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दिल्ली सरकार ने खोला पिटारा, किसानों-छात्रों समेत सभी को बांटे तोहफे

किसानों को बिजली बिल पर सब्सिडी,मेधावी छात्रों को मिलेंगे टैबलेट

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नई दिल्ली। दिल्ली के वित्तमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को विधानसभा में आम आदमी पार्टी (आप) का पांचवां बजट पेश किया, जिसमें दिल्ली सरकार द्वारा 2019-2020 के लिए कुल 60,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। सिसोदिया ने अपने बजट भाषण में सैनिकों, पुलवामा हमले के शहीदों और उनके परिवारों को बजट समर्पित किया। उन्होंने कहा, "बजट शहीदों, सैनिकों और उनके परिवारों के सपनों को पूरा करने और उनके कल्याण के लिए है।"  सिसोदिया ने कहा कि 2019-20 के लिए बजट का अनुमान 60,000 करोड़ रुपये है, जो 2014-15 के बजट से दोगुना है।  उन्होंने कहा, "दिल्ली आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है, जो अपने स्वयं के 95 प्रतिशत संसाधन जुटाता है और किसी भी बाहरी वित्तीय सहायता पर निर्भर नहीं रहता है।" 

 

किसानों को निर्धारित शुल्क पर 20 रुपये प्रति किलोवाट देना होगा

 

दिल्ली के राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा है कि मंत्रिमंडल ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में एग्रीकल्चर कनेक्शन के तहत दिए गए बिजली के निर्धारित शुल्क (फिक्स्ड चार्ज) पर किसानों को 105 रुपये प्रति किलोवाट की सब्सिडी देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अब किसानों को निर्धारित शुल्क पर 20 रुपये प्रति किलोवाट देना होगा जो अब तक 125 रुपये प्रति किलोवाट था। गहलोत ने ट्वीट कर कहा, "माननीय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी का किसान भाइयों का बड़ा तोहफा। दिल्ली कैबिनेट ने आज प्रस्ताव को मंजूरी दी। सरकार हर एग्रीकल्चर कनेक्शन पर 105 प्रति किलोवाट की सब्सिडी देगी। अब किसान भाई को फिक्स्ड चार्ज केवल 20 प्रति किलोवाट पर ही देना होगा।"

 

पहले 125 रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह बिजली शुल्क


दिल्ली में टैरिफ अनुसूची के अनुसार कृषि उपयोग के लिए निर्धारित बिजली शुल्क 125 रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह था। राष्ट्रीय राजधानी के किसान उच्च बिजली शुल्क के मुद्दे पर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी से खुश नहीं थे। एक किसान ने आईएएनएस से कहा, "अगर किसी किसान के पास ट्यूबवेल चलाने के लिए 10 किलोवाट का बिजली मीटर है तो उसे हर महीने न्यूनतम 1,250 रुपये का भुगतान करना होता है। चार्ज किलोवाट में वृद्धि के साथ बढ़ता है।"  किसानों को कभी-कभी प्रति माह 4,000 रुपये से अधिक का भुगतान करना पड़ता था जो उत्पादन की समग्र लागत को बढ़ा रहा था।

 

दो ने विश्वविद्यालय खोलने का प्रस्ताव


दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में दो नए विश्वविद्यालयों का प्रस्ताव दिया है। वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने 2019-20 के बजट का 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए रखे जाने की घोषणा करते हुए कहा कि एप्लाइड साइंसेज विश्वविद्यालय लोगों को पेशेवर पाठ्यक्रम देखने के तरीके को बदलने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय तीन महीने के मॉड्यूलर से पीएचडी और एम.फिल स्तर तक के कोर्स कराएगा।  दूसरा प्रस्तावित विश्वविद्यालय शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए है। 

11 और 12 के छात्रों को सरकार देगी टैबलेट 


सिसोदिया ने बजट सत्र के अपने भाषण में कहा, "2019-2020 में कुल बजट खर्च का 26 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा को मिलेगा।" उन्होंने कहा, "प्रतिभा स्कूल, स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के सभी कक्षा 11 और 12 के छात्रों और 10वीं कक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को सरकार टैबलेट देगी।" उन्होंने कहा कि उद्यमिता पाठ्यक्रम भी, जो छात्रों को अपना उद्यम शुरू करने के लिए धन देगा, आगामी सत्र से लॉन्च किया जाएगा। 

 

फसलों के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए


2018-19 में दिल्ली का बजट 53,000 करोड़ रुपये और 2017-18 में 44,370 करोड़ रुपये का था।  वर्तमान प्रस्तावित बजट में शिक्षा को फिर से 26 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार शुरू से ही अपने बजट का एक-चौथाई हिस्सा शिक्षा के लिए रखती आई है।"  उन्होंने यह भी कहा कि 2019-20 में परिवहन क्षेत्र का हिस्सा दोगुना हो गया है। सिसोदिया के अनुसार, "वित्त वर्ष 2019-20 में सार्वजनिक परिवहन की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए 1,807 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो 2018-19 के संशोधित अनुमानों से लगभग दोगुना है।"  उन्होंने कहा कि बजट में स्वामीनाथन आयोग द्वारा फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की सिफारिशों को लागू करने के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

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