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24 अप्रैल से नहीं बदली पेट्रोल-डीजल की कीमतें, कर्नाटक चुनाव से पहले तेल कंपनियों ने उठाया कदम

कर्नाटक चुनाव से दो हफ्ते पहले सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों की नियमित समीक्षा रोक दी है।

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नई दिल्‍ली. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए होने वाले मतदान से दो हफ्ते पहले सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों की नियमित समीक्षा रोक दी है। जबकि बेंचमार्क इंटरनेशनल रेट करीब 2 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ चुके हैं। पेट्रोल की कीमतें 55 महीने के टॉप लेवल 74.63 और डीजल रिकॉर्ड लेवल 65.93 रुपए प्रति लीटर पर हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने 24 अप्रैल से फ्यूल की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। कर्नाटक में 12 मई को मतदान होने वाला है। वहीं, वित्‍त मंत्रालय ने एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती से इनकार किया है। 

तेल कंपनियों की ओर से जारी होने वाला डेली प्राइस नोटिफिकेशन दिखाता है कि 24 अप्रैल से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं। फ्यूल प्राइसिंग सिस्‍टम से जुड़े एक सूत्र ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि कंपनियों की तरफ से यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब पेट्रोल के लिए बेंचमार्क इंटरनेशनल रेट 24 अप्रैल के 78.84 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अब 80.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुके हैं। इस अवधि में बेंचमार्क इंटरनेशनल डीजल रेट 84.68 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 86.35 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुके हैं। इसके अलावा, रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर इस अवधि में 65.41 से गिरकर 66.14 के स्‍तर पर आ गया है। रुपए की कमजोर से आयात महंगा हुआ है। 

 

कंपनियों का बयान देने से इनकार 
तेल कंपनियों के अधिकारियों ने प्राइसिंग के मसले पर बातचीत से इनकार कर दिया। उन्‍होंने बताया कि उन्‍हें इस मसले पर बातचीत नहीं करने के लिए कहा गया है। तीनों सरकारी तेल कंपनियों में से एक के शीर्ष अधिकारी ने कहा, ''हमें प्राइसिंग पर चर्चा नहीं करने के लिए कहा गया है। आप न तो मुझे कोट कर सकते हैं या मेरी कंपनी का नाम इस मामले जाहिर कर सकते हैं।'' दूसरी ओर, तेल मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि प्राइसिंग के मसले पर वो कुछ नहीं करते हैं यह कंपनियों का मामला है कि वे इसे कैसे तय करती हैं। तेल मिनिस्‍टर धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले महीने उन रिपोर्ट्स से इनकार किया था कि सरकारी तेल कंपनियों को कम से कम 1 रुपए प्रति लीटर की मूल्‍यवृद्धि को अब्‍जॉर्ब करने का निर्देश दिया गया है। 

 

गुजरात चुनाव से पहले घटे थे दाम 
गुजरात चुनाव के मतदान से पहले दिसंबर 2017 की पहले दो हफ्ते में सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन 1-3 पैसे की कटौती हुई थी। मतदान होने के बाद कीमतों में तेजी शुरू हो गई थी। गुजरात में 14 दिसंबर को मतदान हुआ था। उस समय यह अटकलें लगाई गई थी कि सरकार ने तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाने के लिए कहा गया है। 


जून, 2017 से बदला था कीमतों में बदलाव का तरीका 
सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले साल जून में पेट्रोल-डीजल की कीमतों की रोज समीक्षा करने का फैसला किया था। 15 साल बाद प्राइसिंग का तरीका बदलाव था। इससे पहले हर महीने की पहली और 16वीं तारीख को पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा होती थी। 

 

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