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68 डॉलर/बैरल तक 2 महीने में आ सकता है क्रूड, सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल

रोजाना 10 लाख बैरल प्रोडक्शन बढ़ने से अगले 2 महीनों में क्रूड का भाव 68 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है।

crude price can come down to 68$ per barrels in 2 months

नई दिल्ली.  क्रूड उत्पादक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्पोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) क्रूड ऑयल का प्रोडक्शन जुलाई से रोजाना 10 लाख बैरल बढ़ाने पर सहमत हो गया है। वियना में हुई बैठक में ओपेक एनर्जी मिनिस्टर ने कहा कि वे अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए क्रूड का प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं। वे जुलाई से रोजाना 10 लाख बैरल क्रूड प्रोडक्शन बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रोडक्शन बढ़ने से क्रूड की सप्लाई बढ़ेगी, जिससे आगे चलकर कीमतों में गिरावट होगी। अगले 2 महीनों में भाव 68 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो सकती है।

 

जुलाई से रोजाना 10 लाख बैरल बढ़ेगा प्रोडक्शन

ओपेक देशों के साथ रूस जुलाई से रोजाना 10 लाख बैरल क्रूड प्रोडक्शन बढ़ाने पर सहमत हुआ है। सऊदी एनर्जी मिनिस्टर खालिद अल-फलिह ने वियना में हुई बैठक के बाद पत्रकारों को कहा कि मुझे लगता है कि यह दूसरी छमाही में आने वाली अतिरिक्त मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। पेट्रोलियम एक्सपोर्ट करने वाले देशों और सहयोगी देशों के संगठनों के बीच 18 महीने के सप्लाई कटौती समझौते में संशोधन पर बातचीत केंद्रित थी। 


इन वजहों से आई थी क्रूड में तेजी

नवंबर 2014 के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड का दाम इंटरनेशनल मार्केट में 80 डॉलर के पार निकला था। क्रूड के दाम बढ़ने के पीछे ओपेक और रूस द्वारा प्रोडक्शन में कटौती, ईरान पर अमेरिका की तरफ से प्रतिबंध के बाद सप्लाई घटने का डर आदि वजह थीं। ईरान क्रूड का तीसरा सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है। इसके अलावा वेनेजुएला से क्रूड ऑयल की आपूर्ति में कमी आना भी इसकी वजह थी।


68 डॉलर तक गिर सकते हैं भाव

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, ओपेक देशों द्वारा क्रूड का प्रोडक्शन बढ़ाए जाने के फैसले से आगे चलकर कीमतों में नरमी आएगी। अमेरिका में पहले से ही क्रूड का प्रोडक्शन हाई पर है। वहीं ओपेक और नॉन-ओपेक द्वारा प्रोडक्शन बढ़ाने से सप्लाई बढ़ जाएगी जिसका असर कीमतों पर पड़ेगा। अगस्त या सितंबर तक ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 68 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड 74 डॉलर प्रति बैरल पर है।

वहीं एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटी के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने कहा कि क्रूड का प्रोडक्शन बढ़ने का फायदा ऑयल इम्पोर्टर देशों को मिलेगा। दो बड़े ऑयल इम्पोर्टर देश भारत और चीन बढ़ती कीमतों को लेकर कड़े तेवर दिखाए थे। अब सप्लाई बढ़ने से क्रूड कीमतें कम होने का फायदा इनको मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्रूड की कीमतें गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं।


पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद

एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा का कहना है कि क्रूड का प्रोडक्शन बढ़ने पर आने वाले दिनों में क्रूड की कीमतें घटकर 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ जाएगीं। ऐसे में सरकार पर प्रेशर कम होगा। जिसकी वजह से उसके लिए कन्ज्यूमर को राहत देना आसान होगा। अगर यह गिरावट जारी रही तो निश्चित तौर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आएगी।


क्रूड में गिरावट से रुपया स्टेबल होगा

शुक्रवार को रुपए में बड़ी रिकवरी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे की बढ़त के साथ 67.82 के स्तर पर पहुंच गया। अनुज गुप्ता का कहना है कि क्रूड प्राइस में गिरावट से रुपए को मजबूती मिलेगी। क्रूड की डिमांड बढ़ती है तो उसी रेश्‍यो में डॉलर की भी डिमांड बढ़ती है। वहीं, डिमांड घटने से डॉलर पर इसका उल्टा असर होता है। डॉलर की डिमांड कम होने से ही रुपए में मजबूती देखी जा रही है। शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे की मजबूती के साथ 67.82 के स्तर पर बंद हुआ।


महंगाई से मिलेगी राहत

क्रूड की कीमतें घटने से इंडियन बास्केट में भी क्रूड सस्ता होगा। इससे तेल कंपनियों पर दबाव भी कम होगा। तेल कंपनियां क्रूड की कीमतों में होने वाली कमी का फायदा कंज्यूमर्स को दे सकती हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल सस्ता हो सकता है। तेल सस्ता होने पर बढ़ती महंगाई से राहत मिलेगी।


शेयर बाजार में आएगी तेजी

केडिया का कहना है कि क्रूड की कीमतें कम होने का असर शेयर बाजार पर देखने को मिलेगा। कीमतें घटने से बाजार में तेजी आएगी।

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