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नैफेड और IOC की बड़ी स्कीम, अब कूड़ा बेचकर कर सकेंगे कमाई, मिलेंगे प्रति किलो इतने रुपए

यूपी से होगा योजना का आगाज, पीएम मोदी करेंगे शुभारंभ

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नई दिल्ली. सरकारी संस्था नेशनल एग्रीकल्चर कॉपरेशन मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) की ओर से एक बड़ी पहल की जा रही है। इसके तहत पराली, सब्जी मंडियों के निकलने वाले अपशिष्ट, गन्ने की खोई और अन्य तरह के कूड़े से बॉयो सीएनजी गैस तैयार की जाएगी।  इसे लेकर नैफेड ने इंडियन ऑयल के साथ एक करार किया है। पहले चरण में देशभर में 100 बॉयो सीएनजी प्लांट बनाए जाएंगे, जहां कूडे से बॉयो सीएनजी गैस बनाई जाएगी। इसे मार्केट में 48 रुपए प्रति किग्रा. के रेट से बेचा जाएगा। इस स्कीम पर 5000 करोड़ रुपए तक का खर्च आएगा

 

25 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार 

नैफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव कुमार चड्डा ने मनी भास्कर को बताया कि पराली और अन्य कूडे की खरीद 50 पैसे से लेकर एक रुपए प्रति किग्रा. के हिसाब से की जाएगी। भुगतान राशि कितनी रखी जाएं। इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। साथ ही एक प्लांच से कम से कम 250 लोगों रोजगार मिलेगा। ऐसे में करीब 25 हजार रोजगार पैदा होंगे। साथ ही किसानों की आमदनी को बढ़ाया जा सकेगा। कूडे से फ्यूल बनाने की योजना से किसानों को पराली जलाने से रोका जा सकेगा, जो कि प्रदूषण की एक वजह बना हुआ है। 

 

 

योजना के लिए कहां से आएगा पैसा

इस पूरी योजना के लिए कई माध्यमों से पैसा वसूला जाएगा। इसमें पेरिस जलवायु समझौते के तहत ग्रीन एनर्जी के विकास फंड धन लिया जाएगा। साथ संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से ग्रीन एनर्जी के फंड से इसे जुटाया जाएगा। साथ ही रिलायंस जैसे प्राइवेट पार्टनर की मदद से भी फंड इक्ट्ठा किया जाएगा। 

 

 

मुजफ्फरनगर में लगेगा देश का पहला बॉयो सीएनजी प्लांट 

वेस्टर्न यूपी के मुजफ्फरनगर इलाके में देश का पहला बॉयो सीएनजी प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जो कि त्रिवेणी शुगर मिल के पास होगी। ये सीएनजी प्लाट करीब 6 माह में बनकर तैयार हो जाएंगे। पीएम मोदी देश लोकसभा चुनाव से पहले बॉयो सीएनजी प्लांट का उद्धाटन कर सकते हैं। 

 

 

पंचायतों और अन्य संस्थाओं की मदद से इकट्ठा किया जाएगा कूड़ा

नैफेड की इस योजना से जहां एक ओर आम लोग आमदनी कर सकेंगे, वहीं प्रदूषण की समस्या को दूऱ किया जा सकेगा। बता दें कि पराली से दिल्ली एनसीआर जैसे में प्रदूषण एक बड़ी वजह बनकर खड़ा हुआ है।  गांवों से पराली और अन्य अपशिष्ट को इक्ट्टठा करने के लिए पंचायतों, स्थानीय निकायों, सहकारी संस्थाओं की मदद ली जाएगी। साथ ही उन्हें इसे लेकर जागरुक किया जाएगा। 

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