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पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर बोले प्रधान- GST के दायरे में आएं पेट्रो प्रोडक्‍ट्स, कंज्‍यूमर को होगा फायदा

नई दिल्‍ली.  पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों पर पेट्रोलियम मिनिस्‍टर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि सरकार की इस पर नजर है। पेट्रो प्रोडक्‍ट्स एक इंटरनेशनल कमोडिटी है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोत्‍तरी का कुछ असर भारत के मार्केट पर भी होता है। यानी, इंटरनेशनल मार्केट में जैसे हालात होंगे, उसी तरह का असर घरेलू मार्केट पर भी होगा। प्रधान ने सोमवार को कहा कि जीएसटी काउंसिल को पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट्स को जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए। इसका फायदा कंज्‍यूमर को होगा। दिल्‍ली में सोमवार को पेट्रोल की कीमतें 5 साल के टॉप 73.83 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गईं। 

 

बढ़ती कीमतों पर सरकार चिंतित 
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित है। भारत एक कंज्‍यूमर सेंसेटिव देश है। इसे देखते हुए सरकार ने पिछले साल एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती की थी। कुछ राज्‍यों ने भी जिम्‍मेदारी समझते हुए वैट घटाए थे। अन्‍य दूसरे राज्‍यों को भी ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए। देश में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पिछले साल जून से फ्यूल कीमतों की समीक्षा रोज करती हैं।

 

बता दें, वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने नवंबर 2014 और जनवरी 2016 के बीच एक्‍साइज ड्यूटी में 9 बार बढ़ोत्‍तरी की। जबकि ग्‍लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में गिरावट थी। इसके बाद जेटली ने पिछले साल अक्‍टूबर में सिर्फ एक बार 2 रुपए प्रति लीटर एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती की थी। एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती के साथ ही केंद्र सरकार ने राज्‍य सरकारों को वैट में कटौती करने के लिए कहा था। जिसके बाद केवल चार राज्‍यों महाराष्‍ट्र, गुजरात, मध्‍य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश ने वैट घटाया था। 

 

पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाया जाए 
प्रधान ने कहा कि पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट्स को जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए जिससे कि कंज्‍यूमर को सही कीमतों का लाभ मिल सके। उन्‍होंने कहा, ''मैं जीएसटी काउंसिल से फिर अपील करता हूं कि अब इस प्रोडक्‍ट को जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स) के दायरे में लाए जिससे कि कंज्‍यूमर को तर्कसंगत कीमतों का लाभ मिल सके।'' राज्‍य सरकारें पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने के पक्ष में नहीं है। उनको डर है कि कि इससे उनका वैट से होने वाला रेवेन्‍यू खत्‍म हो जाएगा। बता दें, इंडियन बॉस्‍केट में क्रूड की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जा चुकी हैं। 
 
पेट्रोलियम मिनिस्‍ट्री कर चुकी है एक्‍साइज कटौती की मांग 
इस साल की शुरुआत में पेट्रोलियम मिनिस्‍ट्री पेट्रोल-डीजल पर एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती की मांग कर चुकी है। जिससे कि इंटरनेशनल मार्केट में तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव से कंज्‍यूमर्स को राहत दी जा सके। लेकिन वित्‍त मंत्री अरुण जैटली ने 1 फरवरी को अपने बजट में इस डिमांड पर कोई ध्‍यान नहीं दिया। साउथ एशियाई देशों में भारत  में पेट्रोल-डीजल के दाम सबसे ज्‍यादा है। इसकी वजह यह है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमत में आधी हिस्‍सेदारी टैक्‍स की है।

 


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