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38 के पेट्रोल पर 40 रु टैक्स वसूलती हैं केंद्र,राज्य सरकारें, GST लगने पर घट जाएंगी कीमत

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं।

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नई दिल्ली. देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं। मुंबई में पेट्रोल की कीमतें जहां 85 रुपए के पार पहुंच गई और वहीं दिल्ली में 80 रुपए के करीब पहुंच   रही हैं। ऐसे   में देश में पेट्रोल और डीजल की महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि फिलहाल पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार को इन सवालों का कोई जवाब नहीं सूझ रहा है।

 

 

38 के पेट्रोल पर 40 रुपया टैक्स वसूलती हैं सरकारें

दिल्ली की बात करें तो प्रति लीटर 38 रुपए के पेट्रोल पर केंद्र और राज्य सरकारें लगभग 40 रुपए का टैक्स वसूलती है। इसमें मुख्य रूप से 19.48 रुपए एक्साइज ड्यूटी शामिल है, जो केंद्र सरकार द्वारा वसूली जाती है। इसके अलावा डीलर कमीशन 3.63 रुपए, राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला 16.55 रुपए वैट भी शामिल है। तब जाकर इसकी कीमत लगभग 78 रुपए होती है।

 

 

41 के डीजल पर 28 रुपया टैक्स वसूलती हैं सरकारें

वहीं दिल्ली में बिकने वाले डीजल की बात करें तो प्रति लीटर 40.78 रुपए के डीजल पर केंद्र और राज्य सरकारें लगभग 28 रुपए का टैक्स वसूलती है। इसमें मुख्य रूप से केंद्र सरकार द्वारा वसूली जाने वाली 15.33 रुपए एक्साइज ड्यूटी शामिल है। इसके अलावा डीलर कमीशन 2.53 रुपए, राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला 10.11 रुपए वैट भी शामिल है। तब जाकर इसकी कीमत लगभग 69 रुपए होती है।

 

 

4 साल में 31 डॉलर घटा क्रूड

मई 2014 में जब भाजपा ने सत्ता संभाली तो ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 80 डॉलर रह गया है। क्रूड की यह स्थिति तब है, जब वह हाल के महीनों में महंगा हुआ है, लेकिन फिर भी 2014 के 111 डॉलर/बैरल से 28% नीचे है। 2014 में पेट्रोल 71 रुपए था, जो आज 77 रुपए प्रति लीटर के पार चला गया है। यानी पेट्रोल उस समय की तुलना में 8% महंगा है। अगर सरकार विपक्ष की मांग और नीति आयोग के सुझाव पर अमल करते हुए पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाती है तो पेट्रोल 25 रुपए तक सस्ता हो सकता है।

 

 

मोदी सरकार के लिए मुसीबत बना पेट्रोल

-मौजूदा दौर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें सरकार के लिए मुसीबत बन गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार जहां एक तरफ कीमतों के डेली रिवीजन की व्यवस्था खत्म करने पर विचार कर रही है।

-वहीं ओएनजीसी जैसी तेल उत्पादन कंपनियों पर विंडफाल टैक्स लगाने की योजना पर भी विचार हो रहा है। इसके मुताबिक, सरकार क्रूड की कीमतें 70 डॉलर से ऊपर जाने पर तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों पर विंडफाल टैक्स लगा सकती है।

-इसके अलावा अगर राज्य सरकारें वैट में कुछ कमी करें तो भी कीमतों पर कुछ राहत मिल सकती है।  दरअसल देश में राज्य औसतन पेट्रोल की कीमत की तुलना में 27 फीसदी वैट वसूलते हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पेट्रोल की कीमत 85 रुपए से भी ज्यादा है। हालांकि राज्य फिलहाल इस पर राजी नहीं है।

 

जीएसटी लगा तो कीमतें घटने की उम्मीद

अगर पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो कीमतों में खासी कमी आने की उम्मीद है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकारों को इससे नुकसान हो सकता है।

25 मई की कीमतों को देखें तो साफ है कि अगर टैक्स न लगे तो पेट्रोल के दाम काफ़ी नीचे आ जाएंगे। 78 रुपए प्रति लीटर का दाम टैक्स (एक्साइज़ ड्यूटी और वैट) हटने पर 42 रुपए प्रति लीटर (डीलर कमीशन सहित) रह जाएंगे।

वहीं अगर इसमें अधिकतम 28% की दर से जीएसटी जोड़ दिया जाए तो भी यह 53.50 रुपए प्रति लीटर बैठेगा। यानी मौजूदा रेट से लगभग 24 रुपए कम।

 

 

जून के पहले हफ्ते होगी जीएसटी काउंसिल की मीटिंग

जून के पहले हफ्ते में होने वाली जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में शामिल करने के मुद्दे पर विचार होने की उम्मीद है।

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