधारने का मौका मिला। 
 
ऐसे बढ़ा सरकार का पैसा: भारत अपनी जरूरतों का 82 फीसदी क्रूड आयात करता है। क्रूड की कीमतें कम होने से भारत का आयात पर होने वाला खर्च घट गया। जिससे देश का करंट अकाउंट डेफिसिट को कंट्रोल करने में भी मदद मिली। 
-क्रूड इंडस्ट्री की सबसे बड़ी डिमांड में एक है। ज्यादातर इंडस्ट्री में इसकी डिमांड है। ऐसे में सस्ते तेल से उत्पादन लागत में भी बचत हुई। जिससे महंगाई को काबू करने में मदद मिली। 
-मोदी सरकार के शुरू के 3 साल में क्रूड की कीमतें तो 50 फीसदी से ज्यादा कम हुईं, लेकिन पेट्रो प्रोडक्ट्स की खुदरा कीमतें उस अनुपात में कम नहीं हुईं। चाहे वह पेट्रोल-डीजल हो या अन्य प्रोडक्ट। 
-वहीं, सस्ते क्रूड से सरकार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का मौका मिल गया। 3 अक्टूबर 2017 के पहले 3 साल में सरकार ने पेट्रोल पर एक्‍साइज ड्यूटी 15.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर 22.7 रुपए प्रति लीटर कर दिया, वहीं डीजल पर यह 5.8 प्रति लीटर से 19.7 रूपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। 
-इन वजहों से सरकार का राजस्व बढ़ता गया। 
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